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Kalam-Dawat Puja: कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की पूजा आज

Chitragupta Puja

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

जन्म के बाद मृत्यु का विधान है, इससे कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता। मान्यता है कि प्राणी की जब जीवनलीला समाप्त हो जाती है और वह यमलोक पहुंचता है तब भगवान चित्रगुप्त उसके कर्मों का लेखा-जोखा सामने रखते हैं। फिर उसी के अनुसार उसे आगे स्वर्ग या नर्क भोगना पड़ता है। भगवान चित्रगुप्त किसी भी प्राणी के पृथ्वी पर जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक उसके कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की तब उन्होंने देव-असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री-पुरुष, पशु-पक्षी आदि को जन्म दिया। उसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ. जिन्हें धर्मराज कहा जाता है, क्योंकि वे धर्म के अनुसार ही प्राणियों को उनके कर्म का फल देते हैं.

भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति

भगवान चित्रगुप्त परमपिता ब्रह्मा के मानसपुत्र हैं। एक बार यमराज ने प्राणियों के कर्मों का हिसाब रखने जैसे बड़े कार्य के लिए एक सहयोगी की मांग की। तब ब्रह्मा जी ध्यानलीन हो गए। एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद जब ब्रह्माजी की समाधि टूटी तो उन्होंने देखा कि उनके समक्ष एक दिव्य पुरुष हाथों में कलम और दवात लिए खड़ा है। उन्होंने अपना परिचय देते हुए ब्रह्मा जी से कहा कि उसका जन्म उनकी काया से हुआ है, अतः उसका नामकरण कर कोई कार्य उसे दें। इस पर ब्रह्मा जी ने उनका नाम कायस्थ रखा। उन्होंने कहा कि धरती पर तुम्हें चित्रगुप्त के नाम से जाना जाएगा। वहीं, तुम्हारा कार्य यमराज के दरबार में मनुष्यों के कार्यों और उनके जीवन- मृत्यु का लेखा- जोखा रखना होगा।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। माना जाता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीय को ही भगवान चित्रगुप्त का जन्म हुआ था।  ऐसी मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त ने ही कायस्थ जाति को उत्पन्न किया था। ऐसे में कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं।

कायस्थ क्यों करते हैं चित्रगुप्त की पूजा

चित्रगुप्त की पूजा कायस्थ लोग ही करते हैं। इस दिन कायस्थ लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं और इस दिन कलम-दवात का इस्तेमाल नहीं करते हैं। पूजा के आखिर में वे आय- व्यय का हिसाब लिखकर भगवान को समर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भीष्म पितामह ने भी चित्रगुप्त की पूजा की थी। भगवान चित्रगुप्त खुश होकर पितामह को अमर होने का वरदान दिया थ।. कहा जाता है कि उनकी पूजा करने से गरीबी और अशिक्षा दूर होती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

6 नवंबर 2021, शनिवार को दोपहर 1.15 मिनट से शाम 3.30 मिनट तक पूजा का मुहूर्त है।

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