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Kota School Controversy: इस निजी स्कूल की किताब में ‘मम्‍मी-पापा’ की जगह पढ़ाया जा रहा ‘अम्‍मी-अब्‍बू’, वेजिटेरियन फैमिली के बच्चे भी अब घर में मांगने लगे बिरयानी  

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Kota School Controversy: कोटा(Kota) की ख़ास पहचान यहां के शिक्षण संस्थान हैं. कोटा को भारत की “कोचिंग राजधानी” भी कहा जाता है. हर साल इस शहर में लाखों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आते हैं. पिछले कुछ सालों में कोटा एक प्रसिद्ध कोचिंग नगरी के रूप में उभरा है. इस कारण कोटा को शिक्षण नगरी की भी उपमा दी जाती है. लेकिन अब यह शहर शिक्षण प्रणाली में दोष को लेकर ही खबरों में है. क्योंकि यहां एक निजी शिव ज्योति कान्वेंट स्कूल की दूसरी क्लास के सिलैबस में मौजूद कंटेट के जरिए शिक्षा के इस्लामीकरण करने (Islamization of Education) का आरोप लगा है.

कान्वेंट स्कूल की किताब है या मदरसे की 

इस प्राइवेट स्कूल की पुस्त्स्क में में उर्दू के शब्दों का ऐसा उपयोग किया गया है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह किसी कान्वेंट स्कूल की किताब की जगह मदरसे की किताब है. यही वजह है कि इसमें मौजूद उर्दू शब्दों की भरमार होने की वजह से बच्चों की आदतों में कुछ बदलाव आने लगा तो सच्चाई पता चलते ही बवाल मच गया.

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बच्चों के दिमाग में भरे जा रहे हैं उर्दू के शब्द

कोटा में बजरंग दल ने कक्षा दो में पढ़ाई जा रही एक पुस्तक पर आपत्ति जताते हुए संभागीय आयुक्त जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की है कि गैर मुस्लिम बच्चों को अम्मी, अब्बू बोलना सिखाया जा रहा है. इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 2 की ये किताब बताई जा रही है, जिसमें शब्दों के रूप में मदर को अम्मी और फादर को अब्बू लिखा गया है. इसी तरह इस किताब में फारुक-बिरयानी जैसे कई शब्द हैं मानों यहां बच्चे सामान्य स्कूली शिक्षा न लेकर उर्दू भाषा का ज्ञान सीखने आए हों. 6 से 7 साल के मासूम बच्चों के दिमाग में बचपन से यहां उर्दू के शब्द भरे जा रहे हैं, अब इसी को लेकर विवाद काफी बढ़ गया है.

वेजिटेरियन परिवारों के बच्चे भी बिरयानी मांगने लगे

जिन पैरेंट्स के बच्चों की आदतों में इस विवादास्पद सिलैबस वाली किताब की वजह से बदलाव आने लगा तो वेजिटेरियन परिवारों के बच्चे भी बिरयानी मांगने लगे. शुरु में जब कुछ बच्चों ने अपने पैरेंट्स को अम्मी-अब्बू कहा तो उन्हें लगा कि स्कूल में किसी मुस्लिम बच्चे के साथ पढ़ने की वजह से वो ऐसा कहने लगा होगा, लेकिन जब उन्होंने इसकी तहकीकात की तो पता चला कि निजी अंग्रेजी स्कूल की दूसरी क्लास की किताब में उर्दू के शब्दों की भरमार है.

बच्चे अब अब्बू, अम्मी कहने लग गए हैं-परिजन 

आरोप है कि  है कि इससे बच्चों को मांसाहारी खाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. परिजनों की शिकायत है कि उनके  बच्चे अब अब्बू, अम्मी कहने लग गए हैं. घर पर बिरयानी बनाने के लिए बोल रहे हैं. बजरंग दल ने  कहा कि कान्वेंट स्कूल में शिक्षा के इस्लामीकरण के लिए ऐसी किताबें चलाई जा रही है. जिसकी वजह से हिंदू समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं. इस तरह की किताबों पर प्रतिबंध लगना चाहिए.

ये भी पढ़ें : Mission 2047of PFI: Patna में पकड़े गए आतंकियों का बड़ा खुलासा, अबतक 8 हजार युवाओं को PFI से जोड़ चुका है मो. जलालुद्दीन

 

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