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परिवार का घोटाला या घोटालों का परिवार, कई घोटालों में फंसी है लालू एंड फैमिली

Lalu Family Scam

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पैरोल पर जेल से बाहर राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की कल किस्मत का फैसला होना है कि वह जेल से बाहर रहेंगे या फिर वापस जेल जायेंगे। सीबीआई कोर्ट में चारा घोटाले में जो फैसला सुरक्षित रखा है, वह कल सुनाया जाना है। कोर्ट का आदेश है कि फैसला सुनने के लिए लालू को सशरीर उपस्थित रहना है। इसलिए लालू यादव दो दिन पहले ही रांची आ चुके हैं।

लालू चारा घोटाला मामले की सुनवाई के लिए रांची में हैं। लेकिन लालू यादव और उनके परिवार पर सिर्फ चारा घोटाला ही इकलौता घोटाला नहीं है। यहां घोटालों की फेहरिस्त है। कुछ पर केस चल रहे हैं, कुछ केस में सजा हो चुकी है, कुछ केस से बरी हो चुके हैं। केस चाहे लालू यादव पर हो या लालू यादव परिवार पर ये ज्यादातर केस उनके मुख्यमंत्रित्व काल या फिर उनके केन्द्रीय रेलमंत्री रहते घोटालों के हैं। कुछ घोटाले राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री रहते भी हुए हैं। यूपीए सरकार में 2004-09 में रेलमंत्री और 1990-97 में मुख्यमंत्री रहने के दौरान लालू यादव परिवार पर ये सभी मामले दर्ज किये गये हैं। ध्यातव्य है कि, 1997 में लालू यादव की गर्दन जब चारा घोटाले में फंसी तब  उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया। अपने राजनीतिक करियर में लालू यादव कई बार जेल जा चुके हैं। उन पर चुनाव लड़ने का पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

चारा घोटाला

1996 में सीबीआई ने चाईबासा में 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद 1997 में लालू प्रसाद यादव को न्यायिक हिरासत में पांच साल तक के लिए जेल भेज दिया गया। यह फैसला आते ही लालू की मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में आ गयी। कुर्सी खतरे में आते ही लालू यादव ने पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। बता दें, 1996 में पशुपालन विभाग के दफ्तरों में दबिश दी गई थी। इस दौरान कुछ फर्जी कंपनियों द्वारा पैसों की हेराफेरी करने का मामला सामने आया। इसके बाद 11 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया था।लालू यादव के चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

आय से अधिक संपत्ति

1998 में लालू प्रसाद यादव आय से अधिक संपत्ति मामले में भी फंसे थे। आयकर विभाग ने लालू यादव के सरकारी खजाने से 46 लाख रुपए निकालने का दावा किया था। इस केस में राबड़ी देवी भी सह-अभियुक्त थीं। हालांकि 2000 में पटना हाईकोर्ट से राबड़ी को जमानत मिल गई और 2006 में लालू और राबड़ी को इस केस से बरी कर दिया गया।

रेलवे ठेके में धांधली

अवैध तरीके से रेलवे ठेके बांटने में भी लालू यादव का नाम आया था। तब लालू यादव रेलमंत्री थे। लालू पर दो होटलों से जुड़े ठेके देने में धांधली का आरोप है। 2004 में सीबीआई ने जांच में पाया कि सुजाता होटल को गैरकानूनी तरीके से टेंडर दिया गया। इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, लालू के सहयोगी प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता, विजय कोचर, विनय कोचर, पटना में सुजाता होटल्स के दोनों डॉयरेक्टर, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (लारा प्रोजेक्टस) आईआरसीटीसी के पूर्व एमडी सहित कई लोगों के ऊपर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में सीबीआई ने तेजस्वी यादव पर समन जारी किया गया था।

मीसा और उनके पति शैलेश पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

लालू परिवार पर एक बड़ा मामला मनी लॉन्ड्रिंग का दर्ज है। ईडी ने लालू की बेटी मीसा भारती के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की अदालत में चार्जशीट भी दायर की है। इस केस में ईडी ने मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार का फॉर्म हाउस कुर्क किया था। मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये के बेनामी संपत्ति के मामले में ईडी द्वारा मीसा और शैलेश के ठिकानों पर छापेमारी की गयी थी। यह फॉर्म हाउस मुखौटा कंपनियों के जरिए आये धन से तब खरीदा गया था, जब लालू यादव रेलमंत्री थे।

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