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हेमंत सोरेन सरकार ने विधानसभा में हासिल किया विश्वास मत, भाजपा, केन्द्र और राज्यपाल पर जमकर बरसे सीएम

Jharkhand: Hemant Soren government wins trust vote in assembly

Hemant Soren Vidhansabha: हेमंत सोरेन सरकार ने एक दिन के लिए बुलाये गये विशेष सत्र में विश्वास मत हासिल कर लिया है। विश्वास मत में विधायकों की गिनती में यूपीए के समर्थन में 48 विधायकों ने मत दिया जबकि भाजपा, आजसू समेत निर्दलीय सरयू राय ने मत विभाजन का बहिष्कार किया। यानी विपक्ष का मत शून्य रहा। असल कहानी यह नहीं है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में विशेष सत्र बुलाया, विश्वास मत पेश किया और विश्वास मत हासिल कर लिया। असल कहानी यह है कि विश्वास मत की चर्चा के बाद जवाब में सीएम न सिर्फ भाजपा और केन्द्र सरकार पर जमकर बरसे, बल्कि राज्यपाल रमेश बैस पर भी निशाना साधने से नहीं चूके।

भले ही हेमंत सोरेन खनन लीज और शेल कम्पनियों के मामलों में घिरे हुए हैं लेकिन वह सदन में भाजपा और केन्द्र सरकार पर हमला बोलने से नहीं चूके। उन्होंने भाजपा और केन्द्र सरकार पर बहुमत से चल रही सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र सरकार देश के दूसरे राज्यों में जो कर रही है, वही काम वह यहां भी करना चाहती है। लेकिन झारखंड की यूपीए सरकार मजबूत और एकजुट है, और इसी एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए ही हमने विश्वास मत पेश किया है।

हेमंत सोरेन ने देश केन्द्र सरकार पर भी कई हमले किये। उन्होंने केन्द्र की कई योजनाओं को गिनाया जिसके बारे में केन्द्र सरकार ने दावा किया कि ये योजनाएं गरीबों के लिए हैं, लेकिन गरीबों को उनका लाभ मिलते आज तक नहीं देखा। इन योजनाओं में उन्होंने केन्द्र सरकार की गरीबों को हवाई सफर करवाने वाली योजना का जिक्र किया, उन्होंने पूछा उसका क्या हुआ। देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में केन्द्र सरकार के तिरंगा अभियान पर भी उसे जमकर कोसा। उन्होंने यहां तक कह डाला कि देश के बेचने वालों ने तिरंगे को भी बेचने का काम किया है।

उन्होंने कोरोना काल में अपनी सरकार का होना राज्य के लोगों का सौभाग्य माना। उन्होंने कहा कि अगर ‘उनकी’ सरकार होती तो तब न जाने इस राज्य का क्या होता। यह तो हमारी सरकार थी इसलिए हमने कोरोना काल में राज्य को अच्छे से सम्भाला और लोगों को कोई परेशानी नहीं होने दी।

हेमंत सोरेन ने संवैधानिक पद पर आसीन झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि मेरी विधायकी को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, चुनाव आयोग कि चिट्ठी राज्यपाल के पास है, लेकिन वह चिट्ठी को लेकर बैठ गये हैं, यही नहीं बार-बार जाकर दिल्ली बैठ जा रहे हैं। हमारे विधायक-सांसद प्रतिनिधियों ने जाकर उनसे मुलाकात की, उन्होंने स्वीकार भी किया कि ‘चिट्ठी’ आयी है, एक-दो दिनों में फैसला हो जायेगा, तो वह उसे लेकर बैठे हुए क्यों हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समरी लाल की विधायकी का भी जिक्र किया कि वह बाहर से आकर झारखंड का विधायक बना बैठा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जब तक विश्वास प्रस्ताव की चर्चा का जवाब दे रहे थे, उस समय विपक्ष के विधायकों का सदन में हंगामा चलता रहा। मुख्यमंत्री ने जैसे ही अपनी बात खत्म की और विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो ने विश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन की घोषणा की, विपक्ष के सभी विधायक और निर्दलीय सरयू राय सदन से बाहर चले गये। मत विभाजन में राज्य सरकार के विश्वास मत की घोषणा के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अनिश्चितकाल के सदन को स्थगित कर दिया।

यहां देखें सदन की पूरी कार्रवाई

यह भी पढ़ें: Jharkhand: सीएम हेमंत सोरेन ने विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच पेश किया विश्वास मत

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