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JMM की छोटी मगर मजबूत टीम BJP पर पड़ेगी भारी, पसीना छुड़ा देने का भरोसा

JMM Mahadhiveshan

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

राजधानी रांची में शन‍िवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा का 12वां अधिवेशन आयोजित किया गया। इस महाधिवेशन में पार्टी ने अपनी कार्यकारिणी की घोषणा की। गुरुजी शिबू सोरेन एक बार फिर पार्टी के अध्यक्ष चुने गये। वहीं हेमंत सोरेन फिर से कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये। इस महाधिवेशन में झामुमो ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जिसमें उसका प्रमुख फैसला रहा कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या कम करना। झामुमो ने कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या घटाते हुए कहा कि उसने सदस्यों की संख्या घटायी है, अपनी ताकत नहीं। इस फैसले से पार्टी के सांगठनिक ताकत पर असर नहीं पड़ने वाला है। झामुमो को अपनी ताकत पर पूरा भरोसा है और उसे विश्वास है कि वह भाजपा का अब और भी मजबूती से मुकाबला कर पायेगी। पार्टी को इतना भरोसा है कि उससे मुकाबला करने में भाजपा के पसीने निकल आयेंगे।

झामुमो ने कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के पदों की संख्या घटायी है। पहले जहां 15 उपाध्‍यक्ष हुआ करते थे, अब यह संख्‍या घटकर 11 की गयी है। महासचिव भी 12 की जगह 9 ही होंगे। इसी तरह केंद्रीय समिति सदस्यों की संख्या 451 से घटाकर 351 की गयी है। इसके अलावा झामुमो ने सभी जिलों में कार्यालय सचिवों का पद भी सृजित करेगा। इसी तरह से जिलों में तीन प्रखंडों पर एक उपाध्यक्ष बनाने का न‍िर्णय ल‍िया गया है।

केन्द्र नहीं की मूलवासियों की उपेक्षा, हम बदलेंगे तस्वीर – हेमंत सोरेन

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महाधिवेशन में झामुमो के मुखिया और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के लिए किये गये संघर्षों और राज्य गठन के उद्देश्य को विस्तार से बताया। इसके बाद उन्होंने बताया कि राज्य के गठन के बाद भी राज्य जो प्रगति होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। इसके लिए उन्होंने राज्य में बनी भाजपा और केन्द्र की भाजपा सरकारों को जिम्मेदार बताया, जिनकी उपेक्षा से राज्य और राज्य के मूलवासियों का भला नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उन्होंने तय कर लिया है कि राज्य और राज्य के मूलवासियों का विकास कैसे करना है। इसके लिए उन्होंने कई राजनीतिक प्रस्ताव पेश किये जो इस प्रकार हैं-

जल-जंगल-जमीन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ‘जल-जंगल-जमीन’ झारखंड की मूल भावना है। लेकिन इसको तहस-नहस करने का काम राज्य और केन्द्र की भाजपा सरकारों ने किया है। बड़े-बड़े जलाशयों के निर्माण और खनिजों के दोहन के कारण रैयत अपनी जमीन से बेदखल होते गये। उनके विस्थापन के लिए कोई काम नहीं किया गया। अपनी भूमि से बेदखल हो गये रैयतों को उनकी भूमि दिलाने का काम झामुमो की राज्य सरकार कर रही है। हेमंत सोरेन ने कहा कि अब उद्योगों को इस प्रकार पट्टा दिया जायेगा कि जमीन पर रैयतों का मालिकाना हक समाप्त नहीं होगा। आदिवासियों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, इससे इनका पलायन रोका जा सकेगा। ‘जल, जंगल और जमीन’ मूलवासियों और आदिवासियों की मूल पहचान है और इनकी इस पहचान को बरकरार रखा जायेगा।

विस्थापन, पुनर्वास और पलायन

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की समृद्धि ही राज्य के लिए अभिशाप है। राज्य खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है। आजादी के बाद से ही यहां खनिजों का खनन और उद्योगो की स्थापना शुरू है, लेकिन इसका लाभ यहां के मूलवासियों-आदिवासियों को नहीं मिला। परियोजनाओं की स्थापना से यहां की जनसांख्यिकी (Demography) पूरी तरह से गड़बड़ा गयी। रोजगार नहीं मिलने के कारण यहां के मूलवासियों-आदिवासियों का पलायन शुरू हुआ। राज्य में विस्थापितों का पुनर्वास एक गंभीर चुनौती है, लेकिन भूमिहीन हुए लोगों के पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था कर उनके सम्मानजनक जीवन यापन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी आवश्यकताओं की व्यवस्था का प्रयास कर रहे हैं।

रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सशक्तीकरण

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि दरअसल सरकारी नियुक्ति को ही रोजगार मान लिया गया है, लेकिन रोजगार की कई श्रेणियां हैं। असंगठित क्षेत्र, खेतिहर, चिकित्सकीय, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन सहित अन्य कई प्रकार की सेवाएं है, जिनमें रोजगार के अनेक अवसर हैं। राज्य में स्थापित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों में 75 प्रतिशत मूलवासी-आदिवासी को जोड़कर उन्हें सुदृढ़ किया जाएगा। राज्य की भौगोलिक बनावट के अनुसार ही आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षण तय किया गया है। आरक्षण में महिलाओं का भी ध्यान रखा गया है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

हेमंत सोरेन ने कहा कि चूंकि झारखंड वनों से आच्छादित है, फिर भी यहां 52 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है, जो कि 55 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से तीन प्रतिशत कम है। लेकिन सिर्फ 43 प्रतिशत भूमि पर खेती होना चिंता का विषय है। फसल का उत्पादन, विपणन और बाजारों की उपलब्धता का यहां अभाव है। जिसका राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। परन्तु इसके उपाय के तौर पर सिंचाई के अभाव में वैकल्पित ग्रामीण अर्थवस्था को बढ़ावा देने की बात सीएम ने कही। उन्होंने कहा कि पशुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, फल-फूल उत्पादन, हस्तकरघा आदि लघु उद्योगों पर ध्यान दिया जा रहा है।

उद्योग, खनन और व्यवसाय

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में खनिजों का भंडार होने के कारण यहां उद्योग की असीम सम्भावनाएं है, जंगलों-घाटियों से आच्छादित होने के कारण यहा पर्यटन की भी संभावनाएं खूब हैं। इन दोनों को मिला दिया जाये तो राज्य  को समृद्ध बनाया जा सकता है। राज्य के विकास के लिए खनिजों का उत्खनन और उद्योग स्थापना भी जरूरी है। लेकिन रैयतों के हितों का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है। खनिजों का उत्खनन इस प्रकार हो कि उत्खनन के बाद जमीन परती न पड़ जाये। भूमि आवंटन के बाद भी अगर कोई उद्योग स्थापित न हो पाये तो भूमि रैयतों की ही रहे। कुशल श्रमिकों के बल पर राज्य का चौरतफा विकास किया जा सकता है। खेलकूद में भी युवक युवतियों को बढ़चढ़कर भाग लेने और राज्य का नाम रौशन करने की सलाह मुख्यमंत्री ने दी।

यह भी पढ़ें: JPSC Centre of Corruption? झारखंड लोक सेवा आयोग या ‘अयोग्य, आखिर कब थमेगा विवादों का ये अंतहीन सिलसिला?

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