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Jharkhand: ED की सीएम हेमंत से आज पूछताछ, क्या झारखंड में बदलने जा रहा सरकार का चेहरा?

Jharkhand: ED's questioning of CM Hemant, will the face of the government change in Jharkhand?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पूरे देश की निगाहें इस समय झारखंड की सियासी हलचल पर लगी हुई हैं। अब से कुछ समय के बाद मुख्यमंत्री अवैध खनन मामले में ईडी के सवालों का जवाब देने ईडी कार्यालय पहुंचने वाले हैं। दिल्ली से ज्वॉइंट डायरेक्टर समेत ईडी के 3 अफसर रांची पहुंचे हैं जो सीएम हेमंत से सवाल-जवाब करेंगे।  ईडी के बहाने केन्द्र सरकार पर लगातार हमला करने वाले सीएम हेमंत से उम्मीद की जा रही थी कि वह दूसरे राज नेताओं की तरह जांच एजेंसियों के कार्यालय जाने के वक्त कार्यकर्ताओं के बल पर शक्ति प्रदर्शन भी करेंगे। लेकिन जो खबर आयी है उसके अनुसार सीएम हेमंत ऐसा कुछ नहीं करेंगे और बिना किसी तामझाम के ईडी कार्यालय जायेंगे और ईडी के सवालों का जवाब देंगे। हो सकता है ‘कुछ’ महसूस करते हुए झामुमो सरकार ने यह रणनीति बनायी हो।

झारखंड में कुछ हो सकता है ‘नया’

आज ईडी कार्यालय में क्या होगा और आगे क्या होगा, यह तो अभी भविष्य के गर्त में है, लेकिन झारखंड की सियासत को हवा जरूर मिल गयी है। बुधवार का दिन झारखंड की राजनीति में गहमागहमी भरा रहा। महागठबंधन की सभी पार्टियों ने दिनभर मंथन किया। अलग-अलग बैठकें कीं, फिर मिलकर बैठक की, लेकिन इन बैठकों के बाद मीडिया के सामने सिर्फ इतना कहा कि यूपीए सरकार को खतरा नहीं है, सरकार कार्यकाल पूरा करेगी। या फिर यह कहा कि सीएम हेमंत ईडी से पूछताछ में सहयोग करेंगे। इसके अलावा उन्होंने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया जिससे कुछ और बात निकल कर सामने आये। लेकिन सभी पार्टियों ने यहां तक कि भाजपा ने जिस गहनता से कल विचार-विमर्श किया, वह झारखंड में ‘कुछ और’ होने के संकेत जरूर दे रहे हैं। इन ‘कुछ’ में सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री का चेहरा बदलना भी शामिल हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर कौन सीएम की कुर्सी पर बैठ सकता है?

झारखंड की राजनीतिक हवा का रुख तो यही कह रहा है कि हेमंत सोरेन तय कर चुके हैं कि अगर उनकी गिरफ्तारी होती है तो किसे अपना उत्तराधिकारी बनाना है। पत्नी कल्पना सोरेन या कोई और। हेमंत सोरेन की दृष्टिकोण से तो कल्पना सोरेन ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं। हालांकि इस पर यूपीए के अधिकांश विधायकों का समर्थन तो मिल जाएगा, लेकिन पारिवारिक फूट का यहां अंदेशा रहेगा। इस दुविधा का उपाय दो अन्य नामों में ढूंढने का प्रयास झामुमो कर सकता है। वे दो नाम हैं- जोबा मांझी और चम्पई सोरेन। दोनों हालांकि हेमंत सोरेन के विश्वसनीय है, लेकिन पार्टी में मतभिन्नता का अंदेशा यहां भी है। तो क्या एक बार फिर झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरन सत्ता की बागडोर सम्भालेंगे? खैर, जो भी हो, झामुमो की सरकार पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है।

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