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Jharkhand: खनन पट्टा और शेल कंपनियां मामले में मुख्यमंत्री हेमंत आज करेंगे चुनाव आयोग का सामना

Jharkhand: Chief Minister Hemant will face the Election Commission today in the mining lease case

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

आम हो या खास, आम जनता हो या राज्य का मुख्यमंत्री, संविधान की नजरों सब बराबर हैं। इसका उदाहरण हैं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जो आज खनिज लीज और शेल कंपनियों के मामले में चुनाव आयोग का सामना करने वाले हैं। वैसे लगता है देश के मुख्यमंत्रियों के ग्रह-नक्षत्र ठीक नहीं चल रहे हैं। खुद को महाराष्ट्र का सब कुछ समझने वाले उद्धव ठाकरे आज संविधान की ठोकरों पर सड़क पर आ गये हैं।

खनिज लीज और शेल कंपनियों के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बहुत कोशिश की कि उन्हें प्रत्यक्ष पेशी से छूट मिल जाये, लेकिन जैसा उन्होंने चाहा वैसा नहीं हुआ। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कह दिया की सीएम को प्रत्यक्ष छूट से राहत नहीं मिल सकती। सीएम हेमंत खुद को इन मामलों से खुद को पाक-साफ बताते रहे हैं, लेकिन पता नहीं क्यों वह आयोग का सामना करने से बचने  का प्रयास करते रहे हैं। इस मामले में बार-बार की नोटिश के बाद जब हेमंत सोरेन आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुए तब 14 जून को चुनाव आयोग ने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए 28 जून की तारीख तय की थी। इसमें भी वह खुद उपस्थित न होकर अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत किया था। चुनाव आयोग ने सोरेन को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा था कि उनके पक्ष में खनन पट्टा जारी करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए, जो कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम से संबंधित प्रावधानों का “प्रथम दृष्टया उल्लंघन” करता है।

बता दें सीएम हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने रांची के अनगड़ा ब्लॉक खनन मंत्री और पर्यावरण मंत्री के रूप में खुद ही लीज पट्टे के लिए आवेदन किया और खुद को इसका आवंटन भी करा लिया। इसके अलावा उन पर आरोप है कि उन्होंने शेल कंपनियां बनाकर काला धन को सफेद करना का काम किया है। इन्हीं दोनों संबंधित मामले में चुनाव आयोग ने जवाब देने के लिए सीएम हेमंत को अपने ऑफिस बुलाया था।  चुनाव आयोग ने उनसे 10 मई तक जवाब देने को कहा था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने 9 मई को चुनाव आयोग से इस आधार पर चार सप्ताह का समय बढ़ाने की मांग की थी कि उनकी मां की तबीयत खराब है और उनका इलाज चल रहा है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने झारखंड उच्च न्यायालय को खनन पट्टों के अनुदान के संबंध में सोरेन और अन्य के खिलाफ जांच की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं की स्थिरता पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

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