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देश के 50वें CJI बने जस्टिस DY Chandrachud, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

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सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने आज देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदभार ग्रहण किया। बुधवार सुबह राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) को प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ग्रहण कराई। उन्होंने सीजेआई यूयू ललित की जगह ली है, जो आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे पहले छह नवंबर को सीजेआई यूयू ललित को औपचारिक सेरेमोनियल बेंच गठित कर विदाई दी गई थी।

पिछले 10 सालों में सीजेआई नियुक्त होनेवाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति 

पिछले 10 सालों में जस्टिस चंद्रचूड़ सीजेआई के रूप में नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं और न्याय तक आम नागरिकों की पहुंच को बढ़ावा देने के कोशिशों में आगे रहे हैं।

पिता वाईवी चंद्रचूड़ थे 16 वें प्रधान न्यायाधीश

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ वाईवी चंद्रचूड़ देश के 16वें चीफ जस्टिस थे। वाईवी चंद्रचूड़ का कार्यकाल 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक करीब सात साल रहा। यह किसी सीजेआई का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद उनके बेटे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सीजेआई बने हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के भी इतिहास का पहला उदाहरण है कि पिता के बाद पुत्र  भी सीजेआई बनेंगे।

…जब विवाहेतर संबंधों पर पलट दिया पिता का ही फैसला

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ पिता के फैसले को SC में पलट भी चुके हैं। उनके पिता ने 33 साल पहले व्यभिचार कानून की वैधता को बरकरार रखा था। जबकि न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने इस फैसले को पलट दिया कि पहले के विचार को संवैधानिक स्थिति की ‘‘सही व्याख्या’’ नहीं माना जा सकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के चर्चित फैसलों में वर्ष 2018 में विवाहेतर संबंधों (व्याभिचार कानून) को खारिज करने वाला फैसला शामिल है। 1985 में तत्कालीन सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ की पीठ ने सौमित्र विष्णु मामले में आईपीसी की धारा 497 को कायम रखते हुए कहा था कि संबंध बनाने के लिए फुसलाने वाला पुरुष होता है न कि महिला। वहीं, डीवाई चंद्रचूड ने 2018 के फैसले में 497 को खारिज करते हुए कहा था ‘व्याभिचार कानून महिलाओं का पक्षधर लगता है, लेकिन असल में यह महिला विरोधी है। शादीशुदा संबंध में पति-पत्नी दोनों की एक बराबर जिम्मेदारी है, फिर अकेली पत्नी पति से ज्यादा क्यों सहे? व्याभिचार पर दंडात्मक प्रावधान संविधान के तहत समानता के अधिकार का परोक्ष रूप से उल्लंघन है क्योंकि यह विवाहित पुरुष और विवाहित महिलाओं से अलग-अलग व्यवहार करता है।’

कई बड़े मुद्दों के जजमेंट में शामिल रहे हैं जस्टिस चंद्रचूड़

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) की शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड लॉ स्कूल जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थानों में हुई है। जस्टिस चंद्रचूड़ कई संविधान पीठों और ऐतिहासिक फैसले देने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्सा रहे हैं, जिनमें अयोध्या भूमि विवाद, समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, आधार योजना की वैधता से जुड़े मामले, सबरीमला मुद्दा, सेना में महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने जैसे मामले शामिल हैं।

दो साल के लिए पद पर रहेंगे

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 तक दो साल के लिए इस पद पर रहेंगे। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की उम्र में अवकाशग्रहण करते हैं। वह न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित का स्थान लेंगे जिन्होंने 11 अक्टूबर को उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाए जाने की सिफारिश की थी।

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