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Jharkhand: अभी तो ठंड बढ़ी है, और गिरेगा पारा, कोहरा के साथ बारिश का भी खतरा, कल साल का सबसे छोटा दिन

Jharkhand Cold Weather

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड में कड़ाके की ठंड शुरू हो गयी है। पूस का महीना है तो रातें और भी ज्यादा ठंड होने लगी हैं। लेकिन यह अभी शुरुआत है। झारखंड में पारा अभी और गिरेगा। झारखंड में पड़ रही ठंड पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी का असर है। उत्तरी राज्यों से आ रही हवाएं कनकनी बढ़ा रही हैं। रविवार को राजधानी रांची का न्यूनतम तापमान 6.4 दर्ज किया गया है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में राजधानी रांची का तापमान 4 डिग्री तक जा सकता है। वैसे भी मंगलवार यानी 21 दिसम्बर को साल का सबसे छोटा दिन होगा। इस समय वैसे भी ठंड का प्रकोप रहता ही है।

राजधानी रांची में रविवार को जहां 6.4 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया, वहीं राज्य में सबसे कम तापमान देवघर में दर्ज किया गया। रविवार को देवघर में पारा 4.9 डिग्री सेल्सियस पर था। इस दिन बोकारो में तापमान 5.5 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं गिरिडीह को भी 6.0 डिग्री तापमान ठंड का अहसास करा रहा है। झारखंड में सबसे ज्यादा न्यूनतम तापमान 8.6 चाईबासा का रहा।

मौसम विभाग के अनुसार अभी ठंड से थोड़ी राहत है। ठंड में अभी और वृद्धि होगी। यही नहीं राज्य के कुछ हिस्सों में तो पारा 1-2 डिग्री सेल्सियस को भी छुएगा। ठंड बढ़ते ही झारखंड के कई इलाकों में कोहरा और धुंध लोगों की परेशानी बढ़ गयी है। इसका असर यातायात पर पड़ने की संभावना है। इतना ही नहीं 25 दिसम्बर के आसपास झारखंड के कुछ जिलों में हल्की बारिश होने भी हो सकती है।

Winter Solstice: 21 दिसम्बर को है साल का सबसे छोटा दिन

इस साल 21 दिसम्बर को साल का सबसे छोटा दिन है। इसे विंटर सोल्सटिस कहा जाता है। 21-22 दिसम्बर को सूर्य की किरण मकर रेखा पर लम्बवत पड़ती है, इस सयम दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है और वहां दिन बड़े और रात छोटी होती है, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध में इसी समय सूर्य की किरण तिरछी पड़ती है, जिस वजह से यहां दिन छोटा और रात बड़ी होती है। चूंकि इस समय उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है, इसलिए इसे शीतकालीन संक्रांति या विंटर सोल्सटिस करते है।

विंटर सोल्सटिस का सांस्कृतिक महत्व

विंटर सोल्सटिस के तुरंत बाद ईसाइयों का सबसे बड़ा त्यौहार क्रिसमस आता है। इस समय दक्षिणी गोलार्द्ध में समर सोल्सटिस रहता है। इसको ऑस्ट्रेलिया के लोग डेरेवेंट नदी में डुबकी लगा कर मनाते है।

सोल्सटिस की तारीखें होती हैं भिन्न

सोल्सटिस की तिथियों में 1 या 2 दिनों का अंतर आता रहता है। इसका मुख्य कारण कैलेंडर प्रणाली है। वर्तमान में पूरी दुनिया में ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता है, जो कि एक सामान्य साल में 365 दिन और लीप वर्ष में 366 दिन का होता है। एक उष्णकटिबंधीय वर्ष वह समय होता है जितना समय पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगाती है, और पृथ्वी को एक चक्कर लगाने में 365.242199 दिन का समय लगता है, लेकिन दूसरे ग्रहों के प्रभाव के कारण यह समय वर्ष दर वर्ष थोड़ा-भिन्न होता है जिस वजह से तिथियां भी बदलती रहती हैं।

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