समाचार प्लस
Breaking झारखण्ड देश फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर

Gandhi Jayanti 2022: महात्मा गांधी का झारखंड से था विशेष नाता, बिखरी पड़ी हैं यहां उनकी यादें

image source : social media

Gandhi Jayanti 2022: आज महात्मा गांधी (Mahatma gandhi)की जयंती है। पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। झारखंड से महात्मा गांधी की बहुत सारी यादें बिखरी पड़ी हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1917 से 1940 के बीच बापू 12 बार झारखंड (तब एकीकृत बिहार) आए। केवल रांची ही नहीं, बल्कि कई शहरों, गांव और कस्बों में जाकर आम लोगों और आदिवासियों से मिले। झारखंड  की परंपराओं से वो प्रभावित थे। उन्होंने कुछ मौके पर यहां के आदिवासी समाज और परंपराओं की प्रशंसा भी की। महात्मा गांधी सबसे पहले चंपारण आंदोलन को लेकर 4 जून 1917 को रांची आए थे। 29 मई 1917 को एक सरकारी पत्र में बिहार-ओडिशा के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर एडवर्ड अलबर्ट गेट से 4 जून को मिलने को कहा गया था। 4 जून 1917 को गांधीजी की मुलाकात अलबर्ट गेट से हुई। उनकी यह मुलाकात आड्रे हाउस में हुई थी। वार्ता तीन दिन चली। सात जून को वे पटना लौट गए।

1917 से 1940 के बीच 12 बार रांची आए थे 

दस्तावेज बताते हैं कि सन 1917 से 1940 के बीच महात्मा गांधी का रांची 12 बार आना हुआ है. इन 12 यात्रा के दौरान उन्होंने लंबा समय रांची में बिताया है। दस्तावेज के मुताबिक चंपारण आंदोलन की रूपरेखा रांची में ही बनायी गयी थी। इसके अलावा रांची में उनका संबंध चर्च रोड स्थित  संत पॉल स्कूल के मैदान से भी है। यहां महात्मा गांधी ने 17 सितंबर, 1925 को एक सभा को संबोधित किया था।

जब शहीद चौक स्थित कोल्हू पहुंचे थे 

अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने रांची में कई स्थानों पर भ्रमण किया था। रांची के शहीद चौक  स्थित एक कोल्हू में भी गए। ग्रामउद्योग और स्वदेशी को बढ़ावा देने वाले इस कोल्हू में आज भी महात्मा गांधी का लिखा शुभकामना संदेश लगा हुआ है। रांची के व्यवसायी और गांधीवादी श्याम किशोर साहू का परिवार ने ये कोल्हू शुरू की थी।

                            image source:  social media

1940 में रामगढ़ कांग्रेस में भाग लेने के क्रम में आए थे रांची

महात्मा गांधी रामगढ़ में होने वाले कांग्रेस अधिवेशन में जाने के लिए रांची आए। कोकर में रहने वाले राय साहेब लक्ष्मी नारायण के साथ उनकी नई फोर्ड गाड़ी से रांची से रामगढ़ गए थे। यह कार आज भी सुरक्षित रखी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का महत्वपूर्ण अधिवेशन मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में 1940 में रामगढ़ में हुआ था।  जिसमें महात्मा गांधी, डा. श्रीकृष्ण सिंह, डा. राजेंद्र प्रसाद, सुभाष चंद्र बोस सहित कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए थे।

image source : social media
image source : social media

इसी कार से महात्मा गांधी 1940 में रांची से रामगढ़ अधिवेशन में शामिल होने गए थे

हजारीबाग शहर से महात्मा गांधी का गहरा नाता रहा

झारखंड के हजारीबाग शहर से महात्मा गांधी का विशेष लगाव रहा है। सबसे पहले महात्मा गांधी 18 सितंबर 1925 में हजारीबाग आए थे। महात्मा गांधी मांडू होते हुए हजारीबाग पहुंचे थे।

image source : social media

image source : social media

इस दौरान उन्होंने संत कोलंबस कॉलेज के व्लिटले हॉल में भाषण दिया था। इस हॉल में उन्होंने अशिक्षा, छुआछूत, पर्दा प्रथा, विधवा विवाह, हरिजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। सरस्वती देवी, त्रिवेणी प्रसाद और बाबू राम नारायण सिंह आदि प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्मा गांधी की अगवानी की थी. हजारीबाग आजादी की लड़ाई में राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था.

ये भी पढ़ें : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती आज, राज्यपाल रमेश बैस ने चित्र पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि

 

 

 

Related posts

मनरेगा की समीक्षा के बाद ग्रामीण विकास सचिव मनीष रंजन ने उप विकास आयुक्तों को सौंपे टास्क

Pramod Kumar

फैशन का बाजार लेकर Myntra तैयार, सस्ते में अच्छा खरीदने का दे रहा ऑफर्स

Pramod Kumar

Jharkhand: पाकुड़ में संरक्षण एवं शोध कार्य के लिए फॉसिल इकट्ठा करने का काम हुआ शुरू

Pramod Kumar