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मुस्लिम नहीं तो क्या, अल्पसंख्यक तो हैं स्मृति ईरानी, ‘सबसे अल्पसंख्यक’ को मोदी ने दिया अल्पसंख्यक मंत्रालय प्रभार

If not Muslim then what, Smriti Irani is a minority, Modi gave charge

आजादी के बाद पीएम ने बदल दी बड़ी परम्परा

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

मुख्तार अब्बास नकवी के केन्द्रीय मंत्रालय से त्यागपत्र देने के बाद उनका अल्पसंख्यक मंत्रालय प्रभार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा की तेज-तर्रार नेत्री स्मृति ईरानी को सौंपा है। स्मृति ईरानी को अल्पसंख्यक मंत्रालय प्रभार देने पर लोगों को अचरज हो सकता है, क्योंकि भारत में अल्पसंख्यक का मतलब मुस्लिम समुदाय से लिया जाता है, पर ऐसा है नहीं। देश में कई और जातियां हैं जो मुसलमानों की तुलना में काफी कम हैं। 2011 की जनगणना को आधार बनाये तो देश में कुल आबादी के19.3 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे। जिसमें 14.2 प्रतिशत मुसलमान थे। इसके बाद देश की सभी  अल्पसंख्यक जातियों को जोड़ दिया जाये तो वह प्रतिशत 5.106 आयेगा। फिर भी देश में आम से ज्यादा राजनीतिक धारणा यही है कि अल्पसंख्यक का मतलब- मुसलमान। लेकिन स्मृति ईरानी देश के सबसे कम अल्पसंख्यक वर्ग से आती है इसलिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का प्रभार देना ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को सही मायने में चरितार्थ करता है।

अब तक इस मंत्रालय का प्रमुख सबसे बड़े अल्पसंख्यक मुस्लिम वर्ग से ही बनाया जाता रहा है। लेकिन पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए पीएम मोदी ने आजादी के 70 साल बाद पहली बार अल्पसंख्यक मंत्रालय का जिम्मा ‘बेहद अल्पसंख्यक’ जमात से आने वाले को सौंपा है। मुख्तार अब्बास नकवी के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रिपद से इस्तीफा देने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने स्मृति ईरानी को इस मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया। देश में पारसी समुदाय की संख्या अल्पसंख्यकों में सबसे कम है।

हालांकि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी बंगाली परिवार से हैं, लेकिन उन्होंने पारसी समुदाय के जुबिन ईरानी से शादी की है। स्मृति ईरानी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि अपनी पढ़ाई के दौरान एक रेस्तरां में वेट्रेस करने वाली इस नेत्री ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली अमेठी सीट में राहुल गांधी को शिकस्त दी थी। यह उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कई बड़ी शख्सियतें हैं पारसी समुदाय से

भारत में पारसी समुदाय भले की अति अल्प संख्या में है, लेकिन भारतीय समाज में इसकी पहचान बहुत बड़ी है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार देश में पारसी समुदाय मात्र 0.006 फीसदी ही था। फारस (अब ईरान) पर मुस्लिम आक्रांताओं के हमलों से बचने के लिए यह समुदाय से भारत आ गया। देश के नामी उद्योगपति रतन टाटा इसी समुदाय से हैं। शापूरजी-पलोनजी ग्रुप भी पारसी परिवार का ही उद्योग है।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या
  • कुल अल्पसंख्यक – 19.3%
  • मुसलमान – 14.2%
  • ईसाई – 2.3%
  • सिख – 1.7%
  • बौद्ध – 0.7%
  • जैन – 0.4%
  • पारसी – 006%

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