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झारखण्ड

गुड़िया के सोने हो गए मिट्टी, गोबर से सने हाथ…. जानिए तीरंदाज गुड़िया की कहानी

जहां की धरती खनिज संपदाओं से भरी पड़ी है. जहां की भूमि ने देश को महेंद्र सिंह धोनी, दीपिका कुमारी जैसे खिलाड़ी दिए हैं, उसी धरती पर आज भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो झारखण्ड को देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिलाने का हुनर रखते हैं, लेकिन अफ़सोस खेल के मैदान में अपने हुनर का जलवा बिखरने वाले हाथ मजदूरी करने को मजबूर है।

निशाना भेदने वाले हाथ आज उठा रहे गोबर

गुड़िया की बहन प्रीति ने बताया कि उसने सपना देखा था कि वह अपने देश के लिए निशाना लगाए।  दो बेटी और दो बेटों वाले इस परिवार में गुड़िया खेल के मैदान में कमाल करने के इरादे से उतरी थी, मगर  गरीबी, मुफलिसी और मज़बूरी ने धनुष पर तीर लगा कर निशाना भेदने वाले हाथ को आज गोबर उठाने पर मजबूर कर दिया। गरीबी और मजबूरी ने अर्जुन की तरह अपने निशाने पर नजर टिकाने वाली आंखों को आज दो वक़्त की रोटी  जुगाड़ करने पर विवश कर दिया है।

यादें बन कर रह गयीं उपलब्धियां

झारखण्ड की गोल्डन गर्ल की राह में आगे बढ़ने का सपना संजोये गुड़िया घर से मजबूत हौसलों के साथ निकली थी। मगर उसके रास्ते कांटे भरे थे ।  पिता की तबीयत बिगड़ने से उसके घर में दो वक़्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया। मजबूर होकर गुड़िया को धनुष छोड़  कुदाल और कढ़ाई थामना पड़ा। किसी के खेत में धान रोपने से लेकर खटाल में गोबर उठाने का काम उसे मिलने लगा और गुड़िया के सपने चकनाचूर हो गये।

उपलब्धियां
इन प्रतियोगिताओं में लहरा चुकी है परचम
एआई यूनिवर्सिटी खेल 2017 में प्रथम
39वीं जूनियर नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप 2016 प्रतिभागी
37वीं सब जूनियर नेशनल आर्चरी चैपियनशिप 2016 द्वितीय
विनोभा भावे यूनिवर्सिटी 2017 प्रतिभागी

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