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Jharkhand: हेमंत पर फैसला चाहे जो हो, विकल्पों पर चल रही माथापच्ची

Jharkhand: Whatever may be the decision on Hemant, the tussle on the options is going on

Jharkhand Hemant Soren: झारखंड का गुरुवार का दिन उथल-पुथल में गुजर गया। शुक्रवार का दिन हेमंत सोरेन सरकार के लिए अहम हो गया है। वैसे अभी इस बात की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि चुनाव आयोग की अनुशंसा चिट्ठी मिलने के बाद राज्यपाल कब और क्या करने वाले हैं, लेकिन माना यही जा रहा है कि झारखंड की राजनीति में आज कुछ होने वाला तो जरूर है। अगर चुनाव आयोग की अनुशंसा पर राज्यपाल का फैसला हेमंत सोरेन के विरुद्ध जाता है तो आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में कुछ नया दिखेगा।

यह नया क्या होगा?

नया से तात्पर्य सरकार का चेहरा बदल जायेगा। झारखंड में सरकार को झामुमो की रहेगी, लेकिन मुख्यमंत्री बदल जायेगा। चूंकि झामुमो ने सम्भावित खतरे को पहले भांप लिया था, इसलिए उस पर मंथन भी करना शुरू कर दिया था। चूंकि झामुमो भी देश की अनेक पार्टियों की तरह परिवारवादी पार्टी है, इसलिए 99 प्रतिशत से अधिक की सम्भावना यही है कि मुख्यमंत्री का नया चेहरा ‘घर’ से ही निकलेगा। जिन नामों की अब तक चर्चा होती रही है उनमें हेमंत सोरेन की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी भी मुसीबतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि खनन लीज, शेल कंपनी और जमीन खरीद-फरोख्त जैसे मामलों में उनका भी नाम है। भाजपा उन्हें भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूकेगी। फिर भी, उन्हीं का नाम अभी ज्यादा चर्चा में ज्यादा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का नाम सबसे सुरक्षित माना जा सकता है। क्योंकि शिबू सोरेन के नाम पर पूरा झामुमो एक बना रह सकता है। वैसे सीता सोरेन भी सोरेन परिवार से हैं, लेकिन उनके नाम पर झामुमो में सहमति बनना सम्भव नहीं है। अगर उनके नाम पर सहमति बनती भी है तो सीता सोरेन के मजबूत होना हेमंत सोरेन के लिए भविष्य में खतरा बन सकता है।

कुछ और सम्भावनाएं
  • राज्यपाल के फैसले विरुद्ध हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट जाकर तुरंत सुनवाई की गुहार लगा सकते हैं।
  • अगर हेमंत सोरेन को चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं किया गया तो वह इस्तीफा देकर फिर से सरकार बनाने का दावा पेश करके दुबारा मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
  • हेमंत सोरेन के परिवार से इतर पार्टी के किसी वरिष्ठ विधायक को नया नेता चुन लिया जाए। लेकिन इसकी सम्भावना सबसे कम है।
‘खेला’ की कितनी सम्भावना?

हेमंत सोरेन की कुर्सी जाने के बाद एक राजनीतिक हलकों में एक सम्भावना ‘खेला’ होने की भी जतायी जा रही है। हेमंत सोरेन की कुर्सी जाने के बाद झारखंड विधानसभा सदस्यों की संख्या 76 रह जायेगी। क्योंकि कोलकाता में गिरफ्तार किये गये तीन कांग्रेस के तीन विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हो पायेंगे। फिर बसंत सोरेन की सदस्यता फिलहाल दांव पर है। ऐसे में झामुमो सरकार में शामिल विधायकों में टूट की सम्भावना तलाश कर भाजपा अपने लिए अवसर देख सकती है।

यह भी पढ़ें: झारखंड CM Hemant Soren का क्या होगा? राज्यपाल के ऐलान पर टिकीं सबकी नजरें

Jharkhand Hemant Soren

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