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Jharkhand Politics:’हेमंत नहीं तो कौन?’ बहुमत में UPA, फिर भी बीजेपी लगा रही जोर

झारखंड में 2019 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता गंवाने वाली भारतीय जनता पार्टी राज्य के सत्ता समीकरणों में उलटफेर करने की कोशिशों में जुटी रही है. बीजेपी पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि बीजेपी राज्य में पिछले ढाई सालों से चल रही झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन सरकार को अस्थिर करने की कोशिश में लगी है. कहा तो यह भी जा रहा है कि महाराष्ट्र के बाद भाजपा के “ऑपरेशन लोटस’ का अगला पड़ाव झारखंड ही है.

राज्यपाल रमेश बैस रांची पहुंचे

चुनाव आयोग (Election Commission) ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (Hemant soren)पर लाभ के पद के आरोपों पर अपनी सिफारिश राज्यपाल रमेश बैस (Ramesh Bais) को भेजी है. सूत्रों की मानें तो इसमें EC ने हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश की गई है. वहीँ झारखंड में सियासी हलचल के बीच राज्यपाल रमेश बैस रांची पहुंच चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल चुनाव आयोग के फैसले को पढ़कर सुना सकते हैं.

image source : social media
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सदस्यता रद्द होने की संभावना

रांची के अनगड़ा में पत्थर खदान लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 A के तहत सदस्यता रद्द होने की संभावना है.  अब ऐसे में सवाल ये उठने लगा है कि अगर हेमंत सोरेन की सदस्यता जाती है , तो क्या राज्य में हेमंत सोरेन की नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार भी चली जायेगी ?

हेमंत सोरेन के बाद कौन? 

बीजेपी की ओर से दावा किया जा रहा है कि राज्य में नया मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसे में चर्चा इस बात की है कि हेमंत सोरेन के बाद क्या विकल्प हैं, इसे लेकर पार्टी के अंदर और राजनीतिक गलियारों दोनों में चर्चाओं का दौर जारी है.

बीजेपी खेल सकती है दांव!

मुख्यमंत्री पद को लेकर कई विकल्पों पर चर्चा चल रही है. सीएम पद को लेकर जेएमएम के अन्दर जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमे हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और उनके पिता शिबू सोरेन और उनकी मां रूपी सोरेन के नाम शामिल हैं. वहीँ पिछले कुछ दिनों से झामुमो के ही कुछ विधायक सरकार से असंतुष्ट हैं. लोबिन हेंब्रम, सीएम हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन वर्तमान सरकार की कार्यशैली से नाराज चल रही हैं. साथ ही कल्पना सोरेन के नाम पर पार्टी में मतैक्य बनेगी, इसको लेकर संशय बरकरार है. वहीँ जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की गुटबाजी एक नया राजनीतिक समीकरण खड़ी कर सकती है. ऐसे में यदि सीएम के नाम पर असहमति बनी तो बीजेपी इसका फायदा उठा सत्ता का नया समीकरण बैठा सकती है.

image source : social media
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हेमंत सोरेन की सरकार को 51 विधायकों का समर्थन

राज्य में गठबंधन वाली सरकार के पास बहुमत के पर्याप्त आकड़ें हैं. फिलहाल हेमंत सोरेन की सरकार को 51 विधायकों का समर्थन हासिल है.अगर सारे विधायकों की एकजुटता बनी रहती है तो, विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, हेमंत सोरेन सरकार को कोई खतरा नहीं है. दरअसल साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में जेएमएम को 30, कांग्रेस को 16, आरजेडी को एक, भाकपा-माले और एनसीपी को एक-एक और निर्दलीय सरयू राय को मिलाकर उनके गठबंधन को 51 सीटें मिली थी. ऐसे में अगर बीजेपी यहां सरकार बनाने की कोशिश करती है तो जानकारों के अनुसार उसे कांग्रेस -जेएमएम के बागी रुख अख्तियार किए विधायकों को अपने पक्ष में करना होगा.

गठबंधन सरकार के पास 51 विधायक

2019 के चुनाव में बीजेपी 24 विधायकों पर सिमट गयी थी. कुछ ही दिनों बाद जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया, जबकि जेवीएम के दो अन्य विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल हो गए थे. बंधु तिर्की की विधानसभा की सदस्यता जाने के बाद राज्य में कांग्रेस विधायकों की संख्या 17 रह गई थी. यानी बहुमत के लिये जरूरी 41 के मुकाबले गठबंधन वाली सरकार के पास 51 विधायकों का आंकड़ा साफ – साफ दिखता है.

नये नेता का चुनाव अहम मुद्दा होगा

इसके उलट बीजेपी के पास बाबूलाल मरांडी को जोड़ते हुए 26 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी आजसू के पास 2 विधायक हैं. सदन में 2 निर्दलीय विधायक और 1 एनसीपी के विधायक भी हैं. इन सभी को मिला दें तो आंकड़ा 31 तक पहुंचता है, लेकिन हेमंत सोरेन की सदस्यता जाने के साथ सबसे पहले गठबंधन के अंदर नये नेता का चुनाव एक अहम मुद्दा होगा. उस नेता के नाम पर सबकी सहमति भी सबसे बड़ी चुनौती होगी.

राष्ट्रपति शासन के भी आसार 

राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर भी पहल जरूर होगी और अगर राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा नये नेता की अगुवाई वाली सरकार से पहले कर दी जाती है, तो गठबंधन वाली सरकार सत्ता से दूर हो जाएगी.

सत्ताधारी दल

जेएमएम- 30 सीट
कांग्रेस- 18 सीट
राजद- 01 सीट
माले- 01 सीट
एनसीपी- 01 सीट
विपक्ष

बीजेपी- 26 सीट
आजसू पार्टी- 02 सीट
निर्दलीय- 02 सीट

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