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Jharkhand: सोरेन परिवार पर हमेशा लगते रहे हैं भ्रष्टाचार के आरोप

Jharkhand: There have always been allegations of corruption against the Soren family

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

मंगलवार को हेमंत सोरेन पर खनन पट्टे के लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सुनवाई होगी। कोर्ट में हो सकता है कि हेमंत सोरेन बाद में केस से बरी हो जायें, लेकिन खुद पर लगातार लगने वाले आरोपों में से वह पूरी तरह कब बरी होंगे, कहा नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही क्यों, उनका परिवार ही लगातार भ्रष्टाचारों की आंच में तप रहा है। खुद हेमंत सोरेन खान लीज मामले में फंसे हुए हैं, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का सर जमीन घोटाले में फंसा हुआ है। जमीन घोटाले में ही हेमंत सोरेन की साली का भी नाम आया है। हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन भी खान घपले में फंसे हुए हैं। सोरेन परिवार पर भ्रष्टाचारों के आरोप आज की बात नहीं है, क्योंकि खुद झामुमो सुप्रीमो और सोरेन परिवार के मुखिया शिबू सोरेन भी इससे नहीं बच सके हैं। 1993 में नरसिम्हा राव की सरकार बचाने के एवज में घूस खाने का दाग उनपर लग चुका है।

विपक्ष कर रहा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोपों की बौछार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर अचानक आरोपों की बौछार हो गयी है। इसका कारण भाजपा भी है। हेमंत इन दिनों लगातार भाजपा के निशाने पर हैं। भाजपा उन पर एक के बाद एक भ्रष्टाचार के कई आरोप लगा चुकी है। भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पूर्व सीएम रघुवर दास और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तो भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस से हेमंत सोरेन की सरकार को बर्खास्त करने की मांग तक चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर अपने पद का दुरुपयोग कर खदान लीज अपने नाम कराने का आरोप लगाया है। सोरेन को सीएम के तौर पर अयोग्य घोषित करने की मांग भी भाजपा कर रही है। आरोप है कि उन्होंने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 का उल्लंघन किया है। इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भी एंट्री हो चुकी है। रघुवर दास ने हेमंत सोरेन पर जो आरोप लगाये हैं, उसे इस प्रकार समझा जा सकता है-

  • हेमंत सोरेन पर ‘पद का दुरुपयोग’ कर रांची जिले में अपने पक्ष में पत्थर की खदान के पट्टे के लिए मंजूरी हासिल करने का आरोप।
  • रघुवर दास का आरोप कि यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट की धाराओं का उल्लंघन है। इस मामले में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत भी आरोप लगने की बात कही।
  • रांची जिले के अनगड़ा ब्लॉक में 0.88 एकड़ में खनन पट्टे की मंजूरी का आवेदन केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पोर्टल पर दर्ज।
  • अनगड़ा ग्राम पंचायत की कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज के अनुसार हेमंत सोरेन का आवेदन 28 मई, 2021 को रांची के जिला खनन अधिकारी को मिला। 1 जून को डीएमओ ने अनगड़ा के सर्किल ऑफिसर को जांच के लिए कहा।
  • 7 जून को अनगड़ा ग्राम पंचायत में अनगड़ा ब्लॉक विकास अधिकारी ने डीएमओ को लिखित में जानकारी दी कि ग्रामसभा ने खनन के पट्टे के लिए सहमति दे दी है।
  • सोरेन और गांव के 9 लोगों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 16 जून, 2021 को रांची के डीएमओ ने बताया कि रांची उपायुक्त ने 15 जून 2021 के आदेश में एक लैटर ऑफ इंटेंट जारी किया है। जिसमें कुछ शर्तों के साथ खनन के पट्टे के लिए ‘इन प्रिंसिपल अप्रूवल’ दिया गया है।

इससे पहले झारखंड पीपुल्स पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा भी हेमंत सोरेन पर कुछ आरोप लगाये थे। मामला 2009 के विधानसभा चुनाव का है। हेमंत सोरेन के दाखिल किये गये नामांकन-पत्र पर बेसरा ने सवाल खड़े किये थे। उन्होंने कहा कि नामांकन में हेमंत ने केवल अपनी व अपनी पत्नी की संपत्ति का ही जिक्र किया है। जबकि हेमंत का परिवार संयुक्त परिवार है। इस नाते उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति का भी जिक्र करना चाहिए था। बेसरा ने एक और भी बड़ा आरोप लगाया था। उप मुख्यमंत्री बनते ही हेमंत सोरेन ने मैनहर्ट प्राइवेट लिमिटेड के लिए 21.40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर करीब 13 करोड़ का घोटाला किया है। उनका आरोप था कि रांची शहर के लिए सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना के निर्माण के लिए मैनहर्ट प्राइवेट लिमिटेड की नियुक्ति की गयी थी। परियोजना की प्राक्कलन राशि 9 करोड़ 25 लाख 80 हजार रुपये थी। योजना कई वर्ष से लंबित थी, लेकिन उप मुख्यमंत्री बनते ही हेमंत सोरेन ने इस योजना के तहत 21 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि सिंगापुर की कंपनी मैनहर्ट प्राइवेट लिमिटेड के लिए मंजूर कर दी।

पत्नी कल्पना सोरेन के हिस्से भी आया जमीन घोटाला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन पर भी आरोप है। आरोप है कि अरगोड़ा में खरीदी गयी जमीन में सीएनटी एक्ट के उल्लंघन कर खरीदी गयी है। पूर्व सीएम रघुवर दास का आरोप है कि 2009 में कल्पना सोरेन ने अरगोड़ा में 13 कट्ठा और 17 कट्ठा जमीन दो अलग-अलग डीड से खरीदी थी। इसमें कल्पना सोरेन ने अपना पता हरमू लिखा है, जबकि पति हेमंत सोरेन की जगह अपने पिता का नाम दिया है जो ओडिशा वासी हैं। इस लिहाज से जमीन खरीद में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन हुआ है। रघुवर दास के राज में जांच दल की रिपोर्ट में इसे गंभीर अनियमितता माना गया, लेकिन हेमंत सोरेन के राज में इस जमीन पर सोहराय भवन बन गया। 2019-2020 में अपर समाहर्ता ने नोटिस भी दी, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। आरोप यह भी है कि सोहराय नाम से बनी कंपनी में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और उनकी साली सरला मुर्मू पार्टनर हैं। झारखंड पीपुल्स पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा भी ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। इसके अलावा सोरेन परिवार ने विभिन्न जिलों में 100 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदने का भी आरोप भाजपा ने लगाया है।

बसंत सोरेन भी चलाते हैं पत्थर खदान!

रघुवर दास ने सीएम के भाई बसंत सोरेन पर भी खनन कंपनी ग्रैंड माइनिंग में पार्टनर होने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा था कि उस कंपनी पर सरकार का आठ करोड़ बकाया है। रघुवर ने दोनों भाइयों पर सरकार से दोहरा लाभ लेने का आरोप लगाते हुए इनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है। रघुवर ने कहा कि सीएम द्वारा यह कार्य गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी मंत्रियों के लिए आचार संहिता का उल्लंघन है।

शिबू सोरेन पर घूस देने का लगा है दाग

सोरेन परिवार के मुखिया भी भ्रष्टाचार के आरोपों से बच नहीं सके हैं। हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन का नाम सांसद रिश्वत कांड में उछला था। 1993 के सांसद रिश्वत कांड में खूब उछला था। शिबू सोरेन समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के 4 सांसदों पर आरोप लगा था कि उन्होंने तत्कालीन नरसिम्हाराव सरकार को बचाने के लिए बड़ी रकम घूस में ली थी। आरोप था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन और उनके तीन सांसदों- सूरज मंडल, शैलेंद्र महतो और साइमन मरांडी के घर सूटकेस भर-भर के नोटों की गड्डियां पहुंची थीं। दरअसल, 1993 में केंद्र में कांग्रेस की अल्पमत वाली नरसिम्हाराव की सरकार चल रही थी. 28 जुलाई 1993 को बीजेपी नरसिम्हार राव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। सरकार का गिरना करीब-करीब तय था, लेकिन आरोप लगा कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ और सरकार के पक्ष में वोट करने के लिए कुछ सांसदों को मोटी रकम घूस में दी गई।

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