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क्या नियम विरुद्ध है बिहार विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव?

Is the no-confidence motion against the Speaker of the Bihar Legislative Assembly against the rules?

Bihar Assembly: बिहार में एनडीए की सरकार खत्म होने के बाद विधानसभाध्यक्ष विजय सिन्हा अपने पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। विजय सिन्हा चूंकि भाजपा से हैं, इसलिए महागठबंधन की सरकार की ओर से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने के लिए वह अपने विधानसभाध्यक्ष को कुर्सी पर बिठाना चाहती है। यह उचित भी है। बहरहाल, विजय सिन्हा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे नियम विरुद्ध बता रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वह विधानसभा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देंगे। विजय सिन्हा ने इस्तीफा नहीं देने की वजह बताते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव व्यक्तिगत आरोप लगाकर लाया गया है, जिसे खारिज करने का उनको पूरा अधिकार है।

क्यों नहीं देना चाहते विजय सिन्हा इस्तीफा?

विजय सिन्हा का कहना है कि वह विधायिका की प्रतिष्ठा के कारण अपने पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। वह जब तक दायित्व के साथ बंधे हैं, तब तक अपने व्यक्तिगत सम्मान से ऊपर लोकतंत्र की गरिमा को सुरक्षित रखना उनका कर्तव्य है। विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को विश्वास की कमी के रूप में नहीं देखा। अविश्वास का प्रस्ताव का जो नोटिस सभा सचिवालय को दिया गया है, उसमें नियमों और प्रावधानों की अनदेखी की गई है। इसलिए इस नोटिस को अस्वीकृत करना मेरा स्वाभाविक जिम्मेवारी है।

बता दें, एनडीए से नाता तोड़कर बिहार में नीतीश-तेजस्वी की 10 अगस्त को सरकार बनायी थी। उसी समय बिहार विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर नोटिस के 14 दिनों के अंदर उस पर चर्चा औऱ वोटिंग करानी होती है।

बिहार में यह पहली बार होगा कि कोई विधानसभा अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटाया जाएगा। बिहार में चौथी बार ऐसा होगा जब किसी विधानसभाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इससे पहले 1960, 1970 और 1992 में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था। लेकिन यह पहली बार होगा कि किसी विधानसभा की कुर्सी चली जायेगी।

दरअसल, संसदीय प्रक्रिया में अविश्वास प्रस्ताव या विश्वासमत अथवा निंदा प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है, जिसे विपक्ष द्वारा संसद में सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है या दुर्लभ उदाहरण के रूप में यह एक तत्कालीन समर्थक द्वारा पेश किया जाता है, जिसे सरकार में विश्वास नहीं होता। लेकिन अभी का अविश्वास प्रस्ताव सरकार के ही द्वारा लाया गया है।

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