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कृषक-पुत्र कड़िया मुंडा कृषि कानूनों के वापस होने से आहत, देखिये वीडियो में कैसे व्यक्त की अपनी पीड़ा

Karia Munda

झारखंड से खूंटी ब्यूरो ज्योत्सना की रिपोर्ट/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। इस पर खूंटी के पूर्व सांसद, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और पद्मभूषण कड़िया मुंडा ने वीडियो के माध्यम से अपना मंतव्य दिया है।

पीएम का उद्देश्य समझा नहीं गया – कड़िया मुंडा

प्रधानमंत्री ने जिस उद्देश्य से कृषि बिल का लाया था उस बिल को शायद लोग समझ नहीं पाये। इसलिए बहुत दिनों तक लगातार किसान विरोध करते रहे। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को लगा कि जब लोग कृषि बिल को नहीं चाह रहे हैं तो उसे वापस करना चाहिए। किन्तु विपक्ष के राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण विरोध के स्वर लंबे समय तक आंदोलन के रूप में चलते रहे। विपक्ष को लगता है कि चुनाव है, उसका फायदा उठाना चाहिए।

 

हर चीज में राजनीति उचित नहीं – कड़िया मुंडा

पूर्व में भी जब महंगाई बढ़ने पर पेट्रोल डीजल के मूल्यों में वृद्धि हुई तब सरकार ने ड्यूटी को कम कर पेट्रोल डीजल के दाम कम किये। तब भी विपक्ष राजनीति करता रहा। हर चीज में राजनीति करना उचित नहीं है। विपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने चुनाव के मद्देनजर पेट्रोल डीजल का दाम कम किया है। जो मुद्दे जनहित और देशहित में जो आवश्यक हैं उन मुद्दों पर विपक्ष अनावश्यक राजनीति करता है। चूंकि वर्त्तमान में विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। हर चीज में राजनीति करने से विपक्ष को कोई फायदा होने वाला नहीं है। राजनीति अपनी जगह पर है लेकिन समस्याओं के आधार पर राजनीति करना सही नहीं है।

कृषि बिल का उद्देश्य किसानों के लिए मुक्त बाजार – कड़िया मुंडा

कृषि बिल का मूल उद्देश्य यही था कि किसानों को मुक्त बाजार मिलना चाहिए। जिसके पास भी किसान अपनी उपज बेचना चाहें, ऊंचा से ऊंचा दाम मिले वहां बेचें। चाहे किसान दूसरे राज्यों में भी अपनी उपज अपनी इच्छानुसार बेच सकते थे यह छूट थी लेकिन अब कृषि बिल के वापस होने पर शायद किसानों को ये छूट नहीं मिलेंगी।

आंदोलन से सामान्य नागरिकों को कठिनाइयां – कड़िया मुंडा

दो पक्ष है एक किसानों का पक्ष और एक सामान्य नागरिको का पक्ष। इस आंदोलन से सामान्य नागरिकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन से कई प्रमुख सड़कें बन्द हो गयी थी। आना जाना लोगों का बंद हो गया था।

संयोग से कोरोना के कारण लोगों का आना-जाना कम हो गया था  हरियाणा का पूर्वी क्षेत्र करनाल से लेकर गुड़गांव तक और राजस्थान का अरावल और दिल्ली के कई इलाकों में किसानों के आंदोलन से सारी चीजें अवरुद्ध हो गयी थीं। इन सब चीजों को देखते हुए सरकार ने कृषि बिल की वापसी का निर्णय लिया है।

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