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Jharkhand का बजट लोक-लुभावन, पिछले बजट की घोषणाएं अभी सरकार पर कर्ज, नये का क्या होगा?

Announcements of the last budget, now the debt on the government, what will happen to the new one?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड सरकार ने बजट 2022-23 की घोषणा कर दी हैं। झारखंड के वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने 1 लाख, 1 हजार, 1 सौ 1 करोड़ का बजट पेश किया। बजट में वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं, जैसे- किसानों के लिए 25 हजार रुपये का कॉर्पस फंड, ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पर जोर, दुग्ध उत्पादन में राज्य को आत्मनिर्भर बनाते हुए 85 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य, गुरुजी क्रेडिट कार्ड के जरिए युवाओं को शिक्षा के लिए दो लाख, इसके अलावा हजारों किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण, गरीबों के लिए अंबेडकर भवन निर्माण, वगैरह, वगैरह…

बजट की इन घोषणाओं में सरकार की सदेच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन संदेह इस पर है कि जब पिछले साल के बजट में की गयी घोषणाएं पूरी नहीं हो पायी हैं तो इस बार के बजट की घोषणाओं का क्या होगा। घोषणाओं के पूरा होने पर संदेह इस बात पर है कि सरकार ने पिछले साल, उसके भी पिछले साल बजट की घोषणा की थी। लेकिन धरातल तो क्या, अगल-बगल में भी ये दिखायी नहीं देतीं। जब पिछली घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं, तो भी पुरानी घोषणाओं को ही पूरा करने का ही प्रयास किया जाता तब भी यह उपलब्धि कहलाती। नयी घोषणाएं करने की क्या जरूरत थीं। इसका तो मतलब यही हुआ कि जनता पिछली घोषणाओं को भूल जाये। नयी घोषणाओं (अगर पूरी हो गयीं तो) पर ध्यान दे।

आज की बजट घोषणा के वक्त वित्तमत्री ने पहले ही कह दिया कि कोरोना महामारी की कारण से झारखंड के विकास में बाधा पड़ी थीं। तो चलिए हम पिछले साल की बजट की सारी बातें भूल जाते हैं। लेकिन एक बात तो याद रखनी होंगी वह है स्वास्थ्य पर की गयी घोषणाएं। सारी घोषणाओं को नकारा जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य पर की गयी घोषणाओं को नहीं। क्योंकि कोरोना काल में सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाएं ही सबसे बड़ी आवश्यकता थीं, आज भी हैं। लेकिन यहां तो आप फेल हो गया। न तो ऑक्सीजन प्लांट पर किये गये वादे पूरे किये न ही राज्य के लिए एक अदद जिनोम सिक्वेंसिंग मशीन की व्यवस्था की जा सकी। खैर, इस बजट की बाद में देखेंगे, 2021-22 में स्वास्थ्य को लेकर की गयी घोषणाओं पर ही नजर डाल लें, ताकि पता चल सके कि राज्य सरकार ने क्या घोषणा की थी और कितनी पूरी कर सकी।

2021-22 के बजट में ये की गयी थीं घोषणाएं
  • 6 वर्षों में लगभग 64,180 करोड़ रुपये के परिव्‍यय वाली एक नई केन्‍द्र प्रायोजित स्‍कीम ‘पीएम आत्‍मनिर्भर स्‍वस्‍थ भारत योजना’का शुभारंभ किया जाएगा। इससे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य प्रणालियों की क्षमता विकसित होगी, मौजूदा राष्‍ट्रीय संस्‍थान मजबूत होंगे, और नये संस्‍थानों का सृजन होगा, जिससे नयी और उभरती बीमारियों की पहचान एवं इलाज करने में आसानी होगी। यह राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के अतिरिक्‍त होगा। इस योजना के तहत किये जाने वाले मुख्‍य उपाय निम्‍नलिखित हैं :
  • ए. 17,788 ग्रामीण और 11,024 शहरी स्‍वास्‍थ्‍य एवं वेलनेस केंद्रों के लिए आवश्‍यक सहायता दी जाएगी।
  • बी. 11 राज्‍यों के सभी जिलों और 3382 प्रखंड सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य इकाइयों में एकीकृत सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रयोगशालाएं स्‍थापित की जाएंगी।
  • सी. 602‍ जिलों और 12 केन्‍द्रीय संस्‍थानों में गंभीर बीमारी की देखभाल से जुड़े अस्‍पताल ब्‍लॉक स्‍थापित किये जाएंगे।
  • डी. राष्‍ट्रीय रोग नियंत्रण केन्‍द्र (एनसीडीसी), इसकी 5 क्षेत्रीय शाखाओं और 20 महानगरों में स्थित स्‍वास्‍थ्‍य निगरानी इकाइयों को मजबूत किया जाएगा।
  • ई. सभी सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ने के लिए एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य सूचना पोर्टल का विस्‍तार सभी राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा।
  • एफ. प्रवेश स्‍थलों, अर्थात 32 हवाई अड्डों, 11 समुद्री बंदरगाहों और 7 लैंड क्रॉसिंग पर 17 नई सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य इकाइयों को चालू किया जाएगा और 33 मौजूदा सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य इकाइयों को मजबूत किया जाएगा।
  • जी. 15 स्‍वास्‍थ्‍य आपातकालीन ऑपरेशन केन्‍द्रों और 2 मोबाइल अस्‍पतालों की स्‍थापना की जाएगी।
  • एच. वन हेल्‍थ के लिए एक राष्‍ट्रीय संस्‍थान, डब्‍ल्‍यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय अनुसंधार प्‍लेटफॉर्म, जैव सुरक्षा स्‍तर-3 की 9 प्रयोगशालाओं और विषाणु विज्ञान के लिए 4 क्षेत्रीयराष्‍ट्रीय संस्‍थानों की स्‍थापना की जाएगी।

ये हैं पिछली बार की घोषणाएं। अब सरकार ही तय करे कि क्या इन घोषणाओं को उसने पूरा कर लिया है। हां, तो वे कहां दिख रही हैं, और ना, तो क्यों? कोरोना की वजह से विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य योजनाएं को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। बस, इसी कारण सरकार आज की गयी घोषणाएं पूरी कर पायेगी, इसमें संदेश लगता है। संदेह की एक वजह है इस बार के बजट में 11,286 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा। ऐसा हर साल होता है। हर वर्ष जब इतना लम्बा-चौड़ा राजकोषीय घाटा होता है, फिर से इतनी बड़ी (अधूरी रह जाने वाली) घोषणाएं क्यों की जाती हैं?

यह भी पढ़ें: Jharkhand Budget: वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने एक लाख एक हजार करोड़ का बजट पेश किया

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