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पंजाब सरकार की नीयत में खोट! पीएम की सुरक्षा में सेंध मामले पर रिपोर्ट देने में आनाकानी, कर रही पैंतरेबाजी

Punjab PM Security Lapse

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पंजाब में सुरक्षित नहीं हैं? बुधवार की पीएम की बठिंडा एयरपोर्ट से वापसी तो ऐसा ही लगता है। शायद पंजाब के मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पंजाब में आकर रैलियां करें। इससे उन्हें अपनी कांग्रेस पार्टी की ‘हवा खराब’ होने के डर है। तभी पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध मामले में कोई रिपोर्ट देने में वह आनाकानी कर रहे हैं। बता दें, गृह मंत्रालय ने पीएम सुरक्षा में चूक मामले में चन्नी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। सीएम चन्नी अगर इस ‘महाचूक’ पर कोई रिपोर्ट नहीं देना चाहते तो इसका मतलब यही हुआ कि राज्य सरकार उस पर परदा डालना चाहती है। हालांकि पंजाब सरकार के सूत्र बता रहे हैं कि पीएम की सुरक्षा में चूक मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी बनायी गयी है, कमेटी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही केंद्र को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसका मतलब टाट मटोल (लीपापोती) करने के लिए पंजाब सरकार को कुछ और दिन मिल जायेंगे।

उच्च स्तरीय जांच कमेठी गठित की चन्नी सरकार ने

पंजाब सरकार के सूत्रों के अनुसार पीएम सुरक्षा चूक मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनी है। इस कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस मेहताब सिंह गिल, जस्टिस अनुराग वर्मा और गृह विभाग के प्रमुख सचिव हैं। कहा जा रहा है कि करीब 3 दिन जांच में लगेंगे। यानी पंजाब सरकार अभी केंद्र सरकार को कोई रिपोर्ट नहीं भेजने जा रही है। जब तक रिपोर्ट न मिलेगी, गृह मंत्रालय इस मामले में कार्रवाई भी नहीं कर सकता। कुल मिलाकर मामले को टालने की ये कोशिश दिखती है।

सीएम चन्नी को सफाई की जरूरत क्यों?

पीएम मोदी का पंजाब दौरा रद्द होने के बाद जब गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया और भाजपा उस पर हमलावर हो गयी तब आनन-फानन में पहले कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला और फिर खुद सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने सफाई देकर पक्का झाड़ लिया कि पंजाब सरकार की तरफ से कोई चूक नहीं हुई है। गोया पीएम से साथ पंजाब में कुछ हुआ ही नहीं है। सीएम चन्नी एक ही सवाल का जवाब दे देते, तब भी माना जा सकता था कि वह निर्दोष हैं। जब पीएम के इस दौरे में सड़क मार्ग का कोई कार्यक्रम तय नहीं था तब थोड़ी देर की दूरी तय करने में इतने किसान प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर कैसे आ गये? जब पंजाब सरकार की कोई गलती ही नहीं है तो वही रिपोर्ट बनाकर गृह मंत्रालय को भेजने में क्या परेशानी है? फिर कोई चूक हुई ही नहीं तब उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन ही क्यों, किस दिखावे के लिए?

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