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भारतीय डाक विभाग: ‘कबूतर’ अब बन चुका है ‘बाज’, सेवाओं में जोड़ रहा नित नये आयाम

भारतीय डाक विभाग अपनी सेवाओं में जोड़ रहा नित नये आयाम

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

वर्षों से हमारे जेहन में भारतीय पोस्टल विभाग की छवि बनी हुई है, वह काफी बदल गयी है। दरअसल, दुनिया ही बदल गयी है। दुनिया को  बदलने में सबसे बड़ा हाथ संचार-क्रांति का है। एक समय किसी स्थान से भेजा गया डाक कई दिनों, कई हफ्तों या महीनों का सफर कर अपने गंतव्य तक पहुंचता था। वही संदेश कहीं से कहीं पहुंचने में अब सेकेंड से भी कम समय में पहुंच जाता है। सही मायने में जिन माध्यमों से संदेश एक जगह से दूसरे स्थान तक पहुंचते थे, वे माध्यम आज अप्रासंगिक हो गये हैं। लेकिन भारतीय डाक विभाग खत्म नहीं हुआ, बल्कि और मजबूती से खड़ा होकर जनता की सेवा कर रहा है। बस, तरीके बदल गये हैं। डाकघर नयी-नयी सुविधाएं खुद से जोड़ कर और मजबूती से पूरे देश को जोड़े हुए है। भारत में विश्व की सबसे बड़ी डाक व्यवस्था है, यहां एक लाख पचपन हजार पांच सौ डाकघर हैं। दूसरे नंबर पर चीन हैं जहां केवल 60 हजार डाकघर हैं।

वैसे देखा जाये तो डाक की व्यवस्था आधुनिक नहीं, अति प्राचीन है। प्राचीनकाल में डाक सेवा का उपयोग राजा-महाराजा अथवा शाही घराने के लोग ही किया करते थे। संदेश पहुंचाने का काम राजाओं-महाराजाओं के विशेष संदेशवाहक या दूत करते थे। इस काम में प्रशिक्षित कबूतरों का इस्तेमाल तो राजघरानों में आम बात थी। इसके अलावा कुछ अन्य प्रशिक्षित पशु-पक्षियों का भी इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ यह सेवा आम लोगों के लिए भी  महसूस की जाने लगी तब पत्रों की आवाजाही शुरू हुई। सही मायने में यहीं पर डाक-सेवा की नींव पड़ी।

भारतीय डाक सेवा की स्थापना यूं तो 1 अप्रैल, 1854 को हुई थी, लेकिन सही मायनों में इसकी स्थापना 1 अक्तूबर 1854 को मानी जाती है। तब तत्कालीन भारतीय वायसराय लॉर्ड डलहौजी ने इस सेवा का केंद्रीकरण किया था। उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत आने वाले 701 डाकघरों को मिलाकर भारतीय डाक विभाग की स्थापना हुई थी। इससे पहले लॉर्ड क्लाइव ने अपने स्तर पर 1766 में भारत में डाक व्यवस्था शुरू की थी। बंगाल के गवर्नर वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कोलकाता में एक प्रधान डाकघर बनाया था। कोलकाता का यह प्रधान डाकघर आज भी शान से खड़ा है और किसी किले की याद दिलाता है।

भारतीय डाक का आज तक का सफर
  • 1766 : लार्ड क्लाइव द्वारा प्रथम डाक व्यवस्था भारत में स्थापित
  • 1774 : वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में प्रथम डाकघर स्थापित किया
  • 1786 : मद्रास प्रधान डाकघर की स्थापना
  • 1793 : बम्बई प्रधान डाकघर की स्थापना
  • 1854 : भारत में पोस्ट ऑफिस को प्रथम बार 1 अक्टूबर 1854 को राष्ट्रीय महत्व के प्रथक रूप से डायरेक्टर जनरल के संयुक्त नियंत्रण के अर्न्तगत मान्यता मिली। डाक विभाग की स्थापना इसी समय से मानी जाती है।
  • 1863 : रेल डाक सेवा आरम्भ की गयी
  • 1873 : नक्काशीदार लिफाफे की बिक्री प्रारंभ
  • 1876 : भारत पार्सल पोस्टल यूनियन में शामिल
  • 1877 : वीपीपी (VPP) और पार्सल सेवा आरम्भ
  • 1879 : पोस्टकार्ड आरम्भ किया गया
  • 1880 : मनीआर्डर सेवा प्रारंभ की गई
  • 1911 : प्रथम एयरमेल सेवा इलाहाबाद से नैनी डाक से भेजी गई
  • 1935 : इंडियन पोस्टल आर्डर प्रारंभ
  • 1972 : पिन कोड प्रारंभ किया गया
  • 1984 : डाक जीवन बीमा का प्रारंभ
  • 1985 : पोस्ट और टेलिकॉम विभाग प्रथक किये गए
  • 1986 : स्पीड पोस्ट सेवा शुरू
  • 1990 : डाक विभाग मुंबई व चेन्नई में दो स्वचालित डाक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किये गए
  • 1995 : ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत
  • 1996 : मीडिया डाक सेवा का प्रारंभ
  • 1997 : बिजनेस पोस्ट सेवा को प्रारंभ किया गया
  • 1998 : उपग्रह डाक सेवा शुरू
  • 1999 : डाटा डाक व एक्सप्रेस डाक सेवा प्रारंभ
  • 2000 : ग्रीटिंग पोस्ट सेवा प्रारंभ भारतीय डाक शुभकामनाओं वाले लिफाफे ग्राहकों को उपलब्ध कराना
  • 2001 : इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रान्सफर सेवा प्रारंभ
  • 3 जनवरी 2002 : इन्टरनेट आधारित ट्रैक एवं टेक्स सेवा की शुरुआत
  • 15 सितम्बर 2003 : बिल मेल सेवा प्रारंभ
  • 30 जनवरी 2004 : ई-पोस्ट सेवा की शुरुआत
  • 10 अगस्त 2004 : लोजिस्टिक्स पोस्ट सेवा प्रारंभ की गई
जानें, कैसा रहा है अब तक दुनिया में डाक का सफर
  • 255 ईशा पूर्व इजिप्ट के लोगों ने लिखित चिट्ठी भेजने की शुरुआत की।
  • 322-185 ईसा पूर्व भारत में मौर्य काल में डाक द्वारा संदेशों का आदान-प्रदान शुरू हुआ।
  • विश्व में डाक व्यवस्था की शुरुआत करीब चार सौ साल पहले हुई थी। पहले डाक विभाग की स्थापना ब्रिटेन में 1516 में हुई थी, जिसे ‘रॉयल मेल’ के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्यालय लंदन में है।
  • फ्रांस में डाक विभाग की शुरुआत 1576 में ‘ला पोस्ट’ के नाम से की गयी थी, जिसका मुख्यालय वहां की राजधानी पेरिस में है।
  • जून, 1600 में जर्मनी में ‘ड्यूश्च पोस्ट’ नाम से डाक सेवा की शुरुआत की गयी, जिसका मुख्यालय बॉन में है।
  • अमेरिका में ‘यूएस मेल’ नाम से डाक विभाग की स्थापना 1775 में हुई थी।
  • 9 अक्तूबर 1874 को स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ का गठन किया गया था।
  • भारत 1 जुलाई 1876 को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बना। इसकी सदस्यता लेने वाला भारत पहला एशियाई देश था।
  • श्रीलंका में 1882 में ‘श्रीलंका पोस्ट’ के नाम से डाक विभाग की स्थापना हुई, जिसका मुख्यालय कोलंबो में है।
  • विश्व डाक दिवस मनाने की शुरुआत 1969 में हुई थी। 1874 में ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की याद में जापान के टोक्यो में 9 अक्तूबर, 1969 को विश्व डाक संघ का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसी सम्मेलन में ‘विश्व डाक दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की गयी। तभी से प्रतिवर्ष 9 अक्तूबर को ही अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा दिवस मनाया जा रहा है।
  • विश्व में डाक टिकटों का इतिहास करीब 181 वर्ष पुराना है।
  • डाक टिकटों के ऐसे शौकीनों की आज दुनिया भर में कोई कमी नहीं है। अमेरिका के जेम्स रूक्सिन नामक व्यक्ति के पास तो विश्व के प्रथम डाक टिकट से लेकर अबतक के लगभग तमाम दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह है और उनके संग्रह में 40 हजार से भी अधिक डाक टिकट शामिल हैं।
  • डाक टिकटों की विधिवत शुरुआत 6 मई, 1840 को हुई थी, जब एक पैनी मूल्य का विश्व का पहला डाक टिकट जारी किया गया था, जिसे ‘ब्लैक पैनी’ के नाम से जाना गया क्योंकि यह डाक टिकट काली स्याही से छापा गया था।
  • 10 जनवरी 1840 को डाक टिकट का आविष्कार हो गया, जो एक पैनी मूल्य का था लेकिन इसको विधिवत 6 मई 1840 को ही जारी किया गया। इस तरह यह विश्व का पहला डाक टिकट बन गया।
  • ब्राजील में 1843 में, अमेरिका में 1847 में, बेल्जियम में 1849 में और भारत में 1854 में पहली बार डाक टिकट जारी किये गये।

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