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Jharkhand HC की टिप्पणी: झारखंड पुलिस नहीं जानती गिरफ्तारी कानून, सरकार को निर्देश – कराएं कैप्सूल कोर्स

Jharkhand HC

न्यूज़ डेस्क / समाचार प्लस झारखंड -बिहार
Jharkhand HC की टिप्पणी: पुलिस की ओर से अधूरी जानकारी देने के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में सोमवार को सुनवाई हुई. झारखंड हाईकोर्ट ने नीलम चौबे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी मौखिक टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि झारखंड पुलिस गिरफ्तारी से जुड़े कानून को पूरी तरह से नहीं जानती है. इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को सभी पुलिस पदाधिकारियों के लिए कैप्सूल कोर्स कराने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें अभियुक्तों की गिरफ्तारी से जुड़े सभी पहलुओं की पूरी जानकारी दी जा सके.

धीरज कुमार, अधिवक्ता

गिरफ्तारी की पूरी जानकारी गिरफ्तार किए गए अभियुक्त के परिजनों को नहीं दी

दरअसल पिछले दिनों मध्य प्रदेश पुलिस के द्वारा बोकारो से एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की गई थी. लेकिन उस गिरफ्तारी की पूरी जानकारी गिरफ्तार किए गए अभियुक्त के परिजनों को नहीं दी गई थी. जिसके बाद नीलम चौबे के द्वारा अधिवक्ता हेमंत सिकरवार के माध्यम से झारखंड हाईकोर्ट में हेवियस कॉपस दायर की गई थी. जिस पर जस्टिस एस चंद्रशेखर एवं जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की बेंच में सुनवाई हुई. अधिवक्ता हेमंत शिकरवार के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा दायर किए गए शपथ पत्र को देखकर ऐसा लगता है कि आपने जानबूझकर दूसरे राज्य की पुलिस को अभियुक्त को ले जाने दिया है, जो कि गलत है. इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है.
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