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Jharkhand: विधानसभा घेराव के लिए निकले आजसू समर्थकों ने ‘जनज्वार’ में भरी हुंकार

Jharkhand: AJSU supporters shouted for the assembly gherao

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाने, खनिज संपदा की लूट रोकने और सामाजिक न्याय के लिए आवाज मुखर करना अगर गुनाह है, तो यह हम और हमारी पार्टी बार-बार करेंगे। जनज्वार के साथ हम निर्णायक लड़ाई पर उतरे हैं। सत्ता सिस्टम चाहे जितना जोर लगा ले, रोकना आसान नहीं होगा।

विधानसभा घेराव के लिए  निकले कार्यकर्ताओं, समर्थकों के भारी जुटान को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कही। पार्टी के हजारों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों को नोटिस भेजे जाने, जगह-जगह पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर रोके जाने, राजधानी के मैदानों में निषेधाज्ञा लागू करने पर आजसू प्रमुख ने सख्त नाराजगी जतायी और कहा कि सरकार इतनी ताकत खनिज संपदा की लूट रोकने और झारखंडी युवाओं को रोजगार, नौकरी देने में लगाये, तो राज्य का भला हो जाये।

जनभावना को दबाने, लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करने और कार्यकर्ताओं को रोजाने के खिलाफ मंगलवार आठ मार्च को राज्य के सभी प्रखंडों में सरकार का पुतला जलाया जायेगा।

लोकतांत्रिक मूल्यों, मर्यादा के साथ

उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, मर्यादा और जनभावना को साथ लेकर इस लड़ाई में उतरी है। हम सदन से लेकर सड़क तक सवाल खड़े कर रहे हैं। सभी विधायकों सांसदों को पत्र लिखकर इन मुद्दों पर मंतव्य जुटाने की कोशिशें की। मुख्यमंत्री का ध्यान खींचा। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को मांग पत्र सौंपा। तब विधानसभा घेराव करने निकले। तब सरकार ने हमें रोकने के लिए हजारों पुलिस को सड़कों पर उतार दिया। दो दिनों तक प्रखंड से लेकर राज्य मुख्यालय के अधिकारी मशक्कत करते रहे। अगर अवाम एकमत है, तो इन सरकारी बाधाओं से रूकने और डरने वाला नहीं। आजसू के कार्यकर्ता सौ नोटिस लेने के लिए तैयार हैं। वे जेल जाने से भी नहीं डरते। इसके साथ ही उन्होंने अंबेडकर जंयती के दिन सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पूरे राज्य में कार्यकर्ताओं, समर्थकों से सड़क पर उतरने का आह्वान किया।

जनता ही सरकार, कुर्सी से उतार देगी

आजसू प्रमुख ने कहा कि ‘‘शासन चलाने वाले लोकतंत्र का पन्ना पलट कर देख लें कि जनता ही सरकार है। अगर जनता और उसकी भावना का सम्मान नहीं किये, तो वह कुर्सी से उतार देगी।’’ उन्होंने कहा कि सत्ता के इशारे पर सिस्टम विधानसभा घेराव कार्यक्रम को नाजायज बता रहा है। एसडीओ चिट्ठी जारी कर अनुमानित राय जाहिर कर रहे हैं कि विधि व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है। लेकिन झारखंडी जनभावना और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने वाले से किसी से पूछिये, तो यही कहेगा कि यह लड़ाई सही है। राज्य में 3.5 लाख सरकारी पद खाली हैं, इस पर सवाल पूछे जाने से सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं होता।

निशाने पर कांग्रेस के मंत्री

सुदेश कुमार महतो ने कहा कि वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने बजट भाषण में राजा और प्रजा की बात कही। हमने विधानसभा में पूछा कि ये राजा कौन हैं। रामेश्वर उरांव को यह ठीक नहीं लगा। रामेश्वर उरांव के बैकग्रांउड जानने के लिए थोड़ा पीछे लिये चलते हैं। वे एक पुलिस अधिकारी के तौर पर एकीकृत बिहार और लालू राज में झारखंड आंदोलनकारियों को दबाते थे। लाठी- डंडे चलवाते थे। सरकार की कान भरते थे। अब मंत्री बने हैं, तो झारखंडी विषय, विचार का कद्र करें।

इस मौके पर सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, विधायक डॉ लंबोदर महतो, पूर्व मंत्री उमाकांत रजक, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, कुशवाहा शिवपुजन मेहता, मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, रौशनलाल चौधरी, राजेंद्र मेहता, हसन अंसारी, जयपाल सिंह, नजरूल हसन हाशमी, सतीश कुमार, हरेलाल महतो, मनोज चंद्रा, काशीनाथ सिंह, मनोज सिंह, सुकरा मुंडा, पार्वती देवी, संजय सिद्धार्थ, गौतम साहू, सुनिल सिंह, बनमाली मंडल, संजय महतो, हकीम अंसारी, भरत काशी, वर्षा गाड़ी, दिलीप दांगी, विजेता वर्मा, ओम भारती, दिलीप साहू, सूरज अग्रवाल, चंद्रेश्वर साहू, सुरेश महतो, घु्रव शाह, लाल गुड्डू नाथ शाहदेव, नजमी, मंगल सुरीन, संजय जारिका, सुजीत गिरी, अनिता साहू, सुमन मुंदरी, रामधन वेदिया, रामजीत गंझू, अरविंद कुमार, हरिश कुमार, गौतम सिंह इत्यादि मुख्य रूप से मौजूद थे। उधर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्होंने सड़कों पर धरना दिया और सरकार की नीयत, नीति के खिलाफ नारेबाजी की।

यह भी पढ़ें: Ukraine Crisis: युद्ध के 12वें दिन पीएम मोदी ने जेलेंस्की से की बात, भारतीयों को निकालने समेत कई मुद्दों पर चर्चा

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