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Banna Gupta ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए केन्द्र से मांगा सहयोग

Banna Gupta's request for cooperation from the Center

झारखंड: स्वास्थ्य मंत्री Banna Gupta ने झारखंड की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए केन्द्र से सहयोग मांगा है। Banna Gupta ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखा है। इस पत्र में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने वर्तमान में झारखंड की स्वास्थ्य स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं से केन्द्र को अवगत कराया। विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य की आशा दीदियां किस प्रकार कार्य कर रही हैं, इसका भी जिक्र बन्ना गुप्ता ने किया। Banna Gupta में साथ ही केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि वह केन्द्र प्रायोजित स्वास्थ्य योजनाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाये ताकि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर किया जा सके।

Covid-19 Vaccination की स्थिति

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि राज्य सरकार केन्द्र के मार्गदर्शन में झारखंड में Covid-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के प्रयास में लगातार जुटी हुई है और आगे भी केन्द्र के साथ मिलकर इस महामारी के खिलाफ अभियान में साथ चलने के लिए कटिबद्ध है।

सहियाओं (आशा दीदियों) का सराहनीय योगदान

बन्ना गुप्ता ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अंतिम पायदान ग्राम स्तर में भी हमारी सहिया दीदी (आशा कार्यकर्ता) मुस्तैदी से खड़ी हैं। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा संचालित सभी महत्वाकाक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में ये अहम भूमिका निभा रही हैं। Covid-19 काल में कम्युनिटी सर्विलांस, कोन्टेक्ट ट्रेसिंग से लेकर Covid-19 टीकाकरण के सामुदायिक उत्प्रेरण में इन सहियाओं का योगदान अति महत्वपूर्ण रहा है।

झारखंड के स्वास्थ्य सूचकांक में सुधार

बन्ना गुप्ता ने केन्द्रीय मंत्री को यह भी बताया कि राज्य के गठन के उपरांत से झारखंड के स्वास्थ्य सूचकांकों में काफी सुधार हुआ है। मातृ-मृत्यु-दर 400 से घटकर 2020 में 71 (SRS) हो गयी है। वहीं, शिशु-मृत्यु-दर 72 से घटकर 27 (SRS) हो गयी है। सहियाओं के उत्प्रेरण और सहयोग से बच्चों के टीकाकरण में 8.8% से 90% (HMIS), संस्थागत प्रसव 13.9% से 82% (HMIS) का लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिली है।

आशा दीदियों का मानदेय सम्मानपूर्ण करने का आग्रह

बन्ना गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि झारखंड अधिकांशतः जंगल, झाड़, पहाड़ी एवं ग्रामीण आबादी से आच्छादित है। मगर इन क्षेत्रों में भी सहिया दीदियों का योगदान अतुलनीय है। सहिया दीदियों (आशा) को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए कार्याधारित प्रोत्साहन राशि प्राप्त होती है, जो औसत 3000 रुपये से 3500 रुपये प्रतिमाह है, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह काफी कम है। अतः जनता एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करने वाली इन सहियाओं (आशा) को सम्मानपूर्ण प्रतिमाह 5000 रुपये बतौर मानदेय के रूप में देते हुए उन्हें उनकी अन्य निष्पादित गतिविधियों के लिए अनुमान्य प्रोत्साहन राशि से जोड़ कर भुगतान करने हेतु अनुशंसा करता हूं।

स्वास्थ्य सुविधाओं में केंद्रांश बढ़ाने का आग्रह

बन्ना गुप्ता ने अंत में केन्द्र से आग्रह किया कि केन्द्र के मार्गदर्शन में झारखंड राज्य के अंतिम पायदान पर रहने वाले व्यक्ति को उचित स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने हेतु प्रतिबद्ध है, इस हेतु केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्र सरकार की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश एवं राज्यांश 90:10 के अनुपात में करने पर विचार किया जाये।

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