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Jharkhand: झारखंड-बिहार की एक कहानी, झारखंड थोड़ा कम गरीब, बिहार आधा से ज्यादा गरीब

Jharkhand: A story of Jharkhand-Bihar, Jharkhand a little less poor, Bihar more

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

देश का आर्थिक सर्वे झारखंड और बिहार की दयनीय स्थिति की पोल खोल रहे हैं। आलम यह है कि झारखंड जहां आधे से थोड़ा कम करीब है, वहीं बिहार वासी आधे से ज्यादा गरीब हैं। सूचकांक में झारखंड की जहां 42.16 फीसदी आबादी गरीब है, वहीं बिहार की स्थिति झारखंड से ज्यादा खराब है। सूचकांक में बिहार की 51.91 प्रतिशत आबादी गरीब है।

खनिज सम्पन्न निर्धन राज्य झारखंड

झारखंड खनिज सम्पन्न राज्य है। वैध-अवैध तरीके से देश के दूसरे राज्यों के साथ दूसरे देश यहां के खनिज का उपयोग कर रहे हैं। फिर भी यह राज्य गरीब है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों हर दिन ताबड़तोड़ अरबों रुपयों की सम्पत्तियां रेवड़ियों की तरह बांटे जा रहे हैं। फिर भी यह राज्य गरीब है। जितनी सम्पत्तियां बांटी जा रही हैं, या पिछली योजनाओं में बांटी जा चुकी हैं, अगर उनका तरीके से आर्थिक उपयोग जाये तो पूरे राज्य को रोजगार सम्पन्न किया जा सकता है। ऐसा करने से पूरे राज्य की तस्वीर यूं ही बदल जायेगी। झारखंड के सीएम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से काफी प्रेरित हैं। अगर वह उनसे भी प्रेरणा ले लें तो भी झारखंड की तस्वीर संवर सकती है। बता दें, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की योजनाओं का असर है कि आज उनके राज्य में न के बराबर बेरोजगार हैं। उन्होंने छोटी-छोटी बात में रोगजार के अवसर उत्पन्न किये हैं। रही बात बिहार की तो बिहार की हालत सुधरने के लिए वहां की राजनीतिक सोच में सुधार बेहद जरूरी है। यहां पार्टियों की सरकार बदलने पर राज्य की तस्वीर अलग हो जाती है। जैसे इन दिनों महागठबंधन की सरकार है और उस पर ‘जंगलराज की वापसी’ के आरोप लग रहे हैं। बिहार में दावे बहुत होते हैं, योजनाएं धरातल पर उतर नहीं पातीं।

झारखंड में हालात सुधरने का सरकार का दावा

झारखंड सरकार ने राज्य में गरीबों की हालत के सुधरने का दावा तो किया है। कई योजनाओं के नाम तक गिना दिये जिनसे वह राज्य की गरीबी दूर करने का दावा कर रही है। लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट कुछ और कहती है। राष्ट्रीय बहुआयामी निर्धनता सूचकांक में झारखंड में 42.16 प्रतिशत लोग गरीब हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों का प्रतिशत 50.93 प्रतिशत बताया गया है और शहरी क्षेत्रों में 15.20 प्रतिशत। यह रिपोर्ट एनएफएचएस-4 सर्वेक्षण 2015-16 पर आधारित है।

जिलों में गरीबी रेखा में अंतर

पूर्व से दक्षिण-पूर्व में स्थित धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची और पूर्वी सिंहभूम जिलों में कम गरीबी है। इसका कारण यह है कि ये जिले है ज्यादातर शहरी है। राज्य के उत्तर-पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भागों में गरीबी बहुत अधिक है, जैसे- साहिबगंज, पाकुड़, चतरा और पश्चिमी सिंहभूम जिले।

झारखंड को एनएफएचएस-5 में आशाजनक प्रदर्शन की उम्मीद

एनएफएचएस-4 तुलना में एनएफएचएस-5 में झारखंड की तस्वीर बदलने की उम्मीद राज्य सरकार कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि राज्य के लिए वह जो प्रयास कर रही है, अगले राष्ट्रीय सर्वे में उसके परिणाम दिखाई देने लगेंगे। राज्य ने कृषि संबंधी गतिविधियों में आशाजनक प्रदर्शन किया है। फल एवं सब्जियों, दूध और मछली उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। आर्थिक सवेक्षण में बताया गया है कि झारखंड में सब्जी का उत्पादन 2015-16 में 3373.8 हजार टन से बढ़कर 2020-21 में 3741.14 हजार टन हो गया है। फल का उत्पादन भी इसी समयावधि में 961.2 हजार टन से बढ़कर 1196 हजार टन हो गया। दूध का उत्पादन भी वर्ष 2016-17 की तुलना में 18.94 लाख टन से बढ़कर 26.83 लाख टन हो गया। अंडे के उत्पादन में भी इस दौरान 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, मछली का उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है।पहले जहां झारखंड बंगाल और आंध्र प्रदेश की मछलियों की प्रसंस्कृत मछलियों पर निर्भर रहता था, अब पूरे राज्य के लोगों को ताजी मछलियां उपयोग के लिए मिल जा रही हैं।

अन्य राज्यों की स्थिति

नीति आयोग के सर्वे में उत्तर प्रदेश का स्थान तीसरा है। यहां 37.79 प्रतिशत आबादी गरीब है। देश के जिन राज्यों में सबसे कम गरीबी है, उनमें केरल (0.71 प्रतिशत) शीर्ष पर है। इसके बाद गोवा (3.76 प्रतिशत), सिक्किम (3.82 प्रतिशत), तमिलनाडु (4.89 प्रतिशत) और पंजाब (5.59 प्रतिशत) का स्थान है। केंद्र शासित प्रदेशों में दादरा और नगर हवेली में सबसे अधिक गरीबी है। वहां 27.36 प्रतिशत लोग गरीब हैं। दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 12.58 प्रतिशत और दिल्ली में 4.79 प्रतिशत लोग गरीब हैं।

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