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हिंदी दिवस 2022: समारोहों व कार्यक्रमों तक ही सिमट कर रह गई है राष्ट्र भाषा?

image source : social media

Hindi diwas : हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हमारी राजभाषा भी है. 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है. इस दिन स्कूल-कॉलेज में भाषण, निबंध और डिबेट जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. दरअसल, 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था. तभी से इस दिन को राष्ट्रीय हिंदी दिवस (Hindi diwas) के नाम से मनाया जाने लगा. लेकिन देखा जाए तो हिंदी दिवस महज औपचरिकता बनकर रह गया है. यह सिर्फ समारोहों व कार्यक्रमों तक सीमित रह गई है. आवश्यकता इस बात की है प्रत्येक दिन को हम हिंदी दिवस समझें.

दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली चौथी भाषा

हिंदी भाषा का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) में है. इसके अनुसार भारत की राजभाषा ‘हिन्दी’ और लिपि देवनागरी है. ‘हिंदी’ शब्द से जुड़ी एक दिलचस्प बात ये है कि ये शब्द फारसी भाषा का है. फारसी में हिंदी का अर्थ होता है- ‘सिंधु नदी की भूमि’. हिंदी भाषा मंडेरिन, स्पेनिश और अंग्रेजी के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली चौथी भाषा है. वहीं भारत की 77 फीसदी आबादी हिंदी बोलती और समझती है.

 ‘हीन भावना से ग्रसित रहते हैं हिंदी बोलने वाले’

भारत और अन्य देशों में 80 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि हिंदी बोलने वाले हीन भावना से ग्रसित रहते हैं. वहीं अंग्रेजी माध्यम स्कूल से पढ़ा लिखा आज का युवा वर्ग जो बड़ी -बड़ी कंपनी में नौकरियां कर रहा है, उसे आज के समय में न तो हिंदी का कोई भविष्य, न ही हिंदी में अपना भविष्य दिखाई देता है, वह इस भाषा को अपनी शान समझता है , जिससे वर्ग विभाजन की स्थिति बन जाती है. हिंदी बोलने वालों के मन में हमेशा इस बात को लेकर संशय बना रहता है कि कहीं बात करते वक्त मुंह से हिंदी न निकल जाए और  इससे शर्मिंदगी महसूस हो.

इंग्लिश बोलने पर गर्व अनुभव करते हैं लोग 

आज हमारे देश में देखा जाता है कि बच्चा अगर अंग्रेजी में गिनती जानता है, लेकिन हिंदी में उसे गिनती नहीं आती, तो उनके पेरेंट्स इस पर काफी गर्व का अनुभव करते हैं, और बहुत शान से लोगों को बताते हैं कि उनका बच्चा इंग्लिश में ही सिर्फ संख्या जानता है. इससे गौरवान्वित नहीं होना चाहिए, ऐसा कर हम स्वयं अपनी मातृभाषा को कमजोर करते हैं, जब तक हम स्वयं अपने मातृभाषा का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक हम इसे सम्मान नहीं दिला पायेंगे.

 शहरी और अमीरों की भाषा मानी जाती है अंग्रेजी 

भारत में अंग्रेजी बोलने वाला वर्ग धनी और शिक्षित है. इसलिए इसे आमतौर पर देश में अंग्रेजी को धनी और शिक्षित वर्ग की भाषा माना जाता है. क्योंकि साधन संपन्न लोग ही महंगे अंग्रेजी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम स्कूल से शिक्षा लेते हैं.लेकिन फिर भी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी ही है.

यहां के लोग ही हिंदी से मुंह मोड़ रहे हैं

हिंदी ऐसी भाषा जिसे विदेशों से लोग सीखने के लिए देश में आते हैं,  परंतु यहां के लोग ही उससे मुंह मोड़ रहे हैं. हिंदी देश की 80 करोड़ लोगों की भाषा है. लेकिन यह केवल संपर्क भाषा व बाजार की भाषा बनकर रह गयी है. यही इसका दुर्भाग्य है. यह न तो विज्ञान की भाषा बन सकी है, न यांत्रिकी की भाषा बन सकी है, न कानून की भाषा बन सकी है न चिकित्सा की ही भाषा बन सकी है. हिंदी को अभिजात्य वर्ग हे दृष्टि से देखता है. इस कारण आज तक हम भाषायी लकीर को नहीं तोड़ पाये. हमारी कोशिश सिर्फ यही रही है कि अंग्रेजी सीख कर हम भी अभिजात्य वर्ग में शामिल हो गये और लकीर यथावत बनी रह गयी. अंग्रेजी बोलने वाले चार फीसदी लोग ही देश में हैं. बाकी लोग अंग्रेजी सीखकर बराबरी का दर्जा पाना चाहते हैं.

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