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पूरा झारखंड मानव तस्करों का पड़ाव है, रोक लगाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है

National Human Trafficking Awareness Day

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-प्लस

पूरे देश के लिए झारखंड मानव तस्करों का सबसे बड़ा पड़ाव बना हुआ है। राज्य के कई जिले मानव तस्करों के जाल में फंसे हुए हैं। सच कहा जाये तो झारखंड प्राकृतिक संसाधनों की ही खान नहीं है, बल्कि मानव तस्करी का भी खदान बन गया है। यहां से जवान लड़कियां, पुरुष ही नहीं बच्चे भी अलग-अलग उद्देश्य से तस्करी कर ले जाये जाते हैं, फिर पूरे देश में इनका शोषण होता है। झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे आदिवासी राज्यों के पर भी मानव तस्करों की निगाहें रहती हैं।

मानव तस्करी के शिकार अधिकांशतः आदिवासी ही होते हैं। क्योंकि ये शारीरिक रूप से सबल होते हैं। मजदूरी कराने से लेकर युवतियां का यौन शोषण तक किया जाता है। घरेलू श्रम, खेतों, ईंट भट्ठों, फैक्टरियों में काम के नाम पर इनका प्लेसमेंट किया जाता है। युवतियों का यौन शोषण होता है। कई दलालों ने तो दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में प्लेसमेंट एजेंसियां भी खोल रखी हैं। ये एजेंसियां रोजगार मुहैया कराने के नाम पर ज्यादातर मासूम लड़कियों की तस्करी करती हैं। प्रलोभन में आकर आदिवासी फिर अपना सबकुछ बरबाद कर लेते हैं। 12-14 घंटे काम करना इनकी नियती बन जाती है। युवतियों की तस्करी यौन शोषण के लिए की जाती है। यह भी देखा गया है कि बंधुआ मजदूरी से लेकर जबरन विवाह के उद्देश्य से भी हरियाणा और पंजाब इन्हें ले जाया जाता है। एक और तरह का शोषण भी इन युवतियों का होता है। यह बात भी प्रकाश में आयी है कि झारखंड से सरोगेसी के लिए महिलाओं की तस्करी की जाती है। जब इनके बच्चे हो जाते हैं तब उन्हें बेच दिया जाता है।

मानव तस्करी के प्रभावित झारखंड के जिले

गुमला, गढ़वा, साहिबगंज, दुमका, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, पलामू, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, गिरडीह, कोडरमा और लोहरदगा जिले मानव तस्करी से सर्वाधिक प्रभावित हैं। इनमें अधिकांशतः उरांव,  मुंडा, संथाल, लुप्तप्राय पहाड़िया और गोंड जनजातियों के युवक-युवतियां होते हैं।

बच्चों की भी होती है मानव तस्करी

झारखंड के बच्चों की तस्करी ज्यादातर दिल्ली में सुव्यवस्थित प्लेसमेंट एजेंसी रैकेट के माध्यम से होती है। ये प्लेसमेंट एजेंसियां दिल्ली, फरीदाबाद, गुड़गांव और नोएडा में आदिवासी बच्चों की आपूर्ति करती हैं। ये बच्चे ज्यादातर 11-16 आयु वर्ग के होते हैं। उत्तर प्रदेश में कालीन उद्योग में बाल श्रम के लिए तस्करी के लिए जाना जाता हैं।

लापता भी हो गयी हैं हजारों युवतियां

मानव तस्करों द्वारा ले गयी झारखंड के से हजारों आदिवासी लड़कियां लापता भी हो गई हैं। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि  राज्य के पास इन लड़कियों का कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के आदिवासी जिलों की भी यही कहानी है। सिर्फ युवतियां ही नहीं स्कूल जाने वाली लड़कियां भी इन मानव तस्करों की भेंट चढ़कर लापता हो चुकी हैं।

मानव तस्करी के विरुद्ध क्या हो रहे हैं सरकारी प्रयास?

देखने को तो राज्य में 12 जिलों रांची, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, गुमला, पलामू, चाईबासा, दुमका, लातेहार, साहिबगंज, गोड्डा में और गिरिडीह में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना संचालित है। इसका दायरा भी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। धनबाद के टाउन थाना, पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला, सरायकेला-खरसांवा के सरायकेला, गढ़वा के महिला थाना, हजारीबाग के सदर थाना, कोडरमा में तिलैया थाना, चतरा में सदर थाना, रामगढ़ में महिला थाना, बोकारो में बेरमो थाना, पाकुड़ में लिट्टीपाड़ा थाना, देवघर में जसीडीह थाना और जामताड़ा के नारायणपुर थाना में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना  खोलने का प्रस्ताव रखा  गया है। यही नहीं मानव तस्करी के शिकार बच्चे-बच्चियों, युवक-युवतियों को मुक्त कराकर उनके पुनर्वास का भी प्रयास किया जा रहा है। फिर भी मानव तस्करी ज्यों की त्यों जारी है।  कई स्वयं सहायता समूह भी गांवों जाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य में मानव तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव साफ देखा जा रहा है।

झारखंड के आठ जिलों में स्थापित है एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट

मानव तस्करी की रोकथाम के लिए झारखंड के आठ जिले में आठ “एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट” स्थापित हैं।

  1. जिला- खूंटी, खूंटी, पी.एस. कैंपस, एस.आई. मीरा सिंह, 9771368512
  2. जिला- दुमका, टाउन पी.एस. कैंपस, एस.आई. विजय सिंह, 9546277161
  3. जिला- सिमडेगा, टाउन पी.एस. कैंपस एस.आई. देवेंद्र कुमार, 6204468245/6204507256
  4. जिला का नाम- गुमला, टाउन पी.एस. कैंपस, एस.आई. राम कुमार सिंह, 7870933614
  5. जिला- रांची, कोतवाली पी.एस. कैंपस, इंस्पेक्टर ब्रिज कुमार, 9431706158
  6. जिला- चाईबासा, सदर पी.एस. कैंपस,एस. आई. कार्तिक भगत, 9771785545/7979924376
  7. जिला- लोहरदगा, टाउन पी.एस. कैंपस, एस.आई. अब्राहम अमला मुर्मू, 8434940784
  8. जिला- पलामू, सदर पी.एस. कैंपस, एस.आई. प्रियंका आनंद, 8539014077/8789334647

आम जन भी jharkhand.mygov.in अपने सुझाव देकर मानव तस्करी पर नियंत्रण में अपना योगदान दे सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Jharkhand HC की टिप्पणी: झारखंड पुलिस नहीं जानती गिरफ्तारी कानून, सरकार को निर्देश – कराएं कैप्सूल कोर्स

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