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फिटनेस कॉन्शन बॉलीवुड में नशा? आखिर फिटनेस और नशे का क्या तालमेल?

फिटनेस कॉन्शन बॉलीवुड में नशा? आखिर फिटनेस और नशे का क्या तालमेल?
न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

बॉलीवुड की एक विडम्बना हैरान करने वाली है! एक समय था जब शारीरिक रूप से बिना फिट कलाकार भी फिल्मों में चल जाते थे, हिट हो जाते थे, उनकी फिल्में सुपर-डुपर हिट हो जाया करती थीं। तब शायद लोग उनकी प्रतिभा को ही देखते थे, उसकी शारीरिक बनावट को नहीं। गुजरे जमाने में धर्मेन्द्र, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन, जितेन्द्र जैसे कलाकार अपनी अदाकारी के साथ अपनी फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं, लेकिन कुछ कलाकारों के साथ ऐसा नहीं था। वे अपनी बेडौल काया के बावजूद हिन्दी सिनेमा में छाये हुए थे। लेकिन आज ऐसा नहीं है, आज अगर कोई कलाकार फिट न हो, उसके सिक्स पैक न हों, स्टंट करना नहीं आता हो, तो उसी बॉलीवुड में दाल नहीं गलनी है। अक्षय कुमार, टाइगर श्राफ जैसे कलाकार इसके उदाहरण हैं। वे फिट भी हैं, एक्शन में निपुण भी हैं, अदाकारी में माहिर भी हैं। बॉलीवुड के दूसरे कलाकारों पर भी यही फॉर्मूला लागू है। लेकिन शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान की रेव पार्टी में गिरफ्तारी के बाद एक बात जेहन में उठनी स्वाभाविक है कि आज जब बॉलीवुड कलाकार फिटनेस कॉन्शस हैं, अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखते हैं, खान-पान में भी परहेज करते ही होंगे, फिर पूरा बॉलीवुड नशे की चपेट में कैसे आ गया है। याद होगा, सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद चल रही जांच में नशे का भी एंगल सामने आया था। इसके बाद एनसीबी बॉलीवुड में जहां हाथ डाल रहा था, वहीं ‘नशेबाज’ निकल आ रहे थे। क्या इसका मतलब निकाला जाये कि पूरा बॉलीवुड नशे की चपेट में है? और है भी तो कैसे? आखिर फिटनेस और नशे का क्या तालमेल?

नयी नहीं है रेव पार्टी, लेकिन बदल गया है इसका स्वरूप

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई के पास एक शिप पर छापा मार कर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया। इस छापेमारी में एमडीएमए, कोकीन, एमडी, चरस और एक्सटेसी आदि ड्रग्स बरामद किये गये। ड्रग्स की बरामदगी, गिरफ्तारी और ऐसी रेव पार्टियां कोई नई बात नहीं है। पहले भी होता रहा है, और आगे भी होता रहेगा। ड्रग्स का कारोबार फैला ही इतना है कि यह पकड़-धकड़ और बरामदगी बहुत मामूली है। दरअसल, दुनिया में जितनी ड्रग्स पकड़ी जाती है उसकी कई गुना ज्यादा पकड़ में नहीं आती हैं। एक अनुमान है कि अवैध ड्रग्स का मात्र पांच से सात फीसदी हिस्सा ही पकड़ में आता है।

शाहरुख खान का बेटा रेव पार्टी में गिरफ्तार हुआ। ‘रेव पार्टी’ शब्द का मतलब समझा जाता है- ड्रग्स वाली पार्टी। पर ऐसा है नहीं, रेव पार्टी से तात्पर्य है मनोरंजन का एक आयोजन जहां अंधेरे में डिस्को लाइट पर डीजे की गूंजती ध्वनियों और संगीत पर लोग थिरकते हैं। इस पार्टी में लोग तेज म्यूजिक के बीच उन्मुक्त वातावरण में नृत्य-संगीत का आनंद लेते हैं। लेकिन आजकल रेव पार्टी बदनाम हो गयी है। इन पार्टियों में शराब, ड्रग्स, नशे की सामग्री, देह व्यापार से जुड़ी चीजें भी शामिल हो गयी हैं। आजकल की रेव पार्टी में एक खास वर्ग शामिल होता है। इन पार्टियों की बाहरी लोगों को जरा भी भनक नहीं लग पाती है। पहले यह देश के चुनिंदा शहरों में ही सुनने में आती थीं, लेकिन अब इसने छोटे शहरों में भी पैर पसार लिया है। नशे के घालमेल के बाद रेव पार्टी का स्वरूप भी बदल गया है। पहले रेव पार्टी खुले में होती थी, लेकिन अब लुक-छिपकर होती है। नशीले पदार्थ बेचने वालों के लिए ये रेव पार्टियां धंधे की सबसे मुफीद जगह बन गयी हैं। बताया जाता है कि इन पार्टियों में मॉडल, सेलिब्रिटी, एवं राजनेताओं के लड़के-लड़कियां जाते हैं।

बॉलीवुड के नशे का आदी होने की क्या है वजह?

आखिर क्या वजह है कि पूरा बॉलीवुड नशे के जाल में फंसा हुआ है। इसकी एक वजह मानी जा रही है, कलाकारों के ऊपर काम का बोझ। आज का बॉलीवुड कलाकार काम के बोझ के तले काफी दबा हुआ है। कलाकारों की जिन्दगी तनाव से भरी हो गयी है। कई-कई शिफ्ट में शूटिंग, भाग-दौड़ भरी जिन्दगी, कलाकारों का खुद ही स्टंट करना, बात-बेबात पार्टियों का आयोजन, ये इनकी जिन्दगी का हिस्सा बन गये हैं। इस भागम-भाग भरी जिन्दगी में वे कहीं न कहीं थकान से चूर हो जाते हैं। इस थकान और तनाव में उन्हें ऐसी किसी चीज की जरूरत महसूस होती है जो उनके तनाव को कम कर सके। फिर यहीं से शुरू हो जाता है उसके नशे का सफर। पहले वह थोड़े से शुरुआत करते हैं, फिर उसके आदी हो जाते हैं। और फिर आधुनिक युग में युवा पीढ़ी के पास इच्छा-शक्ति की भी कमी भी तो होती है। सही-गलत में फर्क करना भी उनके लिए बड़ा दुष्कर कार्य होता है। हर कलाकार अक्षय कुमार जैसा दृढ़निश्चयी तो नहीं होता।

पैसे, सुविधाएं देने में दिल बड़ा, संस्कार देने में हाथ तंग

वर्तमान दौर में यह सबसे बड़ी चिंता है कि बड़े घर के लोगों को अपनी संतान को देने के लिए तो बहुत कुछ होता। बस, नहीं दे पाते हैं तो एक अच्छा संस्कार। बॉलीवुड का हर परिवार आर माधवन के परिवार जैसा नहीं है। आर माधवन ने अपने बेटे को जो संस्कार दिये वह वॉलीवुड में खोजने से नहीं मिलेगा। आर माधवन ने अपने बेटे को भारतीय संस्कारों की बड़ी गहन शिक्षा दी है। कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि अभिभावकों को अपने बच्चों को आधुनिक सुविधाओं से दूर रखना चाहिए। ये चीजें भी आज जरूरी हैं, लेकिन उनकी निगरानी तो होनी ही चाहिए कि वे क्या कर रहे हैं। जानवरों के बच्चे भी अपने जन्मदाताओं से दूर रह कर भी वहीं संस्कार सीखते हैं, जो प्रकृति ने उनके लिए तय किये होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि इनसान होकर भी इनसान इनसानों वाला व्यवहार नहीं कर पाता।

दूर-दूर तक फैला है नशे का जाल

नशा सिर्फ बॉलीवुड में ही नहीं है, नशा के व्यापार तो पूरे देश में फैला हुआ है। नशे के व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो है। लेकिन उसकी जहां तक पहुंच है, नशे के व्यापारियों की पहुंच उससे कहीं ज्यादा है। ऐसा खुद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जारी की जाने वाली रिपोर्टों के आधार भी कहा जा सकता है। यहां प्रस्तुत है इसकी छोटी-सी एक बानगी-

  • इसी साल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बताया था कि पिछले पांच साल में ड्रग्स बेचकर दाऊद इब्राहिम के गिरोह ने करीब 1500 करोड़ रुपये कमाए हैं।
  • दिल्ली पुलिस ने 2020 में 400 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद कर 882 तस्करों को गिरफ्तार किया था।
  • दिल्ली पुलिस के मुताबिक वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और मणिपुर राज्यों से पकड़े गये तस्करों से पता चला कि हेरोइन और स्मैक अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते भारत और म्यांमार से उत्तर-पूर्वी राज्य से होती हुई उत्तर भारत पहुंच रही थी। जबकि कोकीन दक्षिण अफ्रीकी, अमेरिकी और दूसरे देशों से हवाई जहाज या कोरियर के रास्ते भारत लायी जाती है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रायोजित इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की 2018 की सालाना रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत चरस, गांजे से लेकर कोकीन, एमडीएमए, एक्सटेसी, ट्रामाडोल, मेथाम्फेटामाइन जैसी डिजाइनर ड्रग्स के अवैध धंधे का एक बड़ा हब बन चुका है।
  • 2016 में दुनिया में जितना गांजा पकड़ा गया उसका छह फीसदी यानी 300 टन अकेले भारत में पकड़ा गया था।
  • 2017 में इसकी मात्रा 353 टन थी। यानी एक साल में 20 फीसदी का इजाफा। – बिहार से लगी नेपाल सीमा भी ड्रग्स की तस्करी के लिए कुख्यात है।
  • देश में याबा नामक एक नशीली दवा का धंधा भी बहुत चल रहा है। ये एक पार्टी ड्रग है। याबा को थाई भाषा में ‘पागलपन की दवा’ के नाम से जाना जाता है। इसका उत्पादन पूर्वी म्यांमार के शान, काचिन और दो अन्य राज्यों में होता है।

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