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Jharkhand Assembly Foundation Day: …जब 19 वर्ष बाद किराए के भवन से मिली थी मुक्ति, जानें इतिहास

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Jharkhand Assembly Foundation Day: झारखंड विधानसभा का 22वां स्थापना दिवस (Jharkhand Assembly Foundation Day) आज यानी 22 नवंबर को है. झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के स्थापना दिवस के मौके पर राज्य के उत्कृष्ट विधायकों (MLA) को सम्मानित किया जाएगा.  समारोह के विधानसभा के हर श्रेणी के एक कर्मचारी को भी उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा प्रदेश भर में झारखंड विधानसभा के स्थापना दिवस को लेकर कई और कार्यक्रम भी आयोजित होंगे.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितम्बर 2019 को किया था उद्घाटन

20 नवम्बर 2000 को झारखण्ड (Jharkhand) विधानसभा अस्तित्व में आया. बिहार से अलग होने के बाद 15 नवंबर, 2000 को झारखण्ड राज्य का वर्तमान विधानसभा भवन रांची शहर स्थित रांची-गुमला पथ पर कुटे ग्राम में बनाया गया. झारखंड (Jharkhand) राज्य का गठन साल 2000 में हुआ था. इससे पहले राज्य के गठन से लेकर 11 सितंबर 2019 तक झारखंड विधानसभा किराए के भवन पर संचालित होती थी. बता दें कि झारखंड विधानसभा किराए पर एचईसी के लेनिन हॉल में संचालित थी. झारखण्ड के नए विधानसभा भवन का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितम्बर 2019 को उद्घाटन किया था.13 सितम्बर 2019 को चतुर्थ विधान सभा के विशेष सत्र के साथ झारखण्ड राज्य की विधानसभा में कार्यवाही की शुरुआत हुई थी.बता दें कि झारखंड विधानसभा के तीन मंजिला इमारत का निर्माण 465 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है और इसमें 162 विधायकों के बैठने की क्षमता है.

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22 नवम्बर 2020 को हुई थी पहली विधानसभा गठित 

झारखण्ड में 22 नवम्बर 2020 को पहली विधानसभा का गठन हुआ. दिसंबर 2019 में पांचवीं विधानसभा अस्तित्व में आई. अब तक 9 विधायक झारखंड विधानसभा स्पीकर बने हैं. झारखंड के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी को छोड़ अन्य किसी को अब तक दोबारा विधानसभा स्पीकर का दायित्व नहीं मिल पाया है.

22 साल के कार्यकाल में 9 विधानसभा अध्यक्ष बने 

22 साल के कार्यकाल में झारखण्ड ने  9 विधानसभा अध्यक्ष देखे हैं. बिहार से झारखंड अलग राज्य बनने के बाद सबसे पहले इंदर सिंह नामधारी झारखंड के पहले विधानसभा अध्यक्ष बने. ये यहां के एकमात्र ऐसे विधानसभा अध्यक्ष हैं जिन्हें तीन कार्यकाल सँभालने का मौका मिला. इनका कार्यकाल 22 नवंबर, 2000 से 29 मार्च, 2004 तक रहा. इसके बाद 4 जून, 2004 से 11 अगस्त, 2004 रहा. वहीं, तीसरा कार्यकाल 15 मार्च, 2005 से 14 सितंबर, 2006 तक रहा. वर्ष 2008 में इंदर सिंह नामधारी को उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से सम्मानित किया गया.

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बागुन सुम्ब्रई पहले कार्यकारी अध्यक्ष बने 

झारखंड के पहले स्पीकर के तौर पर इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल के दौरान 29 मार्च, 2004 से 29 मई, 2004 के बीच बागुन सुम्ब्रई ने झारखंड विधानसभा के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर सदन की जिम्मेवारी निभायी.

मृगेंद्र प्रताप सिंह बने स्पीकर 

18 अगस्त, 2004 से 11 जनवरी, 2005 तक मृगेंद्र प्रताप सिंह का कार्यकाल रहा. इसके बाद झारखंड विधानसभा के सबा अहमद कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर 12 जनवरी, 2005 से एक मार्च, 2005 तक सदन की कार्यवाही का संचालन किया.

आलमगीर आलम और सीपी सिंह भी रह चुके हैं स्पीकर 

 

 

 

 

 

 

 

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