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Jharkhand Assembly Winter Session: पक्ष – विपक्ष ने कस ली कमर, इस बार छाए रहेंगे ये अहम् मुद्दे जो उड़ा सकते हैं सरकार की नींद!

Jharkhand Assembly Winter Session

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड- बिहार
झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र (Jharkhand Assembly Winter Session) इस बार काफी अहम रहने वाला है.16 दिसंबर से शुरू हो 22 दिसंबर तक चलने वाला शीतकालीन सत्र (Winter Session) कई मायनों में अहम होगा. पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में सरकार जहां अपनी उपलब्धि गिनाने की कोशिश करेगी. वहीं विपक्ष सरकार को कई मुद्दे पर घेरने का प्रयास करेगी. सत्र के दौरान 17 दिसंबर को सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2021-2022 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा.

कई अहम घोषणाएं कर सकती है सरकार 

सियासी मायनों में इस सत्र को बेहद अहम माना जा रहा है. राज्य में हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार आगामी 29 दिसंबर को अपने 2 साल पूरे कर रही है. इसके ठीक पहले आयोजित हो रहे इस सत्र में सरकार अपनी दूसरी वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं कर सकती है.

सरकार को घेरेगा विपक्ष 
सत्र के दौरान सरकार की तरफ से मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिल सहित लगभग आधा दर्जन विधेयक सदन में लाए जा सकते हैं. दूसरी तरफ विपक्ष ने भी सरकार की घेरेबंदी के लिए मुद्दे जुटा लिए हैं. पंचायत चुनाव, जेपीएससी परीक्षा परिणाम की कथित गड़बड़ियों, नियुक्ति नियमावली से जुड़े भाषा विवाद, विधानसभा नमाज कक्ष विवाद सहित कई मुद्दे हैं, जिनपर विपक्षी दल सरकार पर तीखे वार के मौके हाथ से नहीं जाने देना चाहेंगे.

सरकार मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिल लाएगी

संभावना है कि इस सत्र के दौरान सरकार मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिल लाएगी. इसका ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है. इस बिल के ड्राफ्ट में मॉब लिंचिंग के दोषियों के लिए मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है. यदि विधानसभा से ये कानून पास हो जाता है तो पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड ऐसा दूसरा प्रदेश बन जाएगा, जहां मॉब लिंचिंग में मौत होने पर मृत्यु दंड  का प्रावधान होगा. ड्राफ्ट में इस बात का भी जिक्र है कि आइजी रैंक या इससे ऊपर का अधिकारी मॉब लिंचिंग रोकने के लिए राज्य का नोडल अफसर होगा. नोडल अफसर की प्रतिनियुक्ति डीजीपी करेंगे.

विधानसभा में नमाज कक्ष को लेकर हो सकता है हंगामा 

इस सत्र में एक बार फिर सदन में बीजेपी की तरफ से एक बार फिर से विधानसभा में नमाज कक्ष को लेकर हंगामा हो सकता है. दरअसल इस मामले का निदान निकालने के लिए स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गयी थी. कमेटी ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और छत्तीसगढ़ से पूछा है कि क्या आपके राज्य में नमाज कक्ष की व्यवस्था है या नहीं. पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तरफ से जवाब आ गया है. वहीं बिहार ने जवाब नहीं दिया है. पश्चिम बंगाल ने अपने यहां नमाज कक्ष की व्यवस्था की बात कबूली है, वहीं ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने कहा है कि उनके राज्य में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. बीजेपी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जवाब को आधार मानते हुए झारखंड से भी इस व्यवस्था को खत्म करने पर जोर देगी.

जेपीएससी का मुद्दा गरमाएगा

आए दिन जेपीएससी को लेकर मीडिया में नए-नए खुलासे हो रहे हैं. जिस तरह के प्रमाण मीडिया में आ रहे हैं, उससे सातवीं, आठवीं, नौवीं और दसवीं जेपीएससी में गड़बड़ी की आशंका काफी प्रबल होते जा रही है. जेपीएससी की तरफ से 49 ओएमआर शीट का गायब हो जाना, निरीक्षक का हस्ताक्षर ना होना और बुकलेट के सीरियल में गड़बड़ी की बात सामने आना. हंगामे का मुख्य कारण बनेगा. बीजेपी इन सभी जेपीएससी में हुई गड़बड़ियों की जांच और दोषी पर कार्रवाई करने की मांग करेगी. जिससे सदन बाधित रहेगा.

सर्वदलीय बैठक में प्रदीप यादव का शामिल होना बनेगा मुद्दा 

कांग्रेस ने भले ही प्रदीप यादव को विधायक दल का उपनेता बनाया हो, लेकिन विधानसभा में अभी भी वो जेवीएम के ही विधायक हैं. जैसे बाबूलाल मरांडी बीजेपी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष नहीं माने जाते हैं. बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की तीनों पर दल-बदल के तहत मामला विधानसभा में विचाराधीन है. बावजूद इसके प्रदीप यादव शीतकालीन सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की तरफ से बतौर उपनेता पहुंचे. जबकि बाबूलाल को बतौर नेता प्रतिपक्ष नहीं बुलावा गया था. इस मामले को भी बीजेपी सदन में मुद्दा बनाएगी. जिससे हंगामे के पूरे आसार हैं.

नौकरी और नियुक्ति नियमावली बनेगा मुद्दा

सरकार की तरफ से जिस तरीके से नियुक्ति नियमावली में परिवर्तन किया जा रहा है. उससे अब अनारक्षित कोटे के वैसे ही उम्मीदवार किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर पास किया है. यह मामला भी राज्य में काफी गरमाया हुआ है. साथ ही जिस तरीके से 2021 को सरकार की तरफ से नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया था. लेकिन कुछ नियुक्तियां देने में ही सरकार सफल हो पायी है. इस मुद्दे को भी बीजेपी सदन में जोरदार तरीके से उठाएगा.

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