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Jharkhand: पंचायत प्रत्याशियों से ‘दिल मिलाकर’ अपनी उपस्थिति जता रहे हैं सभी दल वाले

Jharkhand: All the parties showing their presence by supporting the panchayat candidates

आगामी चुनावों का सेमीफाइल है झारखंड पंचायत चुनाव

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों से ‘दल मिलाने’ की मनाही है इसलिए ‘दल वाले’  पंचायत प्रत्याशियों से ‘दिल मिलाकर’ चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति दिखा रहे हैं। दलीय आधार पर पंचायत चुनाव की इजाजत नहीं है तो क्या हुआ, ‘राजनीति’ और ‘हेराफेरी’ से भला कौन रोक सकता है? इसलिए पर्दे के पीछे से सारा खेल चालू है। सच यही है कि पार्टियां प्रत्याशियों को अपना समर्थन खुले रूप से दे रही हैं। झारखंड में दो चरणों के पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया चल रही है। इन चरणों के साथ अगले दो चरणों में राजनीति दल और प्रत्याशी एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। राजनीतिक दल प्रत्याशियों को अप्रोच कर रहे हैं तो प्रत्याशी भी राजनीतिक दलों की पैरवी कर रहे हैं। इसलिए पंचायत चुनाव में खड़ा हर प्रत्याशी किसी न किसी दल का नुमाइंदा नजर आ रहा है। कमोबेश सभी दलों में ऐसा देखा जा रहा है।

पंचायत चुनाव कैसे लड़ना है, इसका निर्देश प्रमुख दल निचले स्तरों पर भिजवा रहे हैं। ग्रामीण कार्यकर्ताओं को पार्टियों द्वारा निर्देशित किया जा रहा है कि वे एकजुटता बनाकर पंचायत चुनाव लड़ें। चूंकि राज्य के सभी प्रमुख पार्टियां की हर स्तर पर अपनी कमेटियां हैं, इसलिए उन तक संदेश भिजवाना और उनको निर्देशित करना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। इन कमेटियों को स्पष्ट निर्देश है कि पार्टी जो गाइडलाइन निर्धारण करे और उससे इतर दूसरे निर्णय नहीं लिये जायें। ऐसा नहीं करने को अनुशासनहीनता माना जाएगा।

प्रमुख पार्टियों की अप्रत्यक्ष भागीदारी कितनी आवश्यक?

झारखंड में पंचायत चुनाव किसी भी पार्टी के बैनर और उसके सिम्बल के बिना ही लड़ा जायेगा। लेकिन राजनीतिक दलों का अप्रत्यक्ष (प्रत्यक्ष) समर्थन देना उनकी विवशता है। क्योंकि यही ‘छोटी सरकारें’ ‘बड़ी सरकार’ बनाने के वक्त बड़े काम आती हैं। पंचायत चुनाव हो या नगर निकाय चुनाव, पार्टियां इनसे खुद को मजबूत करती हैं। इन छोटी इकाइयों के बिना कोई भी पार्टी अपना मजबूत आधार खड़ा कर ही नहीं सकती। इन चुनावों से ही पार्टियां अपना आकलन भी करती हैं। एक तरह से देखा जाये तो ये चुनाव हर पार्टी के लिए ‘फाइनल मैच की तैयारी’ की तरह होते हैं। इसलिए पंचायत चुनाव के साथ सभी दलों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। पंचायत चुनाव को 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव का रिहर्सल भी माना जा सकता है। 2024 में ही लोकसभा चुनाव भी होना है।

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