समाचार प्लस
Breaking झारखण्ड देश फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर बिहार

Padma Award: झारखंड और बिहार की विभूतियों को सम्मानित कर बढ़ा पद्म पुरस्कारों का मान

Padma Award

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नयी दिल्ली में दो दिनों तक आयोजित 2020-21 के पद्म पुरस्कारों का वितरण किया। दो वर्षों के घोषित पद्म पुरस्कारों के विजेता इस मौके पर सम्मानित हुए। झारखंड और बिहार की कई विभूतियों का देश ने सम्मान किया। ये विभूतियां ऐसी हैं, जिनके योगदानों का समाज सदैव ऋणी रहेगा। डायन प्रथा के खिलाफ लड़ने वाली झारखंड की छुटनी देवी, नागपुरी गीतकार, गायक सह झारखंड आंदोलनकारी मधु मंसूरी हंसमुख और छऊ गुरु शशधर आचार्य को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया, वहीं बिहार के राजनीति के धुरंधरों दिवंगत जॉर्ज फर्नांडीस को मरणोपरांत पद्मविभूषण और दिवंगत राम विलास पासवान को मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। बिहार से सुजोय के गुहा (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग), बिमल कुमार जैन (सामाजिक कार्य), शांति जैन (कला), डा. शांति राय (चिकित्सा), श्याम सुंदर शर्मा (कला) और वशिष्ठ नारायण सिंह (मरणोपरांत-विज्ञान एवं इंजीनियरिंग) के नाम भी पद्मश्री से सम्मानित होने वालों में शामिल हैं। बता दें, कोरोना महामारी के कारण 2020 में पद्यम पुरस्कार समारोह आयोजित नहीं किया गया था।

छुटनी देवी (झारखंड): पद्मश्री

सबसे पहले बात करते हैं पीड़ित महिलाओं की मसीहा छुटनी देवी की। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के बीरबांस गांव की रहने वाली छुटनी देवी को 25 साल पहले डायन बताते हुए गांव-घर से निकाल दिया गया था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अंधविश्वास और इस कुप्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाती रहीं। छुटनी देवी अब तक 62 महिलाओं को डायन प्रथा के नाम पर होने वाली प्रताड़ना से मुक्‍त करा चुकी हैं। एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस (आशा) के सौजन्य से वह पुनर्वास केंद्र चलाती हैं।

मधु मंसूरी हंसमुख (झारखंड): पद्मश्री

रातू के सिमलिया के रहने वाले मधु मंसूरी को नागपुरी गीतों का राजकुमार कहा जाता है। नागपुरी गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले मधु मंसूरी हंसमुख अपने गीत और मधुर आवाज से देश-विदेश में झारखंड को पहचान दिला चुके हैं। अपनी गीत और मधुर आवाज से वे देश-विदेश में झारखंड को पहचान दिला चुके हैं। मधु मंसूरी हंसमुख ने अपने गीतों के माध्यम से झारखंड की मूल भावना ‘जल, जंगल, जमीन’ बचाने का संघर्ष किया। झारखंड आंदोलन के लिए तो उन्होंने सर्वाधिक गाये। मंसूरी की सुरीली आवाज का जादू केवल झारखंड ही नहीं, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के इलाकों पर भी चलता है। उन्होंने पद्मश्री डॉ रामदलाय मुंडा और पद्मश्री मुकुंद नायक के साथ कई देश-विदेश में प्रस्तुति दी है।

शशधर आचार्य (झारखंड) : पद्मश्री

सरायकेला छऊ से पद्मश्री पाने वाले शशधर आचार्य सातवें गुरू हैं। शशधर आचार्य 50 देशों में छऊ नृत्य की कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। वह दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में छऊ की ट्रेनिंग देते हैं। साथ ही पुणे के नेशनल स्कूल ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में क्लास लेते हैं। यूनेस्को ने छऊ नृत्य को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। इसमें शशधर आचार्य का अहम योगदान है। उन्होंने 50 से अधिक देशों में छऊ परफॉर्म कर झारखंड को विश्व मंच पर स्थापित किया। पद्मश्री सम्मान ग्रहण करने के बाद शशधर आचार्य ने इसे गुरुओं को समर्पित किया।

जॉर्ज फर्नांडिस (बिहार): पद्म विभूषण

जॉर्ज फर्नान्डिस भारतीय राजनेता, श्रमिक संगठन के भूतपूर्व नेता, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने समता मंच की स्थापना की। वह भारत के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में रक्षा मंत्री, संचारमंत्री, उद्योगमंत्री, रेलमंत्री आदि के रूप में कार्य कर चुके हैं। चौदहवीं लोकसभा में जॉर्ज फर्नान्डिस मुजफ्फरपुर से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए थे। वह 1998 से 2004 तक की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की केन्द्रीय सरकार में रक्षा मंत्री थे।

रामविलास पासवान (बिहार): पद्य भूषण

रामविलास पासवान भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वह लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे। वह सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। वह 9 बार लोकसभा सांसद तथा 2 बार राज्यसभा सांसद रहे। पासवान 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़ चुके हैं और उनमें से नौ जीत चुके हैं। रामविलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड भी है।

वशिष्ट नारायण सिंह (बिहार): पद्मश्री

वशिष्ठ नारायण सिंह भारतीय गणितज्ञ थे। वशिष्ठ नारायण सिंह की योग्यता का डंका देश ही नहीं, दुनिया में भी बजा, किन्तु वह युवावस्था में ही मनोविदलता (Schizophrenia) नामक मानसिक रोग से ग्रसित हो गये थे और उनके जीवन का अधिकांश भाग उन्होंने पागल की तरह अपने गांव बसन्तपुर में ही बिताए।

सुजॉय कुमार गुहा (बिहार): पद्यश्री

सुजॉय कुमार गुहा एक भारतीय बायोमेडिकल इंजीनियर हैं। भारत में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के संस्थापकों में से एक, प्रो गुहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्वास इंजीनियरिंग, प्रजनन चिकित्सा में बायोइंजीनियरिंग और ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में जाने जाते हैं।

बिमल कुमार जैन (बिहार): पद्मश्री

समाजसेवी बिमल कुमार जैन एक समाजसेवी हैं, जो हमेशा अंतिम पायदान पर रहने वाले लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं। बिमल जैन भारत विकास विकलांग न्यास के नाम से दिव्यांगों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने 32 हजार लोगों को आर्टिफिशियल अंग लगाये हैं।

डॉ शांति जैन (बिहार): पद्मश्री

‘बिहार गौरव गान’ की लेखिका, चर्चित साहित्यकार व गायिका पद्मश्री डॉ. शांति जैन बहुमुखी प्रतिभा की धनी और बिहार की रचनात्मक जगत में आदरणीया थीं। एचडी जैन कॉलेज आरा में संस्कृत विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त थीं। सन् 1997 में उन्होंने बिहार ‘बिहार गौरव गान’ की रचना की। पिछले 24 वर्षों में देश-विदेश में इसकी तीन हजार से अधिक प्रस्तुतियां हुई हैं। उनकी तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। 1983 में पहली पुस्तक ‘चैती’ के लिए इन्हें राजभाषा सम्मान मिला।

डॉ शांति रॉय (बिहार): पद्मश्री

डॉ शांति रॉय एक भारतीय महिला चिकित्सक हैं। वह बिहार के गोपालगंज जिले की भूमिहार परिवार से हैं। वह पहले सीवान में रहकर चिकित्सा का कार्य करती थी, लेकिन अब बिहार की राजधानी पटना मे रह कर चिकित्सा का कार्य करती है ।

श्याम शर्मा (बिहार): पद्मश्री

श्याम शर्मा वरिष्ठ चित्रकार थे। इन्हें कला में कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। उन्होंने अनेक कला शिविर और कला-प्रदर्शनियों में भी भाग लिया था। वहराज्य ललित कला अकादमी के सदस्य भी रह चुके थे। उन्होंने एक्रिलिक सहित विभिन्न मीडियम में काम किया। उनका जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

यह भी पढ़ें: कहानी पाकिस्तान की उस लड़की की…जिसे दुनिया Malala Yousafzai कहती है

Related posts

घाटी छोड़ घर भाग रहे प्रवासी मजदूर, कश्मीर से घर जा रहे लोगों ने बयां किया वो दर्दनाक मंजर

Manoj Singh

झारखंड : क्यों उठ रही है जातिगत जनगणना की मांग, आखिर क्या हैं इसके सियासी मायने? 

Manoj Singh

Ujjwala Yojana 2.0: PM मोदी ने Launch की Ujjwala Yojana 2.0, अब नहीं चाहिए Address Proof

Nidhi Sinha

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.