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Jharkhand में बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की क्षमता, ताक रहा दूसरे राज्यों का मुंह, महंगी दर पर खरीदता है बिजली

Jharkhand has the ability to become self-reliant in electricity generation, looking out for others

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

गर्मियों में बिजली संकट एक सामान्य समस्या है, लेकिन बिजली उत्पादन में खुद को आत्मनिर्भर नहीं करना पाना झारखंड का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं हो पाना सरकारी नीतियों का परिणाम है। झारखंड में बिजली की मांग बढ़ी है और हर साल इस मांग में बढ़ोतरी हो रही है, नहीं बढ़ रही है तो बिजली। झारखंड एक ऐसा राज्य जो बिजली पर पूरी तरह से खुद को निर्भर बना सकता है, लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति और कुछ राजनीतिक स्वार्थ ने बिजली के लिए दूसरों का मुंह ताकने को विवश कर दिया है।

झारखंड के कोयले से दूसरे राज्य रोशन, झारखंड के लोग अंधेरे में

यह कैसी  विडम्बना है कि झारखंड के कोयले से कई राज्य बिजली उत्पादन कर अपने राज्य को रोशन कर रहे हैं और झारखंड उन्हीं राज्यों से महंगी दर पर बिजली खरीद रहा है और केन्द्र सरकार को कोस रहा है कि वह झारखंड के साथ भेदभाव कर रही है। सरकार (सरकारें) यह दावा करती रही है कि राज्य की प्राथमिकता अपने कोयले से बिजली बनाकर बेचना है। लेकिन हकीकत है कि  दूसरे राज्य झारखंड के कोयले से बिजली बनाकर झारखंड को ही सालाना 3000 करोड़ की बिजली बेचते हैं, जबकि एनटीपीसी व डीवीसी को झारखंड में ही कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। बता दें, डीवीसी मुख्यालय पश्चिम बंगाल और एनटीपीसी का मुख्यालय दिल्ली में है। हरियाणा के यमुनानगर में बन रहे पावर प्लांट के लिए झारखंड के बादल पारा और कल्याणपुर कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। पंजाब के स्टेट पावर कॉरपोरेशन को पैनम कोल माइंस आवंटित की गयी है।

बिजली की क्या है ताजा स्थिति

गर्मी में बिजली खपत और मांग बहुत अधिक बढ़ गयी है। बिजली नहीं मिलने के कारण बिजली को लेकर हाहाकर मचा हुआ है। वर्तमान में झारखंड में बिजली की हालात इतनी खराब है कि जेबीवीएनएल महंगी दर 12 से 15 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीद कर बिजली आपूर्ति को सामान्य करने में जुटा हुआ है। हालत यह है कि प्रतिदिन 4 से 5 करोड़ रुपये अतिरिक्त बिजली खरीदी पर खर्च करने को विवश है।

राज्य में 400-500 मेगावाट तक की बिजली कमी

राज्य में औसतन 2100 मेगावाट बिजली की जरूरत है, मगर गर्मी में पीक ऑवर (सुबह 6 से 10 और शाम में 5 बजे से 10 बजे तक) में डिमांड बढ़कर 2400 से 2500 मेगावाट तक पहुंच गयी है, मगर अभी राज्य में केवल मुश्किल से 1800 से 1900 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो रहा है। पीक ऑवर में स्थिति नियंत्रित करने के लिए सबसे ऊंची दर पर नेशनल पॉवर एक्सचेंज से 12 से 15 रुपये यूनिट तक महंगी बिजली खरीदी जा रही है। यानी कि हर दिन 4 से 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही है। ये बिजली औसतन 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट खरीदी हो रही है, मगर पीक ऑवर में अतिरिक्त बिजली 12 से 15 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदनी पड़ रही है।

झारखंड सरकार की दलील- उसके साथ हो रहा भेदभाव
  • अंतर्राष्ट्रीय कारणों के कारण देश में इंपोर्ट होने वाला कोयला फिलहाल बंद-सा हो गया है। इसके कारण पूरी निर्भरता देश के कोयले पर टिक गयी है। अब कोल इंडिया सहित अन्य कोयला उत्पादन कपंनियां देश के अन्य पावर प्लांटों में कोयले की आपूर्ति कर रही हैं।
  • जेबीवीएनएल अफसरों के अनुसार, देश के अन्य राज्यों में कोल इंडिया और सीसीएल कोयले की आपूर्ति तो करा है, मगर झारखंड के लिए उत्पादन कर बिजली देने वाले कंपनियों को कोयले देने में आनकानी कर रहा है। टीवीएनएल इसका बड़ा उदाहरण है। सीसीएल को हर महीने 500 करोड़ का भुगतान होने के बावजूद टीवीएनएल को प्रतिदिन दो रेक कोयला नहीं मिल रहा है जिससे टीवीएनएल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
  • अगर केवल रॉयल्टी की बात करें तो 3000 से 4000 हजार करोड़ रुपये कोयले के एवज में राज्य का रॉयल्टी बनती है, रॉयल्टी तो दूर कोयले की आपूर्ति भी सीसीएल और बीसीएल नहीं कर रहे हैं।
  • टाटा जोराबेरा में 1000 मेगावाट का पावर प्लांट है। इससे 400 मेगावाट की बिजली की मांग का रही है, मगर नहीं मिल रहा है। मैथन पावर प्लांट भी 1000 मेगावाट का प्लांट है। इससे  भी जेबीवीएनएल कम से कम 400 मेगावाट बिजली की मांग कर रहा है। इसी तरह डीवीसी का सीटीपीएस और कर्णपुरा का 1000 का पावर प्लांट है, मगर यह भी जेबीवीएनएल को बिजली नहीं दे रहा है। ये कंपनियां राज्य के बाहर बिजली भेज रही हैं, मगर झारखंड को बिजली नहीं दे रही हैं। नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट 1800 मेगवाट का है, प्लांट काम पूरा हो चुका है इससे जेबीवएनएल को 800 मेगवाट बिजली मिलनी है, मगर ट्रांसमिशन नेटवर्क का बहाना बनाकर बिजली देने को तैयार नहीं है।
कहां-कहां से अभी मिल रही है जेबीवीएनएल को बिजली
  • एनटीपीसी : 490 मेगावाट
  • डीवीसी : 580 मेगावाट
  • टीवीएनएल : 350 मेगावाट
  • आधुनिक पावर : 190 मेगावाट
  • इनलैंड पावर : 55 मेगावाट
  • सोलर पावर राजस्थान से : 350 मेगावाट
  • विंड पावर रात में : 180 मेगावाट
  • एनएचपीसी : 40 मेगावाट
  • पीटीसी हाईड्रो : 40 से 50 मेगावाट

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