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Jharkhand: सीएम हेमंत की लड़ाई अकेली झामुमो की लड़ाई! झामुमो के साथ यूपीए सड़कों पर क्यों नहीं आई?

Jharkhand: The fight of CM Hemant is the fight of JMM alone!

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड में गुरुवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अवैध खनन मामले में ईडी कार्यालय में सवालों का जवाब देने पहुंचे थे। दिन भर पक्ष-विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियां चलती रहीं। दिन भर झामुमो के कार्यकर्ता अपने नेता के समर्थन में ईडी कार्यालय के पास जमे रहे। इस पूरे प्रकरण में एक बात गले से नहीं उतरी वह है यूपीए की दूसरे पार्टियों का चरित्र। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यूपीए के नेता हैं। यूपीए का नेता ईडी के घेरे में है। सीएम जब ईडी कार्यालय में थे तब यूपीए के कुछ नेता उनके समर्थन में गला फाड़ते तो जरूर नजर आये। लेकिन सड़कों पर सिर्फ झामुमो के कार्यकर्ता अपने नेता के समर्थन में उतरे। उन्हें समर्थन दिया और उनके समर्थन में नारे भी लगाये। यूपीए के कार्यकर्ता सड़कों पर क्यों नहीं उतरे? क्या यह अकेली सीएम हेमंत की लड़ाई है? क्या यह अकेली झामुमो की लड़ाई है? यूपीए ने पूरी तरह अपना समर्थन क्यों नहीं दिया? नेताओं का तो अपना स्वार्थ है, उन्हें टीवी पर अपना चेहरा दिखाना, अपनी राजनीतिक करनी है। लेकिन कोई भी लड़ाई बिना समर्थकों के नहीं लड़ी जा सकती, यह बात सभी पार्टियां जानती हैं। सीएम हेमंत सही हैं या गलत यह प्रश्न बाद में आता है, लेकिन जब वह ‘मुसीबत’ में हैं तो उनका समर्थन किया जाना चाहिए।

हाल के दिनों में कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ईडी घेरे में फंसकर उसके दफ्तर का चक्कर लगा रहे थे तब उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देशभर में प्रदर्शन किया। यहां अगर उसे दूसरी पार्टियों का समर्थन नहीं मिला तो यह समझा जा सकता है, जबकि यह पार्टी की भी नहीं, अकेली पार्टी नेताओं की लड़ाई थी, फिर भी कांग्रेसी कार्यकर्ता-नेता सड़कों पर उतरे। लेकिन कल की स्थिति अलग थी। कल का संकट यूपीए विधायक दल के नेता का संकट था, तो समर्थन यूपीए की सभी पार्टियों को करना चाहिए था। यूपीए, खासकर कांग्रेस नेता, हेमंत सोरेन के समर्थन और भाजपा के विरोध में ‘कुछ’ कहते तो जरूर दिखे, लेकिन वे सम्बोधित किसे कर रहे थे, पार्टी का झंडा लिए झामुमो कार्यकर्ताओं को। क्या यूपीए ने यह मान लिया था कि ‘सीएम तो अब गया’! खैर, यह राजनीति है, राजनीति में सब कुछ सम्भव है।

यह भी पढ़ें: Jharkhand: 10 घंटे की ईडी पूछताछ के बाद अब क्या? सीएम का एक ही जवाब- भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को नहीं जानते!

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