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 OBC Reservation के फेर में न फंस जाये झारखंड पंचायत चुनाव, सुप्रीम कोर्ट में कल है सुनवाई

Jharkhand Panchayat elections in favor of OBC reservation, hearing in Supreme Court

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जारी है, पहले चरण के बाद दूसरे चरण का नामांकन शुरू हो गया है। झारखंड सरकार ओबीसी आरक्षण के बगैर पंचायत चुनाव करा रही है, इस कारण इसका विरोध भी हो रहा है। ओबीसी आरक्षण के बगैर झारखंड में पंचायत चुनाव कराने के पीछे राज्य सरकार की चाहे मंशा जो भी हो, लेकिन इसका विरोध भी जारी है। विधानसभा सत्र में यह मामला उठाया भी गया है और अब तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। जिस पर कोर्ट गुरुवार को सुनवाई भी करने वाला है।

आजसू सांसद सीपी चौधरी ने दायर की है याचिका

सुप्रीम कोर्ट में आजसू के गिरिडीह सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। सांसद का कहना है कि राज्य के ओबीसी के साथ सरकार ज्यादती कर रही है। बगैर ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराना इसका परिचायक है। अब तो सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसला का ही हवाला देते हुए याचिका दायर की है जिसमें ट्रिपल टेस्टिंग के बाद ओबीसी आरक्षण देने की बात कही गयी है। ट्रिपल टेस्टिंग के लिए सरकार को कमीशन का गठन करना है, लेकिन सरकार चुनाव के बाद कमीशन का गठन कर ट्रिपल टेस्टिंग की बात कर रही है।

बगैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव कराने का राज्य सरकार का तर्क

झारखंड सरकार बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव कराने के पीछे सुप्रीम कोर्ट के ही ट्रिपल टेस्टिंग को आधार बता रही है। मंत्री आलमगीर आलम ने विधानसभा में कहा था कि चुनाव के बाद सरकार ट्रिपल टेस्ट कराएगी। क्योंकि ट्रिपल टेस्ट के तहत कमीशन गठन कर पिछड़ा वर्ग का इंपीरियल डाटा इकट्ठा करना था और इसके आधार पर पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने का प्रावधान लागू करना था। आजसू सांसद द्वारा जो याचिका दायर की गयी है उसमें भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ही हवाला दिया गया है। आदेश के आलोक में राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में आरक्षण देने हेतु ट्रिपल टेस्टिंग कराने के लिए कमेटी का गठन करना जरूरी है, जो कि राज्य सरकार ने नहीं किया। राहुल रमेश वाघ बनाम महाराष्ट्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट फार्मूला पूरे देश में लागू करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि ट्रिपल टेस्ट के बगैर पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को अनारक्षित मानना होगा।

9,077 ओबीसी उम्मीदवारों के साथ ‘अन्याय’?

बगैर ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने से ओबीसी के 9,077 पद समाप्त हो गये हैं। इनमें जिला परिषद के 92 ओबीसी पद, पंचायत समिति सदस्यों के 874 ओबीसी पद, मुखिया के 48 ओबीसी आरक्षित पद और ग्राम पंचायत सदस्य के 8063 आरक्षित पद समाप्त हो गये हैं। यानी अगर बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने पर अनारक्षित सीटों की संख्या बढ़कर 34,802 हो गयी है, जबकि ओबीसी आरक्षण के साथ अनारक्षित सीटों की संख्या 25,725 थी। बता दें, झारखंड में पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 55 प्रतिशत है।

यह भी पढ़ें: Jharkhand की सियासी हवा गर्म, बंधु की विधायकी गयी, समरी लाल अधर में, सीएम हेमंत के साथ सरकार की अटकी है सांस

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