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निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर ‘आम’ ही नहीं ‘खास’ से भी हो रही लूट, कब कसेगी नकेल

निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर 'आम' ही नहीं 'खास' से भी हो रही लूट, कब कसेगी नकेल

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड – बिहार
चिकित्सा कोई व्यवसाय नहीं, एक सेवा का माध्यम है.आज सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं होने से निजी अस्पताल में जो लूट मची है, उससे देश की गरीब जनता असहाय महसूस कर रही है। निजी अस्पतालों में मरीजों से लूट-खसोट, कोई नई बात नहीं है. निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य की दृष्टि से तो हालात चिंता का विषय है ही, लेकिन ये लूटपाट एवं धन उगाही के ऐसे अड्डे बन गये हैं जो परेशानी का सबब बनते दिख रहे हैं.

राज्यपाल को भी देने पड़े मामूली इलाज के लिए हजारों रुपये 

निजी अस्पताल इलाज के नाम पर आम आदमी को ही नहीं, बल्कि ‘ख़ास’ को भी लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. झारखंड में निजी अस्पतालों की मनमानी के मामले का ताजा उदाहरण सामने आया है. जहां राज्यपाल रमेश बैस को भी मामूली इलाज के लिए हजारों रुपये देने पड़े हैं . बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले राज्यपाल के पोते (भतीजे के बेटे) के पेट में दर्द उठा. जिसके बाद राजभवन के अधिकारियों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां दवा देने के थोड़ी देर बाद ही राज्यपाल के पोते पूरी तरह से ठीक हो गये. लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें 24 घंटे के निगरानी की बात कहकर दो दिनों तक भर्ती रख लिया.

पेट में दर्द की थी शिकायत, रख लिया दो दिन भर्ती

मिली जानकारी के अनुसार राज्यपाल के पोते के पेट में दर्द गैस की वजह से हुआ था. लेकिन निजी अस्पताल ने उसे दो दिन भर्ती रख लिया और उस दो दिन का बिल 51 हजार रुपये थमा दिया. जब इस मामले को अस्पताल प्रबंधन से पूछा गया तो बताया गया किअस्पताल में एक रूम का चार्ज प्रतिदिन आठ हजार रुपये है. और डॉक्टर द्वारा मरीज को देखने के लिए प्रति विजिट आठ सौ रुपये लिये जाते हैं . राज्यपाल के पोते के रूम में डॉक्टर ने चार बार विजिट किया है. जबकि जांच व अन्य खर्च के नाम पर अलग से पैसे लिये गये हैं .

आम आदमी जाये तो कहां जाए

इस तरह की सरेआम लूटपाट इलाज के नाम पर हो रही है. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर चिकित्सा का व्यापार खुलेआम हो रहा है. जब ख़ास बख्शे नहीं जा रहे, तो आम आदमी की बात ही क्या. इलाज के नाम पर आम आदमी जाये तो कहां जाए. शासन- प्रशासन के जिम्मेदारों की उपेक्षाऔर उदासीनता के चलते नर्सिंग होम लूट-खसोट का अड्डा बने हुये हैं. जिनके संचालक भोली- भाली जनता को मौत का भय दिखाकर उनसे मनमाना पैसा वसूल रहे हैं.
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