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UGC के इस कदम से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए खत्म हो जायेगी PhD की अनिवार्यता

Eliminating the requirement of PhD for teaching in UGC central universities

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)  पढ़ाई की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए अपने बड़े नियम में बड़ा संशोधन करने जा रहा है। UGC केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञों और पेशेवरों को भी छात्रों का मार्गदर्शन का मौका देना चाहता है। इसके लिए उसने यह बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। दरअसल, देश में कई ऐसे विशेषज्ञ हैं जो केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए समय देने के लिए तैयार हैं, लेकिन UGC अपने ही नियमों में बंधा होने की वजह से उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे पा रहा है। बता दें, केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए प्राध्यापकों को पीएचडी डिग्री आवश्यक है। UGC इसी बाध्ययता को समाप्त करने जा रहा है।

यूजीसी के ही अनुसार, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और पेशेवर अपने क्षेत्र में ज्ञान तो भरपूर रखते हैं, लेकिन पीएचडी की डिग्री कम लोगों के पास होती है। इसलिए पीएचडी की बाध्यता समाप्त कर प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस जैसे विशेष पद सृजित किये जा रहे है। इससे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय संबंध पढ़ाने का मौका उन्हें मिल सकेगा।

UGC के अध्यक्ष एम जगदेश कुमार ने कहा, कई विशेषज्ञ हैं जो अलग-अलग क्षेत्रों का विशेष अनुभव हो, वह अनुभव छात्रों में बांटना भी चाह रहे हैं, लेकिन हम उन्हें मौजूदा नियमों के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए नियुक्त नहीं कर सकते। इसलिए, यह निर्णय लिया गया कि विशेष पद सृजित किए जाएंगे जिसमें पीएचडी की कोई आवश्यकता नहीं हो। तब ये विशेषज्ञ अपने अनुभवों का लाभ छात्रों को दे पायेंगे। इसके अलावा 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ भी पूर्ण या अंशकालिक फैकल्टी के रूप में शामिल हो सकते हैं और 65 वर्ष की आयु तक पढ़ा सकते हैं।

UGC ने चेयरपर्सन एम जगदेश कुमार के साथ एक बैठक में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियमों में संशोधन पर काम करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। UGC बिना किसी देरी के शिक्षकों की नियुक्ति को सुव्यवस्थित और सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल की भी योजना बना रहा है। वैसे भी इस समय देश में शिक्षकों की काफी कमी है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार दिसंबर 2021 तक, केंद्र द्वारा वित्त पोषित संस्थानों में दस हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली थे।

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