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Goodfellows: बुजुर्गों का ख्याल रखेंगे रतन टाटा, 25 वर्षीय युवा के आइडिया भाया निवेश कर स्टार्टअप किया लॉन्च

Goodfellows: Ratan Tata will take care of the elderly, 25-year-old youth's startup launch

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा ने देश में अकेले जी रहे करोड़ों बुजुर्गों की पीड़ा कम करने का बीड़ा उठाया है। उनकी कम्पनी में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत एक युवा का आइडिया इतना भाया कि उन्होंने उसमें निवेश कर स्टार्टअप को लॉन्च भी कर दिया। शायद उन्होंने बुजुर्गों के अकेलेपन और दर्द को बखूबी समझा है। इसीलिए देश के करोड़ों बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने के लिए उन्‍होंने बड़ा कदम उठाया है। फिलहाल इसकी शुरुआत मुम्बई में हो चुकी है, आगे यह देश के दूसरे हिस्सों में शुरू किया जायेगा।

रतन टाटा ने बुजुर्गों की मदद करने वाला स्टार्टअप गुडफेलोज (Goodfellows) लॉन्च कर दिया है। इस मौके पर उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक आप अकेले होकर समय बिताने के लिए मजबूर नहीं होते, आपको इस बात का एहसास नहीं हो पाता कि अकेलापन कितना बुरा होता है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 1.5 करोड़ बुजुर्ग ऐसे हैं जो अकेले रहने को मजबूर हैं। क्योंकि उनका परिवार या तो साथ नहीं रहता या है ही नहीं। उन्होंने इस स्‍टार्टअप की शुरुआत करने वाले उत्साही युवा उद्यमी शांतनु की सराहना भी की।

Goodfellows स्‍टार्टअप की शुरुआत करने वाले 25 वर्षीय शांतनु नायडु टाटा कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। अपने बॉस रतन टाटा को अपना आदर्श और मार्गदर्शक मानने वाले शांतनु ने लोगों की सेवा को अपना उद्देश्य बनाया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने इस स्टार्टअप की शुरुआत की। शांतनु का कहना है कि इस स्‍टार्टअप का आइडिया रतन टाटा को देखकर आया है। इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई पूरी करने वाले शांतनु ने इससे पहले स्‍ट्रीट डॉग्‍स के लिए भी मोटापॉस नाम का एक स्‍टार्टअप शुरू किया था। इसके तहत आवारा कुत्तों के गले में एक कॉलर बांधा जाता था, ताकि उनकी निगरानी आसानी से की जा सके।

Goodfellows स्‍टार्टअप से ऐसे मिल पायेगी बुजुर्गों को मदद

स्‍टार्टअप का बुजुर्गों को मदद पहुंचाने का तरीका भी बड़ा रोचक है। स्टार्टअप से जुड़ने वाले युवा बुजुर्गों के साथ समय व्यतीत कर उन्हें सहारा देंगे। परन्तु इस स्टार्टअप में युवाओं की भर्ती प्रक्रिया को आसान नहीं बनाया गया है। यह विषय ऐसा है इसमें काफी संवेदनशील युवाओं की जरूरत है। इसमें ऐसे युवाओं की ही भर्ती की जा रही है, जिनमें बुजुर्गों के इमोशन्स को समझने की क्षमता हो। ये युवा उनके छोटे-मोटे कामों में सहायता करेंगे, उनके साथ कैरम या दूसरे रोचक खेल खेलेंगे, साथ बाहर घूमने जायेंगे और साथ में रह कर उनसे बातें कर उनका एकांतपन दूर करेंगे। इस स्टार्टअप में युवाओं को अच्‍छा वेतन तो मिलेगा, इसकी भर्ती प्रक्रिया काफी संवेदनशील होगी।

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