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Jharkhand Politics: कुछ ब्यूरोक्रेट्स इधर के, तो कुछ उधर के, बीच में पिस रहे ईमानदार ऑफिसर

Jharkhand Politics: झारखंड में भ्रष्टाचार किस हद तक अपनी पैठ बना चुका है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। लेकिन अगर सिस्टम में कुछ अधिकारी भ्रष्ट हैं, तो कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं, जो तमाम बाधाओं के बावजूद अपने आदर्शों पर टिके हुए, बड़ी ईमानदारी से अपना काम करते रहे हैं। वे न तो राजनेताओं या उनकी पैरवी करने वाले रसूखों की धमकियों से डरते हैं और ना ही बेवजह होने वाले तबादलों से। हाल के दिनों में राज्य में रोज हो रहे भ्रष्टाचार के खुलासे से झारखण्ड में यह मुद्दा प्रासंगिक बन गया है।

ऑफिसरों के नाम लेने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर साधा निशाना 

अवैध खनन मामले में ED ने रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शुक्रवार को 9 घंटे तक पूछताछ की, तो मुख्यमंत्री के ईडी दफ्तर से बाहर निकलते ही बीजेपी सांसद ने ट्वीट कर तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी (Hemant Soren) को कोई चीज याद ही नहीं है। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने ट्वीट किया है कि मूर्ख दोस्त बनाने से अच्छा है, होशियार दुश्मन बनाना, उन्होंने लिखा कि झारखण्ड के सीएम का जिन अधिकारियों ने सहयोग किया, उनको ईडी की पूछताछ में बीच रास्ते ही पटक दिया गया। उन्होंने कहा कि सीएम हेमंत ने साहिबगंज में पंकज मिश्रा की चोरी के लिए वहां के उपायुक्त को दोषी ठहरा दिया। खनन मामले में पूजा सिंघल को जिम्मेदार ठहरा दिया। प्रेम प्रकाश से जुड़े हथियार प्रकरण में डीजीपी नीरज सिन्हा को दोषी ठहराया। दरअसल जब ED ने मुख्यमंत्री प्रेम प्रकाश के हरमू स्थित आवास पर सीएम आवास के लिए आवंटित कांस्टेबल की ड्यूटी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये सवाल पुलिस मुख्यालय से पूछना चाहिए।


इधर बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने भी ट्वीट कर सीएम हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। बाबूलाल ने मीडिया में प्रसारित ख़बरों का हवाला देते हुए कहा कि मैंने सुना है कि अपने लूट का ठीकरा उन्होंने वैसे अधिकारियों पर फोड़ दिया जिन्होंने उनका सहयोग किया। मुख्यमंत्री खुद को बचने का प्रयास कर रहे हैं। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ED को उन ऑफिसरों को भी बैठाकर पूछताछ करना चाहिए ताकि सच उजागर हो।


”दो साल में यह घोटाला हो सकता है क्या”

उधर  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) शुक्रवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि जिस मामले में हमसे पूछताछ की जा रही है, उसमें उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के पहले की भी जांच हो। एजेंसी दूध का दूध और पानी का पानी सामने लाए तो कोई परहेज नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भाजपा अपने पापों का ठिकरा वर्तमान सरकार पर फोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनके षड्यंत्रों को हम नाकाम कर देंगे। वहीँ उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी से हमने पूछा कि दो साल में यह घोटाला हो सकता है क्या। उन्होंने कहा- हमने दो साल नहीं कहा। हमने उनसे कहा कि अगर आप ईमानदारी से काम करोगे तो सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। एकतरफा कार्यवाई करेंगे तो विरोध करने की ताकत रखते हैं। हमें जांच एजेंसी से परहेज नहीं है, लेकिन उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि भाजपा शासित राज्य को छोड़कर कार्रवाई क्यों की जाती है।

ट्वीट के पीछे की मंशा 

दरअसल बाबूलाल मरांडी और निशिकांत दुबे अपने ट्वीट के जरिए एक तरह की राजनीति कर रहे हैं। इनकी मंशा वैसे अधिकारियों को मैसेज देना है जो हेमंत सोरेन के करीबी हैं और उनके हमराज़ भी। भाजपा की रणनीति ये है कि वैसे अधिकारियों (jharkhand bureaucracy) में कन्फ्यूजन पैदा हो …. ब्यूरोक्रेसी में ऐसी चर्चा है कि कुछ अधिकारियों से ED पूछताछ कर सकती है। हर कोई ये जानना चाहता है कि मुख्यमंत्री ने किन -किन अधिकारियों का नाम लिया और उनके बारे में क्या बताया। अगर ये खबर सच है तो ब्यूरोक्रेसी का एक बड़ा तबका मुख्यमंत्री के खिलाफ हो सकता है , और यही बाबूलाल और निशिकांत चाहते हैं।

ये भी पढ़ें : मनी लॉन्ड्रिंग मामला:  बच्चू यादव की जमानत पर सुनवाई पूरी, ED कोर्ट का फैसला सुरक्षित

 

 

 

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