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Indian Miracle: भारतीय वैज्ञानिक ने ‘सेल कल्चर’ से मोती बनाकर दुनिया को हैरत में डाला

Indian Miracle

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर दुनिया के लिए भारतीय चमत्कार (Indian Miracle) बनते जा रहे हैं। मोती उत्पादन  के क्षेत्र में एक नहीं कई बार दुनिया को हैरत में डाल चुके हैं। एक बार फिर इस भारतीय वैज्ञानिक ने दुनिया को चौंकाया है। डॉ. अजय कुमार सोनकर ने मोती उत्पादन (Pearl Production) क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। अंडमान और निकोबार के वैज्ञानिक ने इस बार ‘सेल कल्चर’ के माध्यम से शीशे के फ्लास्क में मोती उत्पादन की नयी तकनीक अपनाकर ‘टिश्यू कल्चर’ के शोध में संभावनाओं के नये द्वार खोले हैं। बता दें इससे पहले सोनकर ने दुनिया का सबसे बड़ा काला मोती बना चुके हैं। भगवान गणेश के आकार का मोती विकसित करना उनकी बड़ी उपलब्धियों में एक है।

डॉक्टर सोनकर के इस शोध को  अंतरराष्ट्रीय विज्ञान शोध पत्रिका- ‘एक्वाकल्चर यूरोप’ ने अपने ताजा अंक में जगह दी है। डॉ. सोनकर के अनुसार, किसी भी जीव के इपीजेनेटिक (रहन-सहन) में बदलाव लाकर न सिर्फ दुर्लभ नतीजों को हासिल किया जा सकता है, बल्कि आनुवांशिक विकृतियों का शिकार होने से भी बचाया जा सकता है।

ऐसे हासिल हुई महान उपलब्धि

सोनकर ने इस शोध की शुरुआत बीते साल 2020 में की थी। उस समय वह अंडमान स्थित अपनी प्रयोगशाला से काले मोती बनाने की प्रक्रिया पर काम कर  रहे थे। ‘पिंकटाडा मार्गेरेटिफेरा’ सीप में सर्जरी करके मोती बनाने के लिए जिम्मेदार अंग ‘मेंटल’ को उसके शरीर से अलग कर दिया। इसके बाद वह उस ‘मेंटल टिश्यू’ को फ्लास्क में विशेष जैविक वातावरण में अंडमान के समुद्र से लगभग 2,000 किलोमीटर दूर प्रयागराज स्थित अपने ‘सेल बायोलॉजी’ प्रयोगशाला में ले आये। इस दौरान उन्होंने ध्यान रखा, शरीर से अलग होने के बावजूद ‘मेंटल टिश्यू’ जीवित एवं स्वस्थ रहे। प्रयागराज की प्रयोगशाला में उस ‘मेंटल’ को विशेष जैविक संवर्धन वाले वातावरण में स्थानांतरित कर दिया। उपाय कारगर रहा और कल्चर फ्लास्क में कोशिकाओं का संवर्धन होने लगा। तत्पश्चात ऐसे विशेष पोषक तत्वों की खोज की गयी जिसके द्वारा कोशिकाओं की मोती बनाने के प्राकृतिक गुण को जागृत कराया गया। इस प्रकार समुद्र में रहने वाले सीप के कोख में पलने वाले मोती ने समुद्र से हजारों किमी दूर एक कल्चर फ्लास्क में जन्म ले लिया।

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