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ग्रुप कैप्टन (Group Captain) “अभिनन्दन वर्धमान (Abhinandan Varthaman) का हुआ वीर चक्र से अभिनन्दन”

"Abhinandan Vardhmaan felicitated with Vir Chakra"

देश की ‘आन बान और शान के लिए जो अपनी जान की बाज़ी लगा दे, वो योद्धा कहलाते हैं । एक ऐसे ही योद्धा हैं जांबाज़ अभिनन्दन वर्धमान। अभिनन्दन वर्धमान जो बतौर ग्रुप कैप्टन हैं उन्हें अपनी वीरता का पुरस्कार मिल चुका है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के द्वारा अभिनन्दन वर्धमान आज वीर चक्र से नवाज़े गए हैं। दरअसल ये उपलब्धि उन्हें पकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए मिली है।

दुनिया में भारत की एक अलग छवि बनायी

ये घटना पकिस्तान पर जवाबी हमले के दौरान हुआ था। 14 फरवरी 2019 को आतंकवादियों ने पुलवामा पर हमला कर दिया था। इसमें लगभग 40 जवान वीर गति को प्राप्त हो गए थे। वायुसेना ने 12 दिनों बाद यानी 26 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot Airstrike) के बाद पकिस्तान के f-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। इस दौरान विंग कमांडर अभिनन्दन का विमान mig-21 क्रैश हो गया था। जिसकी वजह से वो पीओके (POK) जा पहुंचे थे। इसके बाद वो तीन दिनों तक पकिस्तान के कब्ज़े में रहे थे। ज़मीन पर गिरने के बाद उन्हें अज्ञात ही नहीं हुआ की वे कहाँ है लेकिन जैसे ही उन्हें इस बात का आभास हुआ की वे पकिस्तान में है तो उन्होंने अपने पास मौजूदा डाक्यूमेंट्स तालाब में फ़ेंक दिए थे। बाकी बचे कागजात को उन्होंने निगल लिया। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद अपने देश से जुडी अहम् जानकारी अपने दुश्मनो से बचाना था। भारत सरकार के दाबाव की वजह से पकिस्तान को अभिनन्दन को वापस भारत को सौपना पड़ा।

इन्हे भी मिला सम्मान

राष्ट्रपति भवन में आयोजित वीर जवानों के सम्मान समारोह में कोर ऑफ इंजीनियर्स के सैपर प्रकाश जाधव (Prakash Jadhav) को जम्मू कश्मीर के एक ऑपरेशन में आतंकवादी को मार गिराने पर मरणोपरांत से अभिनन्दन किया गया। वही मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल (Major Vibhuti Shankar Dhoundiyal ) को भी एक ऑपरेशन में उनकी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाने के लिए मरणोपरांत से नवाज़ा गया।

क्या है वीर चक्र ???

वीर चक्र भारत के युद्ध के दौरान वीरता का पदक है। ये सम्मान उन्हें दिया जाता है जिन सैनिकों ने देश के प्रति अपना बलिदान किया हो या विशेष वीरता दिखाई हो। यह तीसरा बड़ा भारतीय सैन्य पुरस्कार (Indian Military Award) है। इस पुरस्कार की स्थापना 26 जनवरी 1950 को की गयी थी। ये पुरस्कार परम वीर चक्र (Param Vir Chakra) और महा वीर चक्र (Maha Vir Chakra) के बाद आता है।

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