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Hemant soren अयोग्य हुए तो भी झारखंड में रहेगी यूपीए सरकार! 5 को विश्वास मत का दांव खेल सकते हैं सोरेन

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Jharkhand Political Crisis: झारखंड में सियासी संकट के बीच पांच सितंबर को झारखंड कैबिनेट (Jharkhand cabinet) ने विधानसभा का पांच सितम्बर को एक दिन का विस्तारित मानसून सत्र बुलाया है। इसमें हेमंत सोरेन सरकार (Hemant soren govt) विश्वास मत हासिल कर सकती है। हालांकि सरकार ने इस सत्र को बुलाने का कोई एजेंडा स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन संभावना जताई जा रही है कि सरकार उस दिन विश्वास मत प्रस्ताव पेश कर सदन में अपना बहुमत साबित करने और विश्वास मत हासिल करने की प्रक्रिया पूरी करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

महागठबंधन की एकजुटता 

सदन में राज्य के वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम, हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के बीच सियासी घमासान, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, स्थानीय नीति के साथ एससी, एसटी व ओबीसी का आरक्षण बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा कराई जा सकती है।संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को बताया कि विशेष सत्र के दौरान राज्य में जारी सियासी ऊहापोह की स्थिति के बीच सदन को विश्वास दिलाया जाएगा कि महागठबंधन एकजुट है और राज्य के विकास के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है।

सिर्फ एक दिन का होगा विशेष सत्र 

मंत्री आलमगीर आलम ने कहा है कि मानसून सत्र के दौरान एक दिन पहले सदन की कार्यवाही के अवसान के निर्णय को कैबिनेट ने स्थगित कर दिया। अब पांच सितंबर को एक दिन का विशेष सत्र आहूत किया गया है। सरकार के फैसले के तहत 11 बजे से विशेष सत्र आयोजित होगा जो सिर्फ एक दिन का होगा। सरकार की ओर से सत्र के एजेंडे की स्पष्ट रूप से जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि विशेष नियम के तहत स्पीकर से आग्रह कर सत्र आहूत किया गया है।

हेमंत अयोग्य हुए तो भी रहेगी सरकार यूपीए

सियासी संकट के बीच गुरुवार को महागठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राज्यपाल को 34 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ सौंपे ज्ञापन में मांग की गई कि यदि हेमंत सोरेन की सदस्यता पर आयोग का मंतव्य आया है तो राजभवन जल्द स्थिति स्पष्ट करें। मुख्यमंत्री की अयोग्यता अगर सामने आती है तब भी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि, झामुमो-कांग्रेस-राजद-निर्दलीय गठबंधन को राज्य विधानसभा में प्रचंड बहुमत है।

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…तो अगले छह माह तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लिया जा सकता

दरअसल एक बार सदन से विश्वास मत हासिल कर लेने के बाद यदि हेमंत सोरेन  विधायकी से अयोग्य हो जाते हैं तो तो वो यह दावा करेंगे कि फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित हो चुका है और ऐसे में फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर रोका नहीं जाना चाहिए। एक बार विश्वास मत हासिल कर लेने पर अगले छह माह तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लिया जा सकता।

राज्यपाल की मंजूरी के बिना विशेष नियम से बुलाया सत्र

सरकार ने जो विशेष सत्र बुलाया है, इसके लिए राज्यपाल से अनुमति नहीं ली गई है। यह विशेष नियम के तहत स्पीकर से आग्रह कर आहूत किया गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने इसी नियम के तहत कैबिनेट की अनुशंसा पर सत्र के लिए स्पीकर को आग्रह किया है। बता दें कि गुरुवार को यूपीए का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला था। राज्यपाल ने इसे आयोग के मंतव्य पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। समझा जा रहा है कि इसी के बाद सरकार वैकल्पिक तैयारी में जुट गई है। इसी कवायद के तहत विशेष सत्र बुलाया गया है ताकि सरकार सदन का विश्वास हासिल कर सके।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

संविधान विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी सरकार एक दिन के सत्र में बहुमत साबित कर सकती है.एक बार विश्वास मत हासिल करने के बाद छह माह तक दोबारा विश्वास मत हासिल करने की आवश्यकता नहीं होगी. अगर राज्यपाल के आदेश के बाद सीएम की विधानसभा से सदस्यता जाती भी है, तो हेमंत सोरेन स्वंय या किसी अन्य व्यक्ति को सीएम बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।

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