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Jharkhand: सरयू राय ने सीएम को पत्र लिखकर फिर की स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत, गिनाया किनको दिलवायी कोविड प्रोत्साहन राशि

Jharkhand: Saryu Rai wrote a letter to the CM again complaining to the Health Minister

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने एक बार फिर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर हमला बोला है। सरयू राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत की है। सरयू राय ने अपने पत्र में लिखा-

स्वास्थ्य विभाग का मंत्री कोषांग, कोविड प्रोत्साहन राशि के भुगतान में हुई ग़लतियों पर पर्दा डालने के लिए संदिग्ध एवं षड्यंत्रकारी गतिविधियों में लग गया है। विश्वसनीय सूचनाओं के अनुसार जिन अनधिकृत कर्मियों के नाम माननीय मंत्री जी ने संचिका में कोविड प्रोत्साहन राशि के लिये अनुमोदित एवं स्वीकृत किया है, मंत्री कोषांग उनसे उनका बैंक खाता संख्या मांग रहा है ताकि पता कर सके कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वीकृत कोविड प्रोत्साहन राशि का भुगतान राजकीय कोषागार से उनमें से किन-किन कर्मियों के खाता में पहुंचा है।

माननीय मुख्यमंत्री जी, मैं आपके ध्यान में यह तथ्य लाना चाहता हूं कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने सहित जिन अनधिकृत कर्मियों को कोविड प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने के लिए आदेश दिया है और इसके लिए जैसी दूषित, आपराधिक एवं भ्रष्ट प्रक्रिया अपनाया है, उसका सबूत, वे चाहे जो कर लें, मिटा नहीं सकते। इसे झुठलाने का उनका कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं हो सकता।

महाशय, स्वास्थ्य विभाग के दिनांक 01.05.2021 के संकल्प के मुताबिक़ मुख्यालय कर्मियों के कोविड प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने के लिए दो सूचियां मंत्री, स्वास्थ्य की स्वीकृति एवं अनुमोदन के लिए विभाग द्वारा भेजी गईं। एक सूची मंत्री कोषांग ने मंत्री के आदेश से तैयार की थी और दूसरी सूची इस हेतु विभाग में गठित त्रि-सदस्यीय समिति ने तैयार की थी। मंत्री ने दोनों सूचियों को अनुमोदित किया और इनके भुगतान का स्वीकृत्यादेश संचिका पर दिया। तदनुसार विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा भुगतान की अधिसूचना निकाली गई।

मंत्री कोषांग के कर्मियों और विभागीय सूची के कर्मियों के कोविड प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने के लिए विभाग द्वारा अलग-अलग कार्यालय आदेश संख्या-1, स्था.मु.-1-12/2021-164(1), दिनांक 26.03.2022 निकाला गया। एक ही संख्या वाले दोनों ही कार्यालय आदेश स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव, श्री मनोज कुमार सिन्हा के हस्ताक्षर से निकाले गये।

मंत्री कोषांग के कर्मियों (मंत्री सहित) के भुगतान के लिए निर्गत कार्यालय आदेश के अंत में टिप्पणी अंकित है कि “प्रोत्साहन राशि का भुगतान संबंधित पदाधिकारी/कर्मी के वेतन/मानदेय मद में आवंटित राशि से भुगतेय होगा।’’ परंतु विभागीय सूची के अधिकारियों/कर्मियों के भुगतान के लिये निर्गत कार्यालय आदेश के अंत में टिप्पणी अंकित है कि “प्रोत्साहन राशि का भुगतान संबंधित पदाधिकारी के वेतन मद में आवंटित राशि से होगा।’’ इसमें मानदेय मद नहीं अंकित है, बल्कि इस अधिसूचना के साथ 14 प्रतिनियुक्त कर्मियों की एक सूची अलग से संलग्न है, जिसमें कहा गया है कि इस सूची के कर्मियों को इनके न्यूनतम वेतनमान के आधार पर भुगतान होगा।

विभागीय भुगतान सूची में 94 नाम हैं जिनमें से अधिकांश (जिनका विपत्र पहुंच गया) का भुगतान डोरंडा कोषागार से 31.03.2022 को हो गया। मंत्री कोषांग में यह जानने की कोशिश चल रही है कि स्वास्थ्य मंत्री सहित मंत्री कोषांग के कुल 60 कर्मियों में से किन-किन को भुगतान हुआ। यह जानने के लिये कर्मियों से उनका बैंक खाता विवरण माँगा जा रहा है।

इसके लिये यह जानना ज़रूरी है कि मंत्री कोषांग से जिन कर्मियों की सूची प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने के लिए विभाग में भेजी गई और विभाग द्वारा माननीय मंत्री जी के अनुमोदन के उपरांत जिसके लिए उपर्युक्त कार्यालय आदेश विभाग ने जारी किया उनमें से किस-किस श्रेणी के कर्मी शामिल हैं और उनका मूल विभाग क्या है और उनकी स्थापना किस विभाग से है?

वस्तुतः माननीय मंत्री जी के कोषांग द्वारा तैयार की गई सूची “भानुमति का कुनबा है”। यह सूची उस कहावत को चरितार्थ करती है कि “कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा”। कोविड प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिये माननीय स्वास्थ्य मंत्री की सहमति से तैयार किया गया मंत्री कोषांग का 60 सदस्यीय कुनबा निम्नवत है:-

  1. शीर्ष पर माननीय मंत्री जी स्वयं – 1
  2. उनके आप्त सचिव – 2
  3. उनके निजी सचिव – 2
  4. उनके चर्या लिपिक – 1
  5. टीवीएनएल – 1
  6. एनएचएम – 8
  7. सिविल सर्जन राँची – 2
  8. सर्व शिक्षा अभियान – 1
  9. रिम्स – 1
  10. बाह्यस्रोत – 6
  11. एसएसपी राँची – 7
  12. विशेष शाखा – 3
  13. एसपी चाईबासा – 1
  14. एसएसपी जमशेदपुर – 12
  15. ज़ैप 1- 10
  16. एसपी सिमडेगा – 1
  17. विधान सभा – 1
  18. कुल जोड़ – 60

उपर्युक्त 60 लोगों (स्वयं सहित) को अपने कोषांग का पदाधिकारी/कर्मी बताकर प्रोत्साहन राशि देने का आदेश मंत्री जी ने दिया, उनके आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्यालय आदेश जारी कर दिया। इस कार्यालय आदेश के आलोक में मंत्री जी ने भुगतान के लिये अपना बिल बनाया, भुगतान उनके किस बैंक खाता में भेजा जाएगा इसका ब्यौरा मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में भेजा। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने इसे भुगतान के लिये 31.03.2022 को रात 9.00 बजे डोरंडा कोषागार में भेज दिया। परंतु कोषागार का पीएमयु सर्वर धीमा हो गया और रिज़र्व बैंक द्वारा मार्च लूट रोकने की नीयत से रात 11.00 बजे के बाद भुगतान रोक दिया गया। इसलिये मंत्री जी का बिल लैप्स (कालबाह्य) हो गया। भुगतान मंत्री जी के बैंक खाता में नहीं पहुँच पाया। परंतु मंत्री जी का भ्रष्ट आचरण इससे साबित हो गया।

कालबाह्य विपत्रों के पुनः भुगतान की एक विधिसम्मत प्रक्रिया होती है। यदि मंत्री जी को लगता है कि प्रोत्साहन भुगतान लेने का उनका निर्णय सही है तो वे यह प्रक्रिया अपनाकर अपना कालबाह्य हुआ भुगतान अब भी ले सकते हैं। यदि नहीं लेंगे तो इसका मतलब है कि प्रोत्साहन भुगतान पाने के लिए उन्होंने ग़लत रास्ता अपनाया जो उनके भ्रष्ट आचरण का द्योतक है। यही स्थिति उनके कोषांग के 5 कर्मियों की भी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने मंत्री कोषांग के नाम पर जिस अनधिकृत कुनबा को प्रोत्साहन राशि देने का आदेश दिया है और उनके आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने जिसका कार्यालय आदेश जारी किया है, वह भी सरासर ग़लत और अनियमित है। कारण कि राज्य सरकार द्वारा मंत्री कोषांग की अधिकतम संख्या निर्धारित है। इस निर्धारित संख्या से अधिक कर्मी मंत्री कोषांग में नहीं रखे जा सकते हैं। अनुमान्य संख्या से अधिक संख्या में नियुक्त/प्रतिनियुक्त कर्मियों को वेतन एवं अन्य मद में किये जाने वाला भुगतान भी अनधिकृत है। प्रोत्साहन राशि भुगतान हेतु मंत्री जी द्वारा अनुमोदित कोषांग कर्मियों की सूची में अनधिकृत कर्मियों का नाम जोड़ना अपराध है। इन्हें प्रोत्साहन राशि का भुगतान करना आर्थिक अपराध है। यह भुगतान राजकोष पर अतिरिक्त बोझ है। स्वास्थ्य मंत्री इसके असली अपराधी हैं। अनधिकृत कर्मियों को अब तक किये गये भुगतान की कुल राशि की वसूली मंत्री, स्वास्थ्य से की जानी चाहिये।

उल्लेखनीय है कि सरकारी ख़ज़ाना से नियमित रूप से नियुक्त स्थायी/अस्थायी/ संविदा कर्मियों का भुगतान संबंधित कर्मी की स्थापना के माध्यम से होता है और संबंधित कोषागार से होता है. मंत्री जी के निर्देश पर ऐसे कर्मियों के भुगतान के लिये तैयार सूची में उन कर्मियों से संबंधित स्थापना का उल्लेख नहीं कर, सूची में इन अनधिकृत कर्मियों के नाम का उल्लेख अधिकृत कोषांग कर्मी के रूप में कर और इन्हें मंत्री कोषांग स्थापना से प्रोत्साहन राशि देने का आदेश देकर मंत्री, स्वास्थ्य ने धोखाधड़ी किया है। मंत्री जी ने अनधिकृत/छद्म कर्मियों के नाम पर राजकोष से प्रोत्साहन राशि निकालने का षड्यंत्र किया है। इसके लिये वे दंड के भागी हैं।

मंत्री कोषांग के अधिकृत/अनधिकृत कर्मियों से उनका बैंक खाता संख्या मांगकर मंत्री कोषांग एक कुतर्क के पक्ष में सामग्री जुटाने की साज़िश में जुटा है कि मंत्री सहित कोषांग के अमुक-अमुक कर्मियों के बैंक खाता में तो प्रोत्साहन राशि का भुगतान पहुंचा ही नहीं, तब इसका आदेश देने वाले मंत्री दोषी कैसे है? स्वयं मंत्री, स्वास्थ्य ने भी अपने बारे में यही कुतर्क देते हुए मुझ पर मुक़दमा दायर करने की धमकी दिया है। वे कुतर्क पेश कर रहे हैं कि उनका बिल लैप्स (कालबाह्य) हो गया, राशि मेरे द्वारा दिये गये मेरे बैंक खाता में पहुंची ही नहीं तो भला मैं कैसे दोषी हूं। मंत्री, स्वास्थ्य का यह कुतर्क वैसा ही है जैसा ‘कोई डाका डालने वाला कहे कि मैंने जिस घर में डाका डाला उस घर से कुछ मिला ही नहीं।’ ‘कोई बटमार कहे कि मैंने जो थैला छीना उसमें कुछ मिला ही नहीं’। यही तर्क वे आपके समक्ष भी प्रस्तुत करने वाले हैं।

वस्तुतः मंत्री कोषांग कर्मियों के नाम पर प्रोत्साहन राशि निकालने की मंत्री, स्वास्थ्य द्वारा अपनायी गई यह प्रक्रिया एक सुनियोजित साज़िश का अंग है, आर्थिक अपराध है, क़ानूनन दूषित है, अनियमित है। यह पद का दुरूपयोग है, धोखाधड़ी है, सरकारी तिजोरी से चोरी है।

अनुरोध है कि स्वास्थ्य विभाग की संबंधित संचिका की जाँच कर मंत्री कोषांग पर हुए अनधिकृत व्यय की वसूली मंत्री, स्वास्थ्य से करने का निर्देश देंगे, ऐसे आपराधिक कृत्य के लिये भारतीय दंड संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत इन्हें दंडित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करेंगे और इन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने की कृपा करेंगे ताकि जाँच एवं जांचोपरांत दंडात्मक कारवाई निष्पक्ष हो सके।

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