संसद का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के संबोधन के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई। इसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में आर्थिक सर्वे पेश किया। जिसमें उन्होंने चालू वित्तवर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास की रफ्तार 6.3 से 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी है। इसके साथ ही वित्तमंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में 11 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान भी लगाया है। वित्तमंत्री के अनुसार जीएसटी संग्रह 10.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त मंत्री ने और क्या-क्या कहा?
- निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जो वित्त वर्ष 2021 के मध्य से गति पकड़ रहा है और महामारी से पहले की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।
- 2030 तक गैर-कृषि क्षेत्र में हर साल औसतन 78.5 लाख नौकरियों के मौके पैदा होंगे।
- खुदरा महंगाई के लक्षित दर पर बने रहने की उम्मीद है।
- चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वित्त वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों में सर्विस क्षेत्र के निर्यात में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत प्रदर्शन हुआ है।
- 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के लिए अगले एक से 2 दशक तक 8 प्रतिशत की दर से आर्थिक विकास करना होगा।
- रेलवे, एयरपोर्ट जैसे बुनियादी ढांचों में प्रगति बरकरार है।
- सरकार को नवाचार पर ध्यान देना चाहिए। सरकार को अपने रास्ते से हटना और व्यव्सायों को अपने कोर मिशन पर ध्यान देना चाहिए।
- वित्त वर्ष 2020 और 2025 के बीच मुख्य आधारभूत क्षेत्रों में सरकार का पूंजीगत व्यय 38.8 प्रतिशत बढ़ा।
- विपरीत वैश्विक परिस्थितियों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते संरक्षणवाद पर काबू पाते हुए माल और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि से भारत के निर्यात में 6 प्रतिशत वृद्धि।
- अपनी युवा, सक्रिय और तकनीक के मामले में कुशल जनसंख्या के दोहन के द्वारा भारत में ऐसा कार्यबल तैयार करने के क्षमताएं हैं, जो अपने कार्य निष्पादन और उत्पादकता में सुधार के लिए एआई का उपयोग कर सकता है।
- देश के विभिन्न राज्यों में औद्योगीकरण का स्तर अलग-अलग, कुछ राज्य अपनी आबादी के लिए उच्चतर आय स्तर सृजित करने के लिए अपने औद्योगिक क्षेत्रों का बेहतर उपयोग करने की स्थिति में है।
- सरकार देशभर में एमएसएमई क्लस्टर विकसित करने के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यम-क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) लागू कर रही है।
- भारत के श्रम बाजार संकेतकों में हाल ही के कुछ वर्षों में काफी सुधार हुआ है।
- आर्थिक समीक्षा @2047 तक भारत के अवसंरचनात्मक निर्माण में निजि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी को रेखांकित करता है।
- वित्त वर्ष 2025 के दौरान यातायात, परिवहन और सड़क संपर्क सुविधा में बढोतरी जारी रही।
- मुद्रास्फीति, वित्त वर्ष 2024 के 5 दशमलव 4 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 4 दशमलव 9 प्रतिशत पर आयी।
- सेवा क्षेत्र के योगदान से सकल मूल्यवर्धन-जीवीए वित्त वर्ष 2014 में 50.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 55.3 प्रतिशत हुआ।
- भारतीय अर्थव्यवस्था ने स्थिर ऋण वृद्धि दर्शायी; बैंकों ने उच्च लाभप्रदता व कम एनपीए दर्ज की।
- भारत के कृषि क्षेत्र ने लचीलापन दर्शाया, वित्त वर्ष 2017 से 2023 के दौरान औसत 5 प्रतिशत वृद्धि दर दर्ज।
- सिंचाई क्षेत्र का कवरेज वित्त वर्ष 2025-16 और वित्त वर्ष 2020-21 के बीच सकल फसली क्षेत्र 49.3 प्रतिशत से बढ़कर 55 प्रतिशत हुआ।
- मार्च 2024 तक 7 करोड़ 75 लाख किसान क्रेडिट कार्ड चलन में।
- ग्रामीण क्षेत्रों में समान एवं समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर सरकार का विशेष ध्यान।
- सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से निम्न आय वाले परिवारों में उपभोग और आय के सृजन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ीं, असमानता घटने से जीवन शैली पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव।
- वित्तवर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2022 के बीच देश में स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च में सरकार की हिस्सेदारी 29.0 प्रतिशत से बढ़कर 48.0 प्रतिशत हो गई।
- भारत की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली 14.72 लाख विद्यालयों में 98 लाख शिक्षकों के साथ 24.8 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करती है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को अपनाना, मजबूत मांग सृजित करने के लक्षित उपाय और पर्याप्त वित्तपोषण के विकल्प।
न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार
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