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Lalu Family Controversy : रूठे तेज प्रताप को अब मां राबड़ी देवी मनाएंगीं!

Lalu Family Controversy : रूठे तेज प्रताप को अब मां राबड़ी देवी मनाएंगीं!

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड – बिहार

बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में अनबन की खबरें जगजाहिर हैं. लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे तेज प्रताप यादवऔर तेजस्वी यादव में भी अनबन की खबरें आए दिन सुनने को मिलती हैं. बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव के दो बेटों के बीच पार्टी की कमान संभालने को लेकर इतनी दुश्मनी बढ़ती जा रही है कि उनकी पार्टी आरजेडी अगर सत्ता पाने की दहलीज़ तक पहुंच गई, तो तब क्या स्थिति होगी. शायद इसीलिए सियासी गलियारों में अब ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि लालू यादव क्या अपने दोनों बेटों के बीच सुलह कराके उन्हें संभाल पाएंगे? अब तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच उत्तराधिकार की जंग छिड़ चुकी है, तेजप्रताप यादव ने कुछ दिन पहले इशारों ही इशारों में भाई तेजस्वी पर निशाना साधते हुए यहां तक कह डाला कि कुछ लोग उनके पिता लालू प्रसाद को दिल्ली में बंधक बना कर रखे हुए हैं. तेज प्रताप के इस बंधक वाले बयान ने बिहार में सियासी बवाल खड़ा कर दिया.

राबड़ी देवी पहले भी कर चुकी हैं विवाद का खंडन

एक मां ही है, जो हर एक पुत्र के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उसकी जगह कोई नहीं ले सकता. एक मां ही वह होती है जो अपने बच्चे को हर सुख-सुविधा देने के लिए पूरी कोशिश कर सकती है और अपने बच्चे की हर इच्छा को आसानी से पहचान सकती है. एक पुत्र अपने को पिता के मुकाबले अपनी मां के करीब पाता है. सूत्रों की मानें तो परिवार में बगावत थामने के लिए अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को उनकी मां राबड़ी देवी मनाएंगीं, ताकि छोटे बेटे तेजस्वी को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचा सके. राबड़ी देवी ने पहले भी दोनों पुत्रों तेजस्वी और तेज प्रताप में किसी तरह के विवाद से इंकार करते हुए कह चुकी हैं कि दोनों भाइयों में बातचीत होती है. दोनों एक-दूसरे की बात मानते हैं. राबड़ी पहले ही दावा कर चुकी हैं कि ‘जल्द ही तेज प्रताप घर वापस आ जाएगा. तेज प्रताप को विरोधी लोग भड़का रहे हैं.’

तेजस्वी के सामने फीकी पड़ जाती है तेज की चमक
2015 के विधानसभा चुनाव में दोनों भाई चुनाव मैदान में उतरे और संयोग से दोनों ही पहली बार विधायक चुने गए, बिहार में महागठबंधन की नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनी जिसमें तेजस्वी उपमुख्यमंत्री बने और तेज प्रताप कैबिनेट मंत्री. दोनों भाइयों की उम्र में महज़ डेढ साल का फर्क है और उसी लिहाज से तेजप्रताप, तेजस्वी से बड़े हैं. बिहार में लालू परिवार की राजनीति को समझने वाले कहते हैं कि तेज प्रताप का झुकाव राजनीति से ज्यादा धर्म की तरफ है और अक्सर वे खुद को कृष्ण का अवतार होने का दावा सार्वजनिक रूप से करते दिखे हैं. जबकि इसके उलट तेजस्वी को न सिर्फ राजनीतिक मुद्दों की समझ है, बल्कि उनके पास अपने पिता की वैसी भाषा-शैली भी है, जो लोगी को प्रभावित करती है. इसीलिए बिहार में लोग तेजस्वी को लालू की तरह ही जमीन से जुड़ा नेता मानने लगे हैं. ऐसे में लालू और राबड़ी तेजस्वी में राजद का भविष्य देखे रहे हैं. अब देखना है कि अब बतौर मां अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को कौन सी घुट्टी पिलाती हैं जिससे तेजस्वी को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाया जा सके.

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