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Jharkhand: खतियान के आधार पर नियोजन नीति बनाने में सीएम हेमंत सोरेन फेल!

न्यूज डेस्क/ समाचार-पत्र – झारखंड-बिहार

झारखंड के हेमंत सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा करने वाली है। यानी इतना कार्यकाल और बीतेगा तब वह जनता के सामने अपनी उपलब्धियों (अनुपलब्धियों) का बही-खाता लेकर खड़े होंगे। उन्हें सबसे ज्यादा डर अपनी नियोजन नीति में फेल हो जाने का लग रहा है। 2019 के विधानसभा चुनावों में जब वह सरकार बदलने के जिन ‘संकल्पों’ के साथ वह जनता के सामने खड़े थे, आज भी वह वहीं खड़े हैं, एक इंच भी आगे नहीं बढ़े हैं। हेमंत सरकार का सबसे बड़ा फेलियर है कि वह राज्य को कोई नियोजन नीति नहीं दे पाये। 2019 में तो उन्होंने अपने घोषणा-पत्र में तो दावा कर दिया कि ‘2 साल में 5 लाख नौकरियां’। इस वाक्य पर एक बार फिर से ध्यान दीजिए- ‘2 साल में 5 लाख नौकरियां’। लेकिन 2 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद विधानसभा में अब कह रहे हैं- ‘5 लाख नौकरियां नहीं, 5 लाख रोजगार देने का वादा किया था’। मुख्यमंत्री साहेब भले यह भूल गये हैं, जनता अपने काम की बातें नहीं भूलती। कहीं न कही, किसी कबाड़ में 2019 विधानसभा चुनाव का घोषणा-पत्र जरूर पड़ा मिल जायेगा उसमें स्पष्ट लिखा है- ‘सरकार बनने के दो साल के अंदर 5 लाख झारखंडी युवकों को नौकरी दी जाएगी। बेरोजगार युवकों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।’

तर्कहीन है 1932 खतियान का आधार

आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यह मान चुके हैं कि झारखंड में खतियान के आधार पर नियोजन नीति नहीं बनायी जा सकती है। अगर बनी भी तो ऐसा करने पर कोर्ट तुरंत खारिज कर देगा। हेमंत सोरेन यह बात अच्छी तरह जानते हैं जो कार्य संविधान सम्मत नहीं होगा, उसे सुप्रीम कोर्ट तो खारिज करेगा ही। झारखंड ही एक मात्र आदिवासी राज्य नहीं है। पूरे देश के किसी भी राज्य में 1932 जैसे खतियान जैसा कोई कानून नहीं है। वह भी तब जब झारखंड में 1963-64 और 1973 में भी सर्वे हो चुके हैं। मुख्यमंत्री भले कह रहे हैं कि वह जानते हैं कि स्थानीय नीति कैसे बनानी है और जल्द ही स्थानीय नीति की घोषणा कर दी जाएगी। लेकिन हकीकत के धरातल पर ऐसा करना सम्भव नहीं है, यह बात सीएम अच्छी तरह जानते हैं। हेमंत सोरेन यह बात बुधवार को विधानसभा में अनुदान मांग पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब देते हुए कह रहे थे।

1985 को आधार वर्ष मान कर तैयार नीति का विरोध भी तर्क संगत नहीं

विधानसभा में अपनी बातें कहते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने वर्ष 1985 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गयी स्थानीय नीति पर भी उंगली उठायी। सीएम को लगता है कि यह स्थानीय नीति भाजपा की अथवा आदिवासी विरोधी नीति है। लेकिन यह 1985 वाली स्थानीय नीति यूं ही नहीं तैयार कर दी गयी। रघुवर दास ने दूसरे राज्यों का सर्वे कराकर और गहन अध्ययन के बाद संविधान सम्मत स्थानीय नीति झारखंड के लिए तैयार की थी। झारखंड के साथ जो दो और राज्य छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड बने हैं, दोनों ही राज्यों में 1985 को ही आधार मान कर स्थानीय नीति तैयार की गयी है। झारखंड की एकलौता राज्य है जहां 1932 को आधार बनाकर स्थानीय नीति बनाने का अनर्थक प्रयास होता रहता है। दीगर बात यह है कि क्या अनन्त काल तक 1932 का राग अलापा जाता रहेगा? रघुवर दास की 1985 वाली स्थानीय नीति में ही हेमंत सरकार 1-2 क्लाउज जोड़ कर नयी स्थानीय नीति अगर बना दें तो कोई आश्यर्य नहीं होगा।

कोरोना की विपरीत परिस्थितियों में राज्य सरकार ने किया बेहतर काम

मुख्यमंत्री ने यह कहा कि कोरोना काल की विपरीत परिस्थितियों में राज्य सरकार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। कोरोना काल वाकई राज्य, देश और दुनिया के लिए एक विकट काल था। अगर इसमें कोई चूक भी हुई हो तो भी वह क्षम्य। क्योंकि तब पता ही नहीं था कि क्या करना सही है और क्या करना गलत। झारखंड देश के तमाम राज्यों में ऐसा राज्य रहा जहां कोरोना ने देर से दस्तक दी। देश के दूसरे राज्य कोरोना से जिस तरह परेशान रहे, वैसी परेशानी यहां नहीं झेलनी पड़ी। सीएम ने कहा पिछले दो साल कोविड का प्रकोप रहा है। बावजूद इसके सरकार ने बेहतर करने का प्रयास किया है।

यह भी पढ़ें: Jharkhand: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो की पुस्तक ‘विचारों के ग्यारह अध्याय’ का किया लोकार्पण

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