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देश में पहली बार दौड़ी एल्युमिनियम रैक की मालगाड़ी, रेलवे ने गिनाये कई फायदे

The goods train of aluminum rake ran for the first time in the country, railways counted many benefits

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को देश में एल्युमीनियम मैटल से बने रैक वाली मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मालगाड़ी के सभी डिब्बे एल्युमिनियम से बने हैं। बेस्को लिमिटेड वैगन डिवीजन और हिंडाल्को के सहयोग से ये एल्युमिनियम के वैगन तैयार किये गये हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हरी झंडी दिखाकर मालगाड़ी को रवाना करते हुए बताया कि  एल्युमिनियम रैक स्टील रैक की तुलना में 3.5 टन हल्के हैं, लेकिन इनकी भार क्षमता ज्यादा है। ये रैक 180 टन अतिरिक्त भार ढो सकते हैं। हल्के होने की वजह से समान दूरी के लिए मालगाड़ी की गति में वृद्धि होगी, जिससे बिजली की खपत कम होगी। एलुमिनियम रैक ईंधन की बचत करने के साथ कार्बन उत्सर्जन भी कम उत्सर्जित करेंगे। भारतीय रेलवे के अनुसार, एक एल्युमिनियम रैक अपने सेवाकाल में करीब 14,500 टन कम कार्बन उत्सर्जन करेगा।

लागत ज्यादा, मेंटेनेंस कम

रेलवे के अनुसार, एल्युमिनियम रैक सामान्य स्टील रैक से 35 फीसदी महंगे जरूर हैं, इसकी मेंटनेंस कॉस्ट भी कम है, क्योंकि इसमें जंग लगने और घर्षण होने की सम्भावना कम है। एल्युमिनियम रैक की एक बड़ी खासियत यह है कि इनकी उम्र स्टीट के रैक की तुलना में 10 साल ज्यादा है। रीसेल वैल्यू में स्टील के रैक से बेहतर हैं। रिटायर होने के बाद एल्युमिनियम रैक की रीसेल वैक्यू 80 फीसदी है। क्योंकि इसका पूरा स्ट्रक्चर एल्युमिनियम का है. एल्युमिनियम रैक की उम्र भी स्टील रैक से दस साल ज्यादा है।

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