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चारा घोटाले में Lalu Yadav बरी होंगे या मिलेगी सजा, 15 फरवरी को होगा किस्मत का फैसला, जानें क्या है घोटाला और लालू का कनेक्शन

Lalu Yadav

चारा घोटाला एकीकृत बिहार राज्य का सबसे बड़ा घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे।ब‍िहार का यह बहुचर्च‍ित चारा घोटाला एक बार फ‍िर सुर्ख‍ियों में है। कई कोषागारों से अवैध तरीके से सरकारी रुपयों की न‍िकासी का यह मामला ब‍िहार के मुख्‍यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) के कार्यकाल से जुड़ा है। इस घोटाले के सबसे बड़े मामले में सीबीआइ कोर्ट लालू प्रसाद यादव सहित 99 आरोपियों की किस्मत का फैसला सुनाने जा रही है। सीबीआइ कोर्ट ने इसके ल‍िए 15 फरवरी का द‍िन तय कर द‍िया है।

बढ़ सकती है मुश्किलें

चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद समेत 102 आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। डोरंडा कोषागार से जुड़े 47ए/96 में फैसला फिजिकल कोर्ट में आएगा। 139.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में प्राथमिकी के 9 साल बाद 26 सितंबर 2005 को लालू प्रसाद समेत 148 के खिलाफ आरोप तय किया गया था।

चार मामलों में पहले ही सुनायी जा सकी है सजा

कानून के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से चारा घोटाले के चार मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें पहले ही दोषी करार दिया है। उसे देखते हुए ये आशंका जतायी जा रही है कि झारखंड में लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले के पांचवें और अंतिम मामले में भी सजा सुनायी जा सकती है। रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में 15 फरवरी को फैसला सुनाये जाने की तिथि निर्धारित की है। लालू प्रसाद यादव अदालत में सशरीर उपस्थित होने के लिए 14 फरवरी को ही रांची पहुंच जाएंगे।

जेल होने पर जमानत के लिए करना पड़ सकता है इंतजार

लालू प्रसाद यादव अगर बरी हो जाते हैं, तब तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। कानून के जानकारों का कहना है कि उन्हें तीन साल से कम सजा मिलती है, तो निचली अदालत से ही जमानत मिल जाएगी। लेकिन तीन साल से अधिक की सजा हुई, तो उन्हें जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी। कोरोना गाइडलाइन के कारण जिस तरह से एहतियात बरतते हुए सुनवाई चल रही है, वैसी स्थिति में उन्हें जमानत के लिए 4-5 सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। सजा सुनाये जाने के साथ ही उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा।

आधी सजा लालू प्रसाद काट चुके हैं लालू 

सीबीआई की अदालत द्वारा सुनाई गयी सजा की आधी सजा लालू प्रसाद काट चुके हैं और करीब 18 बीमारियों से ग्रस्त भी हैं. अगर उन्हें मामले में दोषी पाया जाता है और सजा सुनाई जाती है तो ऐसे में अस्वस्थता और आधी सजा काट लेने के कारण पूरी संभावना है कि वह दिल्ली के एम्स में इलाज के लिए भर्ती हो जाएंगे।

15 फरवरी को लालू प्रसाद की किस्मत का फैसला

अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले में डोरंडा कोषागार से करीब 139.5 करोड़ रुपये के अवैध निकासी से जुड़े मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो गयी है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत में आखिरी आरोपी डॉ शैलेश कुमार ने  फाइनल बहस पूरी कर ली। लालू प्रसाद के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि मामले में सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 15 फरवरी को फैसला सुनाया जाएगा।

चारा घोटाले का सबसे बड़ा मामला डोरंडा कोषागार

डोरंडा कोषागार मामले में 176 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट की गयी थी। इसके बाद सीबीआई की ओर से 14 साल तक सबूत पेश किया गया। 16 मई 2019 को साक्ष्य पेश करने का काम बंद हुआ, इसके बाद आरोपियों के बयान 16 जनवरी 2020 को दर्ज किये गये। 26 फरवरी 2021 को बचाव पक्ष की गवाही पूरी हुई। वहीं, 7 अगस्त 2021 को अभियोजन पक्ष की बहस खत्म हुई। इसके बाद आरोपियों की ओर से बहस हो रही थी, जो शनिवार को खत्म हो गयी। इसके साथ ही लगभग 26 साल तक चली सुनवाई में आरोपियों की संख्या घटकर 102 रह गयी।

लालू प्रसाद के खिलाफ पांचवें मामले में आएगा फैसला

रांची स्थित सीबीआई कोर्ट में लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले के पांच केस दर्ज किये गये थे। इसमें चार में फैसला आ चुका है। सभी मामले में सजा सुनायी गयी है। अब पांचवें और अंतिम केस में फैसला आना बाकी रह गया है। 15 फरवरी को अदालत इस पर अपना फैसला सुनाएगी।

 चारा घोटाला से लालू का कनेक्शन

करीब 900 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। कहा जा सकता है कि इस घोटाले के चलते ही बिहार पर लालू के एकछत्र राज का अंत हुआ था।  साल 1996 में सामने आया चारा घोटाला पिछले करीब 20 साल से जारी था। इसमें जानवरों के लिए चारा, दवाएं और पशुपालन से जुड़े उपकरणों को लेकर घोटाले को अंजाम दिया गया। इसमें नौकरशाहों, नेताओं और इस बिजनेस से जुड़े लोग भी शामिल थे।

सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से लालू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

साल 2013 में इस मामले से जुड़े 53 में से 44 मामलों में सुनवाई पूरी हुई। मामले से जुड़े 500 से ज्यादा लोगों को दोषी पाया गया और विभिन्न अदालतों ने उन्हें सजा सुनाई। इसी साल अक्टूबर में चारा घोटाले से ही जुड़े एक मामले में 37 करोड़ रुपये के गबन को लेकर लालू यादव को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। बाद में इसी साल दिसंबर में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
जांच के दौरान सीबीआई ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के इस घोटाले के संबंधों का खुलासा किया। इसके बाद 10 मई 1997 को सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से लालू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसी दिन इस मामले से जुड़े बिजनेसमैन हरीश खंडेलवाल एक रेल पटरी पर मृत पाए गए।

राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये हुए थे गिरफ्तार 

राज्यपाल की अनुमति मिलते ही 17 जून 1997 को सीबीआई ने बिहार सरकार के पांच बड़े अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। इनमें महेश प्रसाद, के. अरुमुगम, बेक जुलियस, फूलचंद सिंह और रामराज राम के नाम शामिल हैं। 23 जून 1997 को सीबीआई ने लालू यादव और 55 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा भी थे। जगन्नाथ मिश्रा को अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन लालू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। इसी दिन बिहार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और अगले दिन उन्हें जेल भेज दिया गया।

जब लालू को उनकी ही पार्टी में मुख्यमंत्री पद से हटाने को लेकर आवाजें उठने लगीं

चारा घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री लालू यादव के खिलाफ रोष बढ़ने लगा तो उनकी पार्टी जनता दल में भी उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने को लेकर आवाजें उठने लगीं। इस बीच लालू ने 5 जुलाई को जनता दल के लगभग सभी विधायकों को लेकर अपनी अलग पार्टी ‘राष्ट्रीय जनता दल’ बना ली।

पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवा दिया

अलग पार्टी बनाने के बावजूद भी लालू यादव की मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बच पायी। आखिरकार 25 जुलाई को इन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवा दिया। 28 जुलाई 1997 को राबड़ी देवी की सरकार ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सहयोग से विश्वासमत हासिल कर लिया।

आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार हुए थे 

135 दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद लालू यादव 12 दिसंबर 1997 को रिहा हुए। इसके बाद 28 अक्टूबर 1998 को उन्हें चारा घोटाले के ही एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पटना की बेऊर जेल में रखा गया। जमनत मिलने के बाद 5 अप्रैल 2000 को उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में एक बार फिर गिरफ्तार किया गया। इस बार उन्हें 11 दिन जेल में बिताने पड़े। इसके बाद 28 नवंबर 2000 को लालू यादव ने चारा घोटाला मामले में ही 1 दिन और जेल में गुजारा।

साल 2000 में पुलिस ने कई बार पूछताछ की

चारा घोटाले से जुड़े अलग-अलग मामलों में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा से साल 2000 में पुलिस ने कई बार पूछताछ की। साल 2007 में 58 पूर्व अधिकारियों और सप्लायरों को दोषी ठहराया गया और 5-6 साल की सजा सुनाई गई। मामला हाथ में लेने के 16 साल बाद एक मार्च 2012 को सीबीआई ने पटना कोर्ट में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्रा सहित 32 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

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