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सीएम हेमंत से जुड़ी चुनाव आयोग की चिट्ठी पर बोले राज्यपाल Ramesh Bais, झारखंड में कभी भी फूट सकता है ‘एटम बम’

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झारखण्ड के राज्यपाल रमेश बैस (Ramesh Bais) ने गुरुवार को रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा है कि मुख्यमंत्री ( CM Hemant Soren) के खनिज लीज से जुड़े मामले में चुनाव आयोग (election commission) की राय पर वह सेकंड ओपिनियन ले रहे हैं. उन्होंने कहा ओपिनियन आने के बाद निर्णय लूंगा कि क्या करना है, वैसे दिल्ली में तो पटाखे पर प्रतिबन्ध है, पर झारखण्ड में नहीं. हो सकता है एकाध एटम बम फूट जाए, राज्यपाल ने निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि झारखण्ड के राज्यपाल के रूप में जब मैं वहां गया तो मुझे वहां की राजनीति के बारे में जानकारी मिली. मुझे एक मामले की जांच के लिए आवेदन मिला वह चुनाव से सम्बंधित था. इसलिए मैंने उस पात्र को चुनाव आयोग के पास भेजा कि आप मुझे इस पर अपना मंतव्य दीजिए.

सेकंड ओपिनियन आने के बाद ही निर्णय लूँगा

ओपिनियन आने के बाद राज्यपाल बाध्य नहीं है कि वह कब आर्डर करें या चुनाव आयोग ने अपना मंतव्य दिया है तो उसका पालन करें। यह राज्यपाल के अधीन आता है, लेकिन जबतक राज्यपाल  संतुष्ट न हो जाएं, तबतक आर्डर करना ठीक नहीं है. राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने सेकंड ओपिनियन के लिए मामले को भेजा है. सेकंड ओपिनियन आने के बाद ही निर्णय लूँगा कि मुझे क्या करना है।

आदेश की प्रतिलिपि देने का प्रावधान नहीं है!
निजी चैनल से बातचीत में  राज्यपाल ने कहा कि जो होना है, वह होगा। मीडिया में कई अटकलें लगाई गईं। मेरे पास झामुमो का प्रतिनिधिमंडल आया। उसने आयोग के पत्र की कॉपी मांगी। आदेश की प्रतिलिपि देने का प्रावधान नहीं है। इस संबंध में अपील को आयोग ने भी अस्वीकार कर दिया।

सरकार को अस्थिर करने की कोई मंशा नहीं

सत्तापक्ष के आरोपों और रायपुर में झारखंड के विधायकों को रखने से जुड़े सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि सरकार को अस्थिर करने की अगर उनकी मंशा होती तो आयोग की सिफारिश पर निर्णय ले चुके होते। लेकिन वह बदला लेने या बदनाम करने की भावना से काम नहीं करते। वह संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें संविधान की रक्षा करनी है। यही कारण है कि उन्होंने चनाव आयोग से सेकेंड ओपिनियन मांगा है। ऐसा इसलिए भी किया कि कोई उनपर अंगुली न उठाए।

मुख्यमंत्री और सरकार का प्रतिनिधिमंडल मिल चुका

हाल के दिनों में मुख्यमंत्री, झामुमो, यूपीए प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से आयोग के मंतव्य की प्रति मांग चुके हैं। सीएम ने वकीलों के माध्यम से भी मंतव्य की जानकारी मांगी थी। लेकिन, आयोग ने इसे दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच का मामला बताते हुए देने से मना कर दिया। यूपीए के विधायक दल ने पत्रकार वार्ता कर यहां तक आशंका जाहिर कर दी है कि राज्यपाल फैसला लेने में देरी कर विधायकों की खरीद फरोख्त को हवा दे रहे हैं। इसके बाद राज्यपाल ने एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा था कि आयोग का लिफाफा इतना जोर से चिपका है कि खुल ही नहीं रहा है। सीएम ने हाल में पत्रकारों से वार्ता के दौरान यहां तक कहा कि यदि वह दोषी हैं तो उन्हें सजा दी जाए।

अलग-अलग पार्टियों ने दी ऐसी प्रतिक्रिया 

राज्यपाल के हालिया बयान को लेकर झारखंड की अलग-अलग पार्टियों की ओर से प्रतिक्रिया आई है।  दोबारा मंतव्य मांगना संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, लगता है कि मामले को मैन्युप्लेट करने की साजिश चल रही है- झामुमो नेता विनोद कुमार पांडेय

राज्यपाल का निर्णय संवैधानिक कार्य है। इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं। सभी पार्टियों को संवैधानिक निर्णयों का सम्मान करना चाहिए- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश

राज्यपाल संवैधानिक पद पर हैं। उन्हें जितना ओपिनियन लेना है लें, पर मीडिया में बयानबाजी ना करें। राजभवन को सियासी अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए- कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन

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