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Jharkhand Politics: 3 तो गए… बाकी और 7 कौन…? माथापच्ची में जुटी झारखंड कांग्रेस

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Jharkhand Politics: शनिवार की रात पश्चिम बंगाल की हावड़ा पुलिस के द्वारा झारखण्ड के तीन विधायकों (Jharkhand MLA)के कैश के साथ पकड़े जाने के बाद झारखंड की सियासत (Jharkhand Politics) गरमा गई है। बता दें कि जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी (Irfan ansari ) , सिमडेगा के कोलेबिरा से विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी (naman vixel kongari) और रांची जिला के खिजरी विधायक राजेश कच्छप (Rajesh Kacchap) को कैश के साथ पकड़ा गया है। हालांकि इन्हें पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया है। लेकिन कांग्रेस इसे राज्य में भाजपा के द्वारा सरकार को अस्थिर करने की साजिश बता रहा है।

भ्रष्टाचार हुआ बेनकाब या खुलेगी ऑपरेशन लोटस की कलई? 

एक ओर जहां कांग्रेस ने इसे बीजेपी के ऑपरेशन लोटस का हिस्सा करार दिया है, तो वहीँ दूसरी ओर बीजेपी इसे झारखंड सरकार की भ्रष्टाचार का पराकाष्ठा बता रही है। इस कैशकांड को लेकर झारखंड में बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच वार -पलटवार का दौर तेज हो गया है। दोनों पार्टी एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं।

अनूप सिंह ने प्राथमिकी  में क्या कहा?

कैश के साथ पकड़े गए गए इन तीनों विधायकों के मामले पर कांग्रेस से बेरमो विधायक अनूप सिंह ने झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के साथ रांची के अरगोडा थाना में शिकायत दर्ज करायी। शिकायत में उन्होंने इरफ़ान अंसारी और राजेश कच्छप पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनसे कोलकाता आने का आग्रह किया था, ताकि वे उन्हें वहां से गुवाहाटी ले जाकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता  बिश्व सरमा से मिलाया जाए और सरकार में मंत्रालय दिलाने की बात पक्की करायी जा सके। उन्होंने राजेश कच्छप और नमन विक्सल के द्वारा दिए गए ऑफर को लेकर भी मामला दर्ज किया जिसमें उन्हें प्रति एमएलए 10 करोड़ रूपये दिए जाने की बात कही गई थी।श्री सिंह ने कहा कि उन्हें यह ऑफर अनुचित और असंवैधानिक लगा जिसके कारण उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया।

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अनूप सिंह सवालों के घेरे में? 

इस मामले पर अनूप सिंह पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि आखिर उन्होंने जो बात प्राथमिकी में दर्ज करायी है, उसकी चर्चा पार्टी में क्यों नहीं की। राजनीतिक  गलियारों से ये सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं कि हमेशा अनूप सिंह ही क्यों ऐसे मामले में सामने आते हैं। अब जबकि तीनों विधायक कैश कांड में गिरफ्तार हो चुके हैं। उसके बाद सारी बातों को प्राथमिकी के माध्यम से सामने रखने का क्या तुक है?

क्या जेएमएम के भी विधायक हैं इस खेल में शामिल?

जानकारी के मुताबिक झारखण्ड में सरकार में टूट फूट की जो तथाकथित साजिश रची जा रही है, उसमें सिर्फ कांग्रेस के ही नहीं, jmm के भी विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। इसमें जेएमएम के सात विधायक और ऐसे हैं जिनकी इस शह -मात के खेल में सहभागिता की संभावना जताई जा रही है।

खरीद-फरोख्त मामले में पहले भी जेल भेजे गए थे तीन आरोपी

बता दें कि गत वर्ष जुलाई 22 को रांची के एक होटल से झारखंड पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की तैयारी थी और सरकार को गिराने की साजिशें रची जा रही थीं। गिरफ्तारी के तुरंत बाद JMM की तरफ से बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कहा गया था कि बीजेपी ही कर्नाटक की तर्ज पर यहां भी सरकार गिराने का प्रयास कर रही थी।

राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग से मिल चुके हैं संकेत 

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान झारखंड कांग्रेस के 18 में से 10 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आ चुकी है। इससे भी इस बात को बल मिलता है कि कहीं न कहीं झारखण्ड में सत्तापक्ष के विधायक विपक्ष के संपर्क में थे। इस चुनाव में झारखंड विधानसभा के निर्वाचित 81 में से 80 विधायकों ने मतदान में हिस्सा लिया था और जेएमएम के द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिये जाने के निर्णय के कारण यह तय माना जा रहा था कि राज्य में 80 में से 60 विधायकों का समर्थन एनडीए प्रत्याशी को मिलेगा। लेकिन मतगणना के बाद चुनाव परिणाम में यह बात सामने आयी कि द्रौपदी मुर्मू को 70 विधायकों ने वोट दिया, जबकि विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को महज 9 विधायकों का वोट मिला और एक वोट निरस्त किया गया।

द्रौपदी मुर्मू को 60 वोट मिलना था, 10 अधिक मिले

झारखंड में दलीय स्थिति के अनुसार बीजेपी के 25 विधायकों के अलावा जेएमएम के 30, आजसू पार्टी के 2, एनसीसी के 1 और 2 निर्दलीय वोटों के अनुसार द्रौपदी मुर्मू को पहले से ही 60 वोट मिलने की उम्मीद थी। जबकि कांग्रेस के 18, आरजेडी के 1 और भाकपा-माले के 1 विधायक ने यशवंत सिन्हा को वोट करने की बात कही थी। परंतु मतगणना के बाद यह साफ हो गया कि कांग्रेस के 10 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग किया था।

 अगर विधायकी चली गई तो फिर क्या? 

विधायक इरफान अंसारी (Irfan ansari ), सिमडेगा के कोलेबिरा से विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी (naman vixel kongari) और रांची जिला के खिजरी विधायक राजेश कच्छप (Rajesh Kacchap) के कैश के साथ पकड़ाए जाने पर पार्टी ने छह साल के लिए तो इन्हें निलंबित जरूर कर दिया है, लेकिन इन पर लगे आरोप साबित हो जाए और इनकी विधायकी चली जाए तो फिर सरकार गिरने की संभावना प्रबल हो सकती है, क्योंकि तीनों विधायक के पास से करीब 49 लाख 37 हजार 300 रुपये बरामद किये गये थे। पुलिस अधीक्षक स्वाति भंगालिया ने कहा है कि यह मामला सीआईडी के हवाले कर दिया गया है।

ये भी पढ़ें : बेहिसाब नकदी के साथ पकड़े गए झारखंड के 3 कांग्रेसी विधायक, तीनों पार्टी से निलंबित, अरगोड़ा थाना में FIR दर्ज

 

 

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