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ऐतिहासिक भूल सुधार! ‘काकोरी कांड’ नहीं अब ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’, योगी सरकार ने बदला नाम

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आजादी के इतने वर्षों के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आधुनिक भारत का इतिहास लिखने वालों की एक ‘ऐतिहासिक भूल’ का सुधार किया है। स्वतंत्रता संग्राम की चर्चित घटनाओं में ‘काकोरी कांड’  (Kakori conspiracy) को भला कौन भूल सकता है? लेकिन ‘काकोरी कांड’ कहने से एक अपमान का बोध होता है। योगी सरकार ने ‘काकोरी कांड’ का नाम बदलकर ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’ कर दिया है। यह आजादी के दीवानों के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है।

दरअसल, ‘काकोरी कांड’ शब्द ब्रिटिश कालीन इतिहासकारों की देन है। उन्होंने ही भारत के स्वतंत्रता-संग्राम से जुड़ी इस महत्वपूर्ण घटना के नाम में ‘कांड’ जोड़ दिया था, जो अपमान की भावना को दर्शाता है। हालांकि देश के आजाद होने के इतने वर्षों के बाद भी भारत में इस ओर न तो किसी सरकार का ध्यान गया और ही भारतीय इतिहासकारों का। आज अगर यह नाम बदला गया है तो इसके लिए योगी सरकार की सराहना की जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने काकोरी की घटना को ‘ट्रेन एक्शन डे’ करार दिया है और ‘कांड’ शब्द को हमेशा के लिए मिटा दिया है।

क्या है ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’?

देश आज स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने की दहलीज पर है। यह स्वतंत्रता हमें अनगिनत क्रांतिकारियों के बलिदानों से मिली है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इन क्रांतिकारियों ने कई आंदोलन चलाए। इन्हीं में एक है- ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’। 9 अगस्त, 1925 को घटित काकोरी ट्रेन एक्शन के सूत्रधार थे हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी और रोशन सिंह।

काकोरी घटना भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की इच्छा से हथियार खरीदने के लिए सरकारी खजाना लूट लेने की एक ऐतिहासिक घटना थी। शाहजहांपुर की बैठक में राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनायी थी। इस योजना के अनुसार दल के ही एक प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त 1925 को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी ‘आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन’ को चेन खींच कर रोका और क्रान्तिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खां, पंडित चन्द्रशेखर आजाद व छह अन्य सहयोगियों की सहायता से समूची ट्रेन पर धावा बोलते हुए सरकारी खजाना लूट लिया। बाद में अंग्रेजी सत्ता हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के कुल 40 क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने व यात्रियों की हत्या करने का प्रकरण चलाया जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां तथा ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनायी गयी। इस प्रकरण में 16 अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम 4 वर्ष की सजा से लेकर अधिकतम काला पानी (आजीवन कारावास) तक का दंड दिया गया था।

बता दें, ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ की घटना में क्रांतिकारियों के हाथ केवल 4600 रुपये लगे थे, लेकिन अंग्रेजों ने इस घटना से जुड़े सभी क्रांतिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में 10 लाख रुपये खर्च किए थे।

यह भी पढ़ें : मोदी सरकार के ‘आरक्षण बिल की चाल’ में विपक्ष को चित करने की कितनी धार

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